नई दिल्ली। भारतीय बैंक ग्राहकों के लिए आज का दिन काफी उलझन भरा साबित हो रहा है। आज सुबह से ही लोग यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि उनके बैंक खुले हैं या नहीं। दरअसल, यह भ्रम इसलिए पैदा हुआ है क्योंकि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के कैलेंडर के हिसाब से आज कोई आधिकारिक छुट्टी नहीं है, लेकिन बैंक यूनियनों की बड़ी हड़ताल के कारण बैंकों में ताले लटके नजर आ रहे हैं।
हड़ताल की असली वजह और यूनियन की मांग
इस देशव्यापी हड़ताल का आह्वान यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) ने किया है। बैंक कर्मचारियों की सबसे प्रमुख मांग ‘5-डे वर्क वीक’ यानी हफ्ते में केवल पांच दिन काम करने की व्यवस्था लागू करना है। वर्तमान में बैंक कर्मचारियों को दूसरे और चौथे शनिवार को ही छुट्टी मिलती है, जबकि यूनियन चाहती है कि हर शनिवार और रविवार को बैंक बंद रहें। कर्मचारियों का प्रस्ताव है कि इसके बदले वे हर रोज 40 मिनट अतिरिक्त काम करने को तैयार हैं। सरकार के पास यह प्रस्ताव लंबे समय से लंबित है, जिसके विरोध में आज कर्मचारी सड़कों पर उतरे हैं।
इन बैंकों में कामकाज पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर
इस हड़ताल का सबसे व्यापक असर सरकारी बैंकों (PSUs) पर देखने को मिल रहा है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), पंजाब नेशनल बैंक (PNB), बैंक ऑफ बड़ौदा और केनरा बैंक जैसे बड़े संस्थानों के कर्मचारी इस आंदोलन में शामिल हैं। कुछ पुराने प्राइवेट बैंक भी इस हड़ताल की वजह से प्रभावित हो सकते हैं। कई शहरों में स्टाफ की कमी के चलते बैंक शाखाएं या तो पूरी तरह बंद हैं या वहां कामकाज बहुत धीमी गति से हो रहा है।
आम जनता को होने वाली परेशानियां
अगर आप आज चेक जमा करने, डिमांड ड्राफ्ट बनवाने या बैंक जाकर नकद निकालने की योजना बना रहे थे, तो आपको मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। चेक क्लीयरेंस की प्रक्रिया आज ठप रहने की संभावना है जिससे बड़े व्यापारिक लेन-देन रुक सकते हैं। हालांकि, राहत की बात यह है कि बैंक अधिकारियों ने एटीएम में पर्याप्त कैश होने का दावा किया है, जिससे आम ग्राहकों को नकदी की किल्लत नहीं होगी।
बैंकों की फिजिकल शाखाएं बंद होने के बावजूद आधुनिक बैंकिंग ने ग्राहकों की राह आसान कर दी है। मोबाइल बैंकिंग, नेट बैंकिंग और UPI जैसी सुविधाएं 24 घंटे काम कर रही हैं। आप घर बैठे ही फंड ट्रांसफर, बिल भुगतान और रिचार्ज जैसे जरूरी काम निपटा सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि आज के दिन बैंक जाने के बजाय डिजिटल माध्यमों का उपयोग करना ही सबसे समझदारी भरा फैसला होगा।