नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को व्हाट्सएप और इसकी पेरेंट कंपनी मेटा को लोगों की डेटा शेयरिंग और निजता के उल्लंघन की चिंताओं को लेकर कड़ी फटकार लगाई है और यहां तक कह दिया है कि अगर देश के संविधान का पालन नहीं कर सकते तो भारत छोड़ दें। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि टेक्नोलॉजी या बिजनेस प्रक्रिया के नाम पर नागरिकों के निजता के साथ समझौता नहीं होने दिया जा सकता। व्हाट्सएप और मेटा ने नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल के पिछले साल के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। सर्वोच्च अदालत ने इसमें केंद्र सरकार को पार्टी बनाते हुए 9 फरवरी को अंतरिम आदेश जारी करने की बात कही है।
‘संविधान का पालन नहीं कर सकते तो भारत छोड़ दें’
सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई सूर्यकांत ने अमेरिका कंपनी व्हाट्सएप को चेताया कि ‘…हम आपको एक सिंगल डिजिट भी अपना डेटा शेयर करने की अनुमति नहीं देंगे।’ अदालत ने कहा कि अगर कंपनी देश के कानून का पालन नहीं करना है तो वह भारत छोड़ सकती है। सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कमर्शियल इरादे से ‘शोषणकारी’ नीति अपनाए जाने का जिक्र किया तो भारत के चीफ जस्टिस ने कंपनी से कह दिया, ‘अगर आप हमारे संविधान का पालन नहीं कर सकते तो भारत छोड़ दें। हम नागरिकों के निजता से समझौता नहीं होने देंगे।’
‘निजता के अधिकार के साथ नहीं खेल सकते’
सुप्रीम कोर्ट ने व्हाट्सएप और मेटा से कहा कि’डेटा शेयरिंग के नाम पर आप इस देश के नागरिकों के निजता के अधिकार के साथ नहीं खेल सकते।’ सुप्रीम कोर्ट ने मेटा के यूजर कंसेंट और ऑप्ट-आउट मेकेनिज्म वाली दलीलों पर भी सवाल उठाए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये ‘निजी जानकारी चुरा लेने का आसान तरीका है।’
व्हाट्सएप पर लगा है 213 करोड़ रुपये जुर्माना
सुप्रीम कोर्ट ने इस केस का दायरा बढ़ाते हुए इसमें इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय (MeitY) को भी पार्टी बनाया है और कहा है कि 9 फरवरी को वह इसपर अपना अंतरिम आदेश जारी करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी व्हाट्सएप और मेटा की ओर से दायर अपील पर सुनवाई के दौरान की है। इन्होंने सुप्रीम कोर्ट में कम्पिटीशन कमीशन ऑफ इंडिया के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसने व्हाट्सएप की प्राइवेसी पॉलिसी’टेक इट या लीव इट’ पर जुर्माना लगाया गया है।
‘चालाकी से बनाए होते हैं निजता से जुड़े नियम’
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों के निजता से जुड़े नियम ‘इतना चालाकी से बनाए गए होते हैं कि नागरिकों को समझ में नहीं आएगा।’ और यूजर से सहमति के आधार पर ही सवाल उठा दिया कि ‘ऑप्ट-आउट का प्रश्न ही कहां है।’ सर्वोच्च अदालत ने कहा कि कि इन तरीकों को डेटा शेयरिंग या यूजर एक्सेप्टेंस के नाम पर उचित नहीं ठहराया जा सकता।
व्हाट्सएप प्राइवेसी पॉलिसी से जुड़ा है मामला
यह विवाद व्हाट्सएप के 2021 के प्राइवेसी पॉलिसी अपडेट से जुड़ा है। पिछले साल नवंबर में नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) ने व्हाट्सएप और मेटा पर कम्पिटीशन कमीशन ऑफ इंडिया की ओर से लगाए गए 213.14 करोड़ रुपये जुर्माने को सही ठहराया था। कंपनी पर यह जुर्माना बाजार में प्रभावशाली मौजूदगी का फायदा उठाते हुए पॉलिसी में बदलाव करने को लेकर लगाया गया था। कंपनी ने इसी फैसले को अब सुप्रीम में चुनौती दी है।