नई दिल्ली। भारत अपने चिकननेक यानी सिलीगुड़ी कॉरिडोर के आसपास पूरी तरह से किलेबंदी करने जा रहा है। बांग्लादेश और चीन की हालिया हरकतों और बयानों को देखते हुए भारत ने चिकननेक की सुरक्षा के लिए कई परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन्हीं में से एक है पहला अंडरवाटर ट्विन ट्यूब रोड कम रेल टनल प्रोजेक्ट है। इससे पहले चिकननेक तक अंडरग्राउंड रेल बिछाने के प्रोजेक्ट को भी मंजूरी मिल चुकी है। इसके अलावा, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम और असम में भी भारत ने किलेबंदी करने की योजना बना ली है, जिसकी भी मंजूरी मिल गई है।
भारत के लिए कितना अहम है चिकननेक
22 किलोमीटर चौड़ा यह चिकननेक बेहद संवेदनशील है, जिससे नेपाल, भूटान, बांग्लादेश से घिरा भारत का यह क्षेत्र इतना रणनीतिक महत्व का है, जो उत्तर-पूर्व में चीन के तिब्बती इलाके चुंबी घाटी के पास स्थित है।
यह इलाका पश्चिम बंगाल में पड़ता है। यह बंगाल को पूर्वोत्तर के असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, नगालैंड, मिजोरम, त्रिपुरा और सिक्किम को जोड़ने का जरिया भी है। पूर्वोत्तर को पूरे भारत से जोड़ने वाला इकलौता रास्ता यही सिलीगुड़ी कॉरिडोर है। इसीलिए भारत सरकार इसे बेहद गंभीरता से लेते हुए किलेबंदी कर रही है।
अंडरवाटर ट्विन ट्यूब रोड कम रेल टनल प्रोजेक्ट क्या है
अंडरवाटर ट्विन ट्यूब रोड कम रेल टनल प्रोजेक्ट देश का पहला ऐसा प्रोजेक्ट है। इसे असम में ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे बनाया जाएगा।
यह 33.7 किलोमीटर लंबा और चार लेन का रोड होगा, जिसमें ब्रह्मपुत्र के नीचे ही 15.79 किलोमीटर लंबा ट्विन ट्यूब टनल भी होगा।
यह नदी के उत्तरी किनारे पर स्थित गोहपुर को नदी के दक्षिणी किनारे पर स्थित नुमालीगढ़ को जोड़ेगा।
इस अंडरवाटर ट्विन ट्यूब रोड से क्या फायदा होगा
इस प्रोजेक्ट के बनने से माल की ढुलाई क्षमता बढ़ेगी, लागत कम आएगी और पूरे क्षेत्र की सामाजिक-आर्थिक ग्रोथ होगी।
इससे रणनीतिक रूप से भी बेहद अहम होगा। यह बड़े आर्थिक सेंटरों को आपस में जोड़ेगा और औद्योगिक विकास और कारोबार के नए रास्ते भी खोलेगा।
अंडरग्राउंड रेल भी दौड़ाने जा रहा है भारत
अंडरवाटर ट्विन ट्यूब रोड के अलावा भारतीय रेलवे चिकननेक तक अंडरग्राउंड रेल लाइन बिछाने जा रहा है। यह 35.76 किलोमीटर लंबा अंडरग्राउं रेल लाइन होगी, जो पश्चिम बंगाल के डुमडांगी और बागडोगरा को जोड़ेगी। यह प्रोजेक्ट बागडोगरा एयरफोर्स स्टेशन और बेगडुबी आर्मी कैंटोनमेंट के बेहद करीब है।
असम में मिलिट्री स्टेशन तो मिजोरम में सैन्य बेस
भारत ने असम के धुबरी में बांग्लादेश सीमा के पास एक नया मिलिट्री स्टेशन लाचित बोरफुकान बनाया है। साथ ही मिजोरम में बांग्लादेश के चिटगांव हिल्स एरिया के पास एक मिलिट्री बेस भी बनाएगा।
अरुणाचल में स्वदेशी मोनो रेल की है योजना
अरुणाचल प्रदेश मे भी भारतीय सेना एक स्वदेशी मोनो रेल सिस्टम 16,000 फीट की ऊंचाई पर बनाने जा रही है, जिससे चीन सीमा तक सैन्य साजोसामान आसानी से पहुंचाया जा सके।
असम में इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी का उद्घाटन
इसी साल फरवरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्वी असम के डिब्रूगढ़ में इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी का उद्घाटन किया था। यह 4.2 किलोमीटर का हाइवे होगा, जहां इमरजेंसी सिचुएशन में सैन्य बलों को उतारा जा सकेगा।
बांग्लादेश और चीन की हालिया हरकतों के चलते भारत सतर्क
हाल के कुछ वर्षों में बांग्लादेश और चीन की नागवार लगने वाली गतिविधियों को देखते हुए भारत ने सिलीगुड़ी कॉरिडोर को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं। 2017 में भारत-चीन की सेनाएं डोकलाम पर दो महीने तक आमने-सामने डटी रहीं। यह तब हुआ था, जब चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी का जमावड़ा डोकलाम में हुआ था। यह भारत, भूटान और चीन के बीच स्थित है।
अगस्त, 2024 में बांग्लादेश के अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस ने पाकिस्तान और चीन के प्रति झुकाव दिखाया और भारत विरोधी बयान दिए। भारत के चिकननेक के पास लालमोनिरहाट में बांग्लादेश ने अपने पुराने एयरफील्ड को फिर से चमकाने का काम शुरू किया। इन बदली परिस्थितियों में भारत ने चिकननेक को सुरक्षित करने के लिए कई प्रोजेक्ट्स की मंजूरी दी है।