नई दिल्ली। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के एक बयान ने देश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। ओवैसी ने अपने बयान में कहा कि यदि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को उनके ही देश से अगवा कर सकते हैं, तो भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी पाकिस्तान जाकर 26/11 मुंबई आतंकी हमलों के मास्टरमाइंड को भारत वापस ला सकते हैं। उनके इस बयान को लेकर राजनीतिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
26/11 हमले आज भी देश के लिए एक खुला जख्म
ओवैसी का यह बयान राष्ट्रीय सुरक्षा, आतंकवाद और विदेश नीति जैसे संवेदनशील मुद्दों से जुड़ा माना जा रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार से आतंकवाद के खिलाफ और अधिक सख्त तथा निर्णायक कदम उठाने की मांग की। AIMIM प्रमुख ने कहा कि 26/11 हमले आज भी देश के लिए एक खुला जख्म हैं और इसके दोषियों को सजा दिलाना भारत की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
भाजपा ने बयान को बताया गैर-जिम्मेदाराना और भड़काऊ
वहीं, भाजपा और अन्य दलों ने ओवैसी के बयान को गैर-जिम्मेदाराना और भड़काऊ बताया है। उनका कहना है कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और सुरक्षा मामलों की तुलना इस तरह करना सही नहीं है। भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि ओवैसी ऐसे बयानों के जरिए केवल सुर्खियों में बने रहना चाहते हैं।
कांग्रेस और कुछ विपक्षी दलों ने भी बयान पर सतर्क प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि आतंकवाद के मुद्दे पर राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्रीय एकता दिखानी चाहिए।
फिलहाल ओवैसी के इस बयान ने एक बार फिर पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद, 26/11 के पीड़ितों को न्याय और भारत की विदेश नीति पर चर्चा को तेज कर दिया है। आने वाले दिनों में इस बयान पर सियासी बयानबाजी और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।