डेस्क। अमेरिकी की स्पेस एजेंसी नासा आज अपना ड्र्रीम प्रोजेक्ट मून मिशन आर्टेमिस-II (Artemis-II) लॉन्च कर रही है। 1972 में अपोलो-17 मिशन के 53 साल बाद नासा मून मिशन लॉन्च कर रहा है। यह लॉन्चिंग आज एक अप्रैल 2026 दिन बुधवार को अमेरिका के फ्लोरिडा शहर में बने कैनेडी स्पेस सेंटर से शाम 6:24 बजे (भारतीय समयानुसार 2 अप्रैल सुबह 3:54 बजे) के आस-पास होगी, लेकिन लॉन्चिंग वेदर अपडेट और टेक्निकल लेवल पर निर्भर करेगी।
10 दिन का फ्लाईबाई मून मिशन
बता दें कि आर्टेमिस-II (Artemis-II) 10 दिन एक फ्लाईबाई मिशन होगा, यानी यह मिशन चंद्रमा पर लैंड नहीं करेगा, बल्कि चक्कर काटकर लौट आएगा। मिशन के तहत ओरियन स्पेसक्राफ्ट को दुनिया के सबसे शक्तिशाली ‘स्पेस लॉन्च सिस्टम’ रॉकेट के जरिए अंतरिक्ष में भेजा जाएगा।
आर्टेमिस-II मिशन का मकसद
मिशन का मकसद चंद्रमा की परिक्रमा करना रहेगा। स्पेसक्राफ्ट ओरियन चंद्रमा के चारों ओर एक ‘फिगर-8’ शेप में परिक्रमा करेगा। साथ ही ओरियन स्पेसक्राफ्ट के लाइफ सपोर्ट और नेविगेशन सिस्टम का परीक्षण करना भी इसका मकसद रहेगा। क्योंकि साल 2027 के आर्टेमिस-III और मंगल मिशन में इसी का इस्तेमाल किया जाना है।
मिशन में पहली बार महिला यात्री
बता दें कि आर्टेमिस-II मिशन में 4 यात्री होंगे, जिनमें पहली बार एक महिला और एक अफ्रीकन-अमेरिकन (अश्वेत) एस्ट्रोनॉट भी शामिल होगा। मिशन की कमान रीड वाइसमैन के हाथ में होगी, जो 50 साल के हैं और पूर्व अमेरिकन नेवी पायलट हैं। वे 165 दिन इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में बिता चुके हैं।
49 साल के विक्टर ग्लोवर मिशन के पायलट हैं और पहले अफ्रीकन-अमेरिकन (अश्वेत) अंतरिक्ष यात्री होंगे, जो चांद तक जाएंगे। इनके अलावा मिशन की एक्सपर्ट 47 साल की क्रिस्टीना कोच होंगी, जो चांद के पास जाने वाली पहली महिला होंगी। 328 दिन अंतरिक्ष में रहने का रिकॉर्ड बना चुकी हैं। 50 साल के कनाडा निवासी जेरेमी हैनसेन भी पहली बार अंतरिक्ष यात्रा करेंगे।
23 लाख किमी की यात्रा का टारगेट
बता दें कि आर्टेमिस-II मिशन में अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी से रिकॉर्ड 230000 मील की दूरी तय करेंगे। स्पेसक्राफ्ट ओरियन चंद्रमा से धरती पर वापस लौटने से पहले चंद्रमा के सुदूर भाग में जाएगा और करीब 10300 किलोमीटर दूर तक जाएगा।
आर्टेमिस-1 मिशन कब लॉन्च हुआ ?
नासा ने 3 साल पहले 15 नवंबर 2022 को आर्टेमिस-1 मिशन लॉन्च किया था, जो 3 असफल प्रयासों के बाद लॉन्च हुआ था। यह मिशन 25 दिन का था और 14 लाख मील की यात्रा करके 10 दिसंबर 2022 को धरती पर लौटा था। इससे पहले दिसंबर 1972 में अपोलो-17 मिशन चांद के करीब पहुंचा था।
अमेरिका के चांद तक 6 मिशन गए
अमेरिका आज तक चांद पर 6 मिशन भेज चुका है, जिसमें से अपोलो-11 मिशन कामयाब रहा था। इस मिशन के तहत 20 जुलाई 1969 को नील आर्मस्ट्रॉन्ग और एडविन ऑल्ड्रिन ने चांद की सतह पर उतरकर वॉक करके इतिहास रचा था और आज तक उस रिकॉर्ड को कोई नहीं तोड़ पाया।
मिशन के 10 दिन क्या-क्या होगा?
बता दें कि मिशन के पहले और दूसरे दिन स्पेसक्राफ्ट पृथ्वी की कक्षा में एंट्री करेगा। यहां क्रू मेंबर्स लाइफ सपोर्ट सिस्टम, कम्युनिकेशन, नेविगेशन की टेस्टिंग करेगा। स्पेसक्राफ्ट को मैन्युअली कंट्रोल में लेकर टेस्टिंग भी करेंगे।
मिशन के तीसरे और चौथे दिन ओरियन का इंजन ‘ट्रांसलूनर इंजेक्शन’ करेगा और स्पेसक्राफ्ट को धरती की कक्षा से निकालकर चांद की ओर धकेलेगा। इस दौरान 4 इंसान धरती से सबसे ज्यादा दूरी पर होंगे।
5वें से 8वें दिन ओरियन चंद्रमा का चक्कर लगाएगा। चंद्रमा के पीछे से गुजरेगा। ‘फ्री-रिटर्न’ ट्रैजेक्ट्री के दौरान चांद की ग्रैविटी खुद ओरियन को वापस धरती की ओर मोड़ देगा। इस दौरान अंतरिक्ष यात्री चांद की सतह को बेहद करीब से देखेंगे।
9वें और 10वें दिन का सफर सबसे ज्यादा चैलेंजिंग होगा, क्योंकि इन 2 दिन में ओरियन 40233 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से धरती के वायुमंडल में एंट्री करेगा। सबसे ज्यादा तापमान झेलेगा और प्रशांत महासागर में स्पलैशडाउन करेगा।