वेब सीरीज रिव्यू: मामला लीगल है सीजन 2
Authored by: उपमा सिंह
•Produced by: स्वपनल सोनल
ऐक्टर : रवि किशन,निधि बिष्ट,अंजुम बत्रा,नाएला ग्रेवाल,अनंत वी जोशी,कुशा कपिला,दिनेश लाल निरहुआ,दिव्येंदु भट्टचार्या,बृजेंद्र काला
श्रेणी :Hindi, Drama, Comedy
डायरेक्टर :राहुल पांडे
कोर्ट-कचहरी की दुनिया के अजब-गजब केस, काले कोट वाले वकील, उनके साम, दाम, दंड, भेद वाले दांव-पेंच, और ढेर सारा ड्रामा। साल 2024 में वेब सीरीज ‘मामला लीगल है’ ने इन सारे तत्वों को एकसाथ पिरोकर दर्शकों का खूब दिल जीता था। इसलिए, पटपड़गंज सेशन कोर्ट और उसके अतरंगी किरदारों की ये कहानी अपने दूसरे सीजन में बढ़ चली है। चूंकि, इस बार कहानी के मुख्य किरदार विशेश्वर दयाल उर्फ वीडी त्यागी (रवि किशन) वकील का काला कोट उतारकर, कोर्ट के प्रमुख जिला जज की कुर्सी पर विराजमान हो चुके हैं, तो सीरीज भी जज साहब की जिम्मेदारियों, चुनौतियों और दुविधाओं पर ज्यादा फोकस करती है। इस कारण वकीलों की जद्दोजहद और कोर्ट रूम में गरमागरम जिरह वाला पहलू इस बार थोड़ा कमजोर रह गया है।
‘मामला लीगल है 2’ की कहानी
कहानी वीडी त्यागी (रवि किशन) के पटपड़गंज के प्रमुख जिला जज के रूप में शपथ ग्रहण से शुरू होती है। इसके बाद त्यागी और दर्शकों, दोनों को इस महत्वपूर्ण पद की चुनौतियों का अहसास होता है। कैसे एक जज अपने पूर्व साथी वकीलों को देखकर मुस्कुरा तक नहीं सकता, अपने जिगरी वकील दोस्त का जन्मदिन तक नहीं मना सकता, कोर्ट परिसर को बेहतर बनाने या केसेज का तेजी से निपटारा करने की कोशिश, उसके लिए भी कितनी टेढ़ी खीर है, वेब सीरीज इन जटिल पहलुओं को हल्के-फुल्के अंदाज से दर्शकों के सामने खोलती है।
दूसरी ओर, वीडी त्यागी के पुराने चैंबर में लखमीर मिंटू (अंजुम बत्रा) और सुजाता दीदी (निधि बिष्ट) के बीच चैंबर के नाम को लेकर तनातनी है। हार्वर्ड रिटर्न अनन्या श्रॉफ (नाएला ग्रेवाल) अब भी आदर्शवादी तरीके से लोगों को न्याय दिलाने की कोशिश में लगी हुई है। इस बार उसका सामना एक पुरानी विरोधी नैना अरोड़ा (कुशा कपिला) से भी होता है।
‘मामला लीगल है 2’ का ट्रेलर
‘मामला लीगल है सीजन 2’ वेब सीरीज रिव्यू
इस बार भी केसेज के मामले में यह सीरीज अपने पिछले सीजन का सुर पकड़कर चलने की कोशिश करती है। पुरुषों के साथ छेड़छाड़ पर कोई कानून न होने, एक आदमी की प्रॉपर्टी पर सामाजिक दिखावे वाली पत्नी का हक होना चाहिए, या होमोसेक्सुअल प्रेमी, और शादी के बाद बेटा मां की सुने या पत्नी की? जैसे कुछ रोचक मामलों पर सवाल उठाती है। लेकिन ये केसेज उतने मजेदार या असरदार नहीं बन पाए हैं।
राहुल पांडे निर्देशित यह सीरीज जजेज चैंबर यानी रवि किशन वाले ट्रैक में प्रभावित करती है, जबकि वकीलों के चैंबर वाले मोर्चे पर इस बार कमजोर पड़ जाती है। मसलन, मिंटू जी और सुजाता दीदी के रिश्ते वाला ट्रैक खींचा हुआ और दोहराव भरा लगता है। अनन्या और नैना के एक-दूसरे को मात देने के पीछे की कहानी भी अधूरी छोड़ दी गई है। इस मामले में इस बार भावनात्मक गहराई की थोड़ी कमी खलती है।
सीरीज का सबसे मजबूत पक्ष इस बार भी रवि किशन और उनकी एक्टिंग ही है। अपने अंदाज के अलहदा जज के रूप में भी वह महफिल लूट लेते हैं। उनके अलावा, दिव्येंदु भट्टाचार्य ने भी अपने रहस्यमयी किरदार को बखूबी निभाया है। निश्चित तौर पर वह सीरीज का बेहतरीन ट्विस्ट है।
बाकी किरदारों को इस बार ज्यादा उभरने का मौका नहीं मिला है। फिर भी निधि बिष्ट, नाएला अग्रवाल, अनंत जोशी, अंजुम बत्रा, कुशा कपिला आदि भी अपनी-अपनी भूमिकाओं के साथ न्याय करते हैं। जबकि, वनस्पति जी की भूमिका में दिनेश लाल निरहुआ असर छोड़ने में कामयाब रहे हैं।
क्यों देखें- हल्के फुल्के मनोरंजन और रवि किशन के लिए यह कोर्ट रूम कॉमिडी वेब सीरीज Netflix पर देखी जा सकती है।