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अब अभिनेता सैफ अली खान की संपत्ति की जांच करेगी सरकार, 15 हजार करोड़ की प्रॉपर्टी की होगी जांच, जांच 5 सदस्यीय समिति करेगी

भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी और सटे जिलों में भोपाल के पूर्व नवाब की संपत्तियां शत्रु संपत्ति हैं या नहीं, उसकी जांच अब राज्य सरकार कराएगी। इसके लिए भोपाल कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने अपर कलेक्टर की अध्यक्षता में सात सदस्यीय. . .

भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी और सटे जिलों में भोपाल के पूर्व नवाब की संपत्तियां शत्रु संपत्ति हैं या नहीं, उसकी जांच अब राज्य सरकार कराएगी। इसके लिए भोपाल कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने अपर कलेक्टर की अध्यक्षता में सात सदस्यीय समिति बना दी है। 15 हजार करोड़ रुपए की संपत्तियों का यहां विवाद है। अगर इन्हें शत्रु संपत्ति घोषित किया गया तो कानूनन इस पर सरकार का कब्जा हो जाएगा। गौरतलब है कि भोपाल के अंतिम नवाब हमीदुल्ला खान की विरासत से जुड़ी संपत्ति का विवाद लंबे समय से चल रहा है। अभी यह संपत्ति उत्तराधिकार में दिवंगत नवाब की बेटी के पोते फिल्म अभिनेता सैफ अली खान और उनके परिवार को मिली है।

उत्तराधिकारी चली गई पाकिस्तान

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि अंतिम नवाब ने अपनी बेटी आबिदा सुल्तान को उत्तराधिकारी बनाया था। उनके पाकिस्तान चले जाने के बाद शत्रु संपत्ति अधिनियम के तहत सारी संपत्ति खुद ही शत्रु संपत्ति घोषित हो जानी चाहिए थी। वहीं नवाब पक्ष का कहना है कि आबिदा सुल्तान के पाकिस्तान चले जाने के बाद भी नवाब हमीदुल्ला खान जीवित थे। उनके निधन के बाद उनकी दूसरी बेटी साजिदा सुल्तान को नवाब घोषित किया गया था। उनकी शादी पटौदी रियासत में हुई थी।

न्यायालय में विवाद चल रहा

वर्ष 1995 में उनके निधन के बाद ये संपत्तियां उनके बेटे प्रसिद्ध क्रिकेटर मंसूर अली खान के पास आईं। उनके बाद सैफ अली खान, सोहा अली खान और सबा अली खान इसकी वारिस हैं। इस बीच कई शिकायतों के बाद पटौदी परिवार और केंद्र सरकार के कस्टोडियन आफ एनिमी प्रापर्टी के बीच न्यायालय में विवाद चल रहा है।

अमिताभ ने कलेक्टर को दिया आवेदन

फिर से दस्तावेज मांगने की मांग इस मामले में लंबे समय से सक्रिय शहर के अमिताभ अग्निहोत्री ने कलेक्टर को आवेदन देकर इन संपत्तियों की खरीद-बिक्री पर रोक लगाने की मांग की है। आवेदन में उन्होंने नवाब परिवार से मर्जर एग्रीमेंट की मूल प्रति मांगने की मांग की है। उनकी मांग है कि अगर नवाब परिवार भोपाल मर्जर एग्रीमेंट-1949 की मूलप्रति केंद्र सरकार को प्रस्तुत नहीं करता है, तो उनके चल-अचल संबंधी किसी भी विवाद को मान्य न किया जाए।

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