फिल्म समीक्षा: ‘अस्सी’ (Assi)
रेटिंग: **** 4/5
कलाकार: तापसी पन्नू, कनी कुश्रुति, जीशान अय्यूब, कुमुद मिश्रा, रेवती, अद्विक जायसवाल निर्देशक: अनुभव सिन्हा
रिलीज डेट: 20 फरवरी 2026
कहानी: इंसाफ की लड़ाई और एक ‘छतरी मैन’ का रहस्य
डेस्क। फिल्म की कहानी एक स्कूल टीचर परिमा (कनी कुश्रुति) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपने पति विनय (जीशान अय्यूब) और बेटे के साथ एक सामान्य जीवन जी रही है। एक रात फेयरवेल पार्टी से लौटते समय कुछ दरिंदे उसे अगवा कर सामूहिक दुष्कर्म का शिकार बनाते हैं।
यहीं से शुरू होता है परिमा के संघर्ष और इंसाफ का सफर। इस लड़ाई में उसकी ढाल बनती है वकील रावी (तापसी पन्नू)। रावी, कार्तिक (कुमुद मिश्रा) की मुंहबोली बहन है, जिसने खुद एक सड़क हादसे में अपनी पत्नी को खोया है और सिस्टम से हार चुका है। कहानी में ट्विस्ट तब आता है जब एक रहस्यमयी ‘छतरी मैन’ दुष्कर्मियों को खुद सजा देने लगता है। क्या परिमा को कानून से इंसाफ मिलेगा? यह फिल्म इसी कशमकश को दिखाती है।
क्यों देखें: फिल्म की खूबियां
झकझोर देने वाले संवाद: फिल्म के डायलॉग इसकी सबसे बड़ी ताकत हैं। "औरत को इतना गुस्सा आता है कि दुनिया राख हो जाए, बस हमको जलानी नहीं है" जैसे संवाद सीधे दिल पर चोट करते हैं।
सत्यता का एहसास: अनुभव सिन्हा ने फिल्म को इतना वास्तविक रखा है कि हर 20 मिनट पर स्क्रीन पर आने वाले आंकड़े आपको याद दिलाते हैं कि देश में कितनी महिलाएं इस वक्त दुष्कर्म का शिकार हो रही हैं।
अभिनय का पावरहाउस: * कनी कुश्रुति: पीड़िता के दर्द और मूक चीख को कनी ने अपनी आंखों से जीवंत कर दिया है।
कुमुद मिश्रा: सिस्टम से हारे हुए शख्स की चुप्पी और गुस्सा उन्होंने बखूबी दिखाया है।
तापसी पन्नू: फिल्म के आखिरी हिस्से में उनका मोनोलॉग रोंगटे खड़े कर देने वाला है।
कहाँ रह गई कमी?
फिल्म का पहला हाफ जितना कसा हुआ है, सेकंड हाफ में ‘छतरी मैन’ वाला एंगल फिल्म की गंभीरता को थोड़ा फिल्मी बना देता है। कुछ कोर्टरूम सीन लॉजिक के पैमाने पर थोड़े कमजोर लगते हैं, लेकिन फिल्म का सामाजिक संदेश इन कमियों को ढक लेता है।
निर्देशन और तकनीकी पक्ष
अनुभव सिन्हा ने एक बार फिर साबित किया है कि वे ‘आर्टिकल 15’ और ‘थप्पड़’ जैसी गंभीर फिल्मों के उस्ताद हैं। कैमरा वर्क और बैकग्राउंड म्यूजिक फिल्म के माहौल को और भी डरावना और सच के करीब बनाता है। नसीरुद्दीन शाह और सुप्रिया पाठक जैसे दिग्गजों का कैमियो फिल्म को और मजबूती देता है।
अंतिम फैसला।
‘अस्सी’ महज एक फिल्म नहीं, बल्कि हमारे समाज का वह आईना है जिसे हम अक्सर देखना नहीं चाहते। यह फिल्म देखना आसान नहीं है, पर यह हमारे समय की एक बेहद जरूरी फिल्म है। इसे सिनेमाघर या ओटीटी (OTT) पर जरूर देखें।