मुंबई। भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील हो गई है। लंबे समय से इसका इंतजार किया जा रहा था क्योंकि अमेरिका भारत का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है। इस डील से एक्सपोर्टर्स के साथ-साथ शेयर बाजार के निवेशकों में भी उत्साह का माहौल है। विदेशी निवेशकों के एक बार फिर भारतीय बाजार का रुख करने की उम्मीद है। पिछले साल उन्होंने भारतीय बाजार में भारी बिकवाली की थी और जनवरी में भी स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया था। लेकिन अमेरिका के साथ डील से सबकुछ बदलने वाला है।
शेयर मार्केट में भारी उछाल
भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील से शेयर मार्केट में आज भारी उछाल देखा जा रहा है। बीएसई सेंसेक्स में 2500 अंक से अधिक तेजी आई है जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 700 अंक से अधिक उछला है। 9.22 बजे सेंसेक्स 2509.30 अंक यानी 3.07% की तेजी के साथ 84,175.76 अंक पर ट्रेड कर रहा था। निफ्टी 769.90 अंक यानी 3.07% तेजी के साथ 25,858.30 अंक पर आ गया।
अमेरिका को एक्सपोर्ट
भारत से अमेरिका को एक्सपोर्ट होने वाली चीजों में इलेक्ट्रिक मशीनरी, नेचुरल और कल्चर्ड पर्ल्स, दवाएं, न्यूक्लियर रिएक्टर और बॉयलर, मिनरल फ्यूल्स और ऑयल शामिल है। पिछले फाइनेंशियल ईयर में भारत ने अमेरिका को 15.9 अरब डॉलर की इलेक्ट्रिक मशीनरी एक्सपोर्ट की थी। अमेरिका से आयात होने वाले सामान में मिनरल फ्यूल, नेचुलर एंड कल्चर्ड पर्ल्स, न्यूक्लियर रिएक्टर और बॉयलर, इलेक्ट्रिक मशीनरी शामिल है।
किस सेक्टर को होगा फायदा
ट्रेड डील होने के बाद अमेरिकी बाजार में भारतीय सामान अब ज्यादा प्रतिस्पर्द्धी हो जाएगा। मसलन भारतीय गारमेंट्स पर अब 18 फीसदी टैरिफ लगेगा जबकि बांग्लादेश और श्रीलंका पर यह 20 फीसदी है। इसी तरह भारतीय कारपेट को भी फायदा होगा। 50 फीसदी टैरिफ के कारण भारतीय कारपेट को काफी मार्केट शेयर गंवाना पड़ा था। लेकिन अब यह तुर्की के कारपेट की तुलना में सस्ता बैठेगा। इसी तरह अमेरिका के बाजार में एक बार फिर भारतीय झींगा सस्ता हो जाएगा। रत्न एवं आभूषण निर्यात करने वाली कंपनियों ने राहत की सांस ली है।
भारत-अमेरिकी आपसी ट्रेड
अमेरिका भारत का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर हैं। दोनों देशों के बीच आपसी व्यापार 131.84 अरब डॉलर का है। सबसे बड़ी बात यह है कि अमेरिका के साथ भारत ट्रेड सरप्लस की स्थिति में है। दोनों देश पिछले साल फरवरी से ट्रेड एग्रीमेंट पर बातचीत कर रहे हैं। दोनों देशों ने 2030 तक आपसी ट्रेड को 500 अरब डॉलर पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।