नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी भीषण तनाव और ईरान-इजरायल युद्ध की आहट के बीच भारत के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री रास्ते, ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) में फंसे भारतीय रसोई गैस (LPG) के टैंकरों को निकालने का रास्ता साफ होता दिख रहा है। शिपिंग डेटा के अनुसार, भारतीय झंडे वाले दो विशाल गैस टैंकर इस खतरनाक रास्ते को पार करने के लिए तैयार हैं।
होर्मुज के ‘मौत के रास्ते’ पर भारतीय जांबाज
पिछले कुछ दिनों से होर्मुज स्ट्रेट में सन्नाटा पसरा हुआ था। युद्ध के खतरे को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों ने इस रास्ते से अपने जहाज भेजने बंद कर दिए थे। आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में इस रास्ते से एक भी कच्चा तेल (Crude Oil) ले जाने वाला टैंकर नहीं गुजरा है। ऐसे में भारतीय टैंकरों— ‘पाइन गैस’ (Pine Gas) और ‘जग वसंत’ (Jag Vasant) का आगे बढ़ना एक साहसिक कदम माना जा रहा है। ये दोनों जहाज वर्तमान में यूएई के शारजाह के पास लंगर डाले हुए हैं और सिग्नल मिलते ही आगे बढ़ेंगे।
करोड़ों भारतीय रसोइयों की उम्मीद
भारत अपनी जरूरत का लगभग 90 प्रतिशत एलपीजी इसी रास्ते से मंगाता है। वर्तमान में भारत के कुल 22 जहाज खाड़ी के भीतर अलग-अलग बंदरगाहों पर फंसे हुए हैं, जिनमें भारी मात्रा में रसोई गैस और तेल भरा है। ‘पाइन गैस’ को इंडियन ऑयल (IOC) और ‘जग वसंत’ को बीपीसीएल (BPCL) ने किराए पर लिया है। अगर ये जहाज सुरक्षित भारत पहुंच जाते हैं, तो देश में रसोई गैस की संभावित किल्लत का खतरा काफी हद तक टल जाएगा।
पीएम मोदी की कूटनीति और नौसेना का पहरा
इस सफल ऑपरेशन के पीछे भारत की सक्रिय कूटनीति और सैन्य तैयारी का बड़ा हाथ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्रालय लगातार ईरानी अधिकारियों के संपर्क में हैं ताकि भारतीय जहाजों को ‘सेफ पैसेज’ (सुरक्षित रास्ता) मिल सके। वहीं, भारतीय नौसेना ने ‘ऑपरेशन संकल्प’ के तहत अपने युद्धपोतों को तैनात कर रखा है, जो इन टैंकरों को सुरक्षा घेरा (Escort) प्रदान करेंगे।