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UP पुलिस दरोगा परीक्षा में पंडित शब्द पर बवाल: कैसे तैयार होता है पुलिस SI भर्ती परीक्षा का प्रश्न पत्र, कौन जवाबदेह , जाने पूरी जानकारी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश उप निरीक्षक (SI) भर्ती परीक्षा में आए एक प्रश्न के जवाब से बखेड़ा खड़ा हो गया है। सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश मंत्री अभिजात मिश्र ने सीएम योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर जांच कराकर दोषियों. . .

लखनऊ। उत्तर प्रदेश उप निरीक्षक (SI) भर्ती परीक्षा में आए एक प्रश्न के जवाब से बखेड़ा खड़ा हो गया है। सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश मंत्री अभिजात मिश्र ने सीएम योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है तो डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने भी एक सवाल के जवाब में दिए गए विकल्प पर आपत्ति जताई है।उन्होंने कहा है कि सरकार ने इस मामले में जांच के आदेश दे दिए हैं. वे खुद किसी भी जाति, समुदाय या परंपरा के प्रति अपमानजनक शब्दों के खिलाफ हैं. भाजपा सभी का आदर करती है।।
उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती बोर्ड की ओर से 14 और 15 मार्च 2026 के लिए चार पालियों में उप निरीक्षक भर्ती की परीक्षा का आयोजन किया गया। 14 मार्च को बांटे गए प्रश्न पत्र सामान्य हिन्दी में तीन नंबर पर पूछा गया सवाल है- अवसर के अनुसार बदल जाने वाला इस वाक्यांश के लिए एक शब्द का चयन कीजिए. इसके जवाब में चार ऑप्शन दिए गए हैं। ए-पंडित, बी-अवसरवादी, सी-निष्कपट, डी-सदाचारी।

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बस इसी सवाल और जवाब में पंडित शब्द के उपयोग ने बवाल कर दिया है। परीक्षा 15 मार्च को भी दो पालियों में होगी. इस परीक्षा में लगभग 45 सौ पदों के लिए करीब 15 लाख अभ्यर्थी शामिल हो रहे हैं। राज्य के सभी जिलों में लगभग ग्यारह सौ केंद्र बनाए गए हैं. इस मामले में सरकार या बोर्ड क्या फैसला लेगा, यह वही जानें लेकिन इस तरह के हल्के सवाल से प्रश्नपत्र की पवित्रता पर सवाल उठता है।अब सवाल उठता है कि किसी भी प्रतियोगी परीक्षा का प्रश्नपत्र बनाने का पूरा प्रॉसेस क्या है? कौन इस पर अंतिम मुहर लगाता है? अगर सब कुछ फुलप्रूफ है तो इस तरह के बेजा सवाल कैसे किसी प्रश्नपत्र का हिस्सा बन जाते हैं?

हर प्रतियोगी परीक्षा में प्रश्नपत्र तैयार करने का फार्मूला एक

संघ लोक सेवा आयोग, एसएससी, राज्य पब्लिक सर्विस कमीशन, इंजीनियरिंग, मेडिकल, बैंकिंग या यूपी एसआई जैसी परीक्षा के लिए प्रश्न-पत्र तैयार करने का लगभग एक ही फार्मूला है। यह पूरी प्रक्रिया अत्यंत गोपनीय रखने की व्यवस्था है. इसमें सुरक्षा और निष्पक्षता का विशेष ध्यान रखा जाता है. इसके लिए कुछ निश्चित चरण तय हैं. उन्हीं के अनुरूप प्रश्नपत्र तैयार किए जाते हैं।

किसने तैयार किया यूपी SI परीक्षा का प्रश्नपत्र?

जिस एसआई परीक्षा के प्रश्नपत्र में एक सवाल के जवाब में लिखे एक शब्द पर बवाल हो रहा है, इस परीक्षा को करवाने की अंतिम जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड है. बोर्ड की अपनी सीमित क्षमता है। इसके प्रमुख महानिदेशक स्तर के अधिकारी हैं. उनके साथ पुलिस के ही अफसरों की टीम है।
ऐसे में प्रश्नपत्र बनाने की जिम्मेदारी हमेशा से यह संगठन किसी एजेंसी को देता आ रहा है। एक्सपर्ट्स की तलाश करने से लेकर प्रश्नपत्रों की जांच, छपवाने और उसे आगे प्रोसीड करने का सारा काम इसी एजेंसी के पास है। यह भी संभव है कि एजेंसी ने कुछ काम किसी दूसरी एजेंसी को भी शामिल किया हो, क्योंकि इतना तो तय है कि प्रश्नपत्र की जांच सही तरीके से होती तो विवादित प्रश्न या उत्तर अभ्यर्थियों तक नहीं पहुंचते. ऐसे समय में जब पंडित शब्द पर यूं ही कुछ न कुछ बवाल राज्य में चल रहा है तो इसकी संवेदनशीलता और बढ़ जाती है।

एजेंसी को मिल सकता है दंड लेकिन बोर्ड भी जवाबदेह

नाम न छापने की शर्त पर एक अधिकारी ने बताया कि एजेंसी को जिन शर्तों पर काम आवंटित किया गया है, उसमें प्रश्न बैंक तैयार करना, उनमें त्रुटियां चेक करना, नियमानुसार प्रश्नपत्रों के सेट बनाकर परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाना, गोपनीयता का ध्यान रखना मुख्य रूप से शामिल है। किसी भी तरह की चूक पाए जाने पर एजेंसी को दंड का प्रावधान भी है। लेकिन अंतिम जिम्मेदारी बोर्ड की ही है. ताजे विवाद में भी जवाबदेही उसकी ही है, एजेंसी की नहीं. क्योंकि एजेंसी सामने नहीं लाई जा सकती. देखना रोचक होगा कि राज्य सरकार इस मामले में क्या फैसला लेती है?

विशेषज्ञों का पैनल तैयार करता है प्रश्नपत्र

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी, संघ लोक सेवा आयोग जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाएं देश भर के प्रतिष्ठित प्रोफेसरों, सेवानिवृत्त अधिकारियों और विषय विशेषज्ञों का एक पैनल तैयार करती है। इन विशेषज्ञों की पहचान पूरी तरह गुप्त रखी जाती है। यहां तक कि एक विशेषज्ञ को यह नहीं पता होता कि दूसरा विशेषज्ञ कौन है. यूपी एसआई एग्जाम में निजी एजेंसी ने इस काम में कितने एक्सपर्ट की मदद ली, किसी को नहीं पता। आजकल बाजार में अनेक सॉफ्टवेयर मौजूद हैं जो विषय के हिसाब से सवाल-जवाब बनाकर दे रहे हैं, क्योंकि जिस सवाल पर विवाद हुआ है, उसे कोई हिन्दी भाषा का एक्सपर्ट पास नहीं कर सकता. अगर किसी एक्सपर्ट ने ऐसा किया है तो फिर जानबूझकर की गई हरकत हो सकती है।

प्रश्न बैंक का निर्माण भी इन परीक्षाओं में जरूरी

तय प्रक्रिया के तहत विशेषज्ञों को अलग-अलग विषयों पर प्रश्न तैयार करने के लिए कहा जाता है। उन्हें सिलेबस और कठिनाई के स्तर के बारे में विस्तृत लिखित निर्देश दिए जाते हैं। ये विशेषज्ञ कई गुना ज्यादा प्रश्न तैयार करते हैं, जिन्हें एक सुरक्षित प्रश्न बैंक में जमा कर दिया जाता है। इस केस में प्रश्नपत्रों के आठ सेट बनाने की जानकारी सामने आ रही है. पर, एक्सपर्ट्स सवालों के घेरे में हैं।

महत्वपूर्ण है मॉडरेशन प्रॉसेस

किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में मॉडरेशन प्रॉसेस सबसे महत्वपूर्ण चरण है. तय कमेटी इन प्रश्नों की समीक्षा करती है। कमेटी की जिम्मेदारी है कि वह देखे कि कोई सवाल तय सिलेबस से बाहर के तो नहीं हैं? क्या किसी सवाल के एक से अधिक सही उत्तर तो नहीं निकल रहे हैं? सवालों की भाषा स्पष्ट है या नहीं? निर्देश के मुताबिक आसान, मध्यम एवं कठिन प्रश्नों का संतुलन सही है या नहीं? एसआई परीक्षा के प्रश्नपत्र में इस प्रॉसेस में भी खामी स्पष्ट रूप से सामने है।

अंतिम चयन और मुहर

जब प्रश्नों का एक बड़ा सेट तैयार हो जाता है, तो परीक्षा से कुछ समय पहले परीक्षा करवाने वाली संस्था का कंट्रोलर ऑफ एग्जामिनेशन या उनके द्वारा नियुक्त एक उच्च स्तरीय समिति अंतिम प्रश्नपत्र का चयन करती है। अक्सर दो या तीन अलग-अलग प्रश्नपत्रों के सेट तैयार रखे जाते हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति या पेपर लीक की सूचना पर तुरंत दूसरा सेट इस्तेमाल किया जा सके. अंतिम चयन पर परीक्षा नियंत्रक की मुहर या आधिकारिक स्वीकृति होती है।

प्रिंटिंग और सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण

चयनित प्रश्नपत्रों को बेहद सुरक्षित प्रिंटिंग प्रेस में भेजा जाता है। यहां काम करने वाले कर्मचारियों को बाहरी दुनिया से पूरी तरह काट दिया जाता है. प्रिंटिंग के बाद, पेपर को सीलबंद बॉक्स में रखा जाता है और कड़ी सुरक्षा के बीच परीक्षा केंद्रों या बैंक के स्ट्रॉन्ग रूम तक पहुंचाया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में शामिल हर व्यक्ति को गोपनीयता की कानूनी शपथ लेनी होती है। यदि कोई भी जानकारी लीक होती है, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई और जेल का प्रावधान तक है। इस प्रकार, एक प्रतियोगी परीक्षा का सवाल कई स्तरों की जांच और विशेषज्ञों की निगरानी के बाद अभ्यर्थी के सामने आता है।

अहम रोल निभा सकती हैं नेशनल टेस्टिंग एजेंसी जैसी संस्थाएं

परीक्षा की पवित्रता बनाए रखने के लिए ही नेशनल टेस्टिंग एजेंसी जैसी संस्थाएं बनाई गई हैं। इनके पास सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स की बड़ी सूची होती है। देश भर से ये आमंत्रित किए जाते हैं। संभवतः इसीलिए संघ लोकसेवा आयोग या नेशनल टेस्टिंग एजेंसी इस तरह के विवादों में नहीं आती। स्टेट पब्लिक सर्विस कमीशन और राज्यों की अन्य एजेंसियां अपने कमजोर नेटवर्क की वजह से अक्सर विवादों में आ जाते हैं। प्रश्नपत्र लीक जैसे मामले भी इसी कमजोरी की वजह से होते हैं।राज्यों में मौजूद पुलिस भर्ती बोर्ड जैसे संस्थान नेशनल टेस्टिंग एजेंसी से मदद ले सकते हैं. अन्यथा, इस तरह के विवाद अक्सर पहले भी होते रहे हैं और आगे भी होते रहेंगे।

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