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केंद्रीय बजट लोकलुभावन योजनाओं से दूर, विकास और सुधारों पर केंद्रित बजट : सीए नरेश अग्रवाल

सिलीगुड़ी। वित्त मंत्री द्वारा कल प्रस्तुत किया गया केंद्रीय बजट 2026 आम जनता की अनेक अपेक्षाओं के बीच आया है । सत्ता पक्ष बजट को देश की अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक मजबूती देने वाला, सुधारवादी और विकासोन्मुखी बजट बता रहा है,. . .

सिलीगुड़ी। वित्त मंत्री द्वारा कल प्रस्तुत किया गया केंद्रीय बजट 2026 आम जनता की अनेक अपेक्षाओं के बीच आया है । सत्ता पक्ष बजट को देश की अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक मजबूती देने वाला, सुधारवादी और विकासोन्मुखी बजट बता रहा है, तो दूसरी तरफ दिशाहीन बता रहा है। इस बीच आईसीएआई, सिलीगुड़ी शाखा के पूर्व अध्यक्ष सीए नरेश अग्रवाल ने बजट अपने विचार रखते हुए इसे दूरदर्शी और विकासशील बजट बताया है।
बजट को लेकर पूर्व अध्यक्ष नरेश अग्रवाल का कहना है कि केंद्रीय वित्त मंत्री द्वारा प्रस्तुत केंद्रीय बजट 2026 से आम जनता को खेती और रक्षा क्षेत्र में बड़े ऐलानों की उम्मीद थी, लेकिन बजट का मुख्य जोर इंफ्रास्ट्रक्चर, विकास और कर सुधारों पर रहा है। आगामी चुनाव वाले राज्यों के लिए भी कोई बड़ी लोकलुभावन योजना घोषित नहीं की गई, जिससे यह बजट “भविष्य की तैयारी” वाला बजट माना जा रहा है। बजट का फोकस मुख्य रूप से आधारभूत संरचना, दीर्घकालिक विकास और कर सुधारों पर केंद्रित नजर आया। चुनावी राज्यों को ध्यान में रखकर भी कोई बड़ी लोकलुभावन योजना घोषित नहीं की गई, जो इस बजट को भविष्य उन्मुख बनाती है।

बजट की सबसे अहम घोषणा नई आयकर व्यवस्था से जुड़ी है

बजट की सबसे अहम घोषणा नई आयकर व्यवस्था से जुड़ी है। आयकर अधिनियम, 2025 को लागू करने का प्रस्ताव रखा गया है, जो वर्ष 1961 के पुराने आयकर अधिनियम की जगह लेगा। इसका उद्देश्य कर कानूनों को सरल बनाना, अनुपालन को आसान करना और करदाताओं पर बोझ कम करना है। सरकार ने संकेत दिया है कि सरल नियम, फॉर्म और आईटीआर प्रारूप जल्द ही अधिसूचित किए जाएंगे।
आयकर स्लैब और दरों में किसी भी प्रकार का बदलाव नहीं किया गया है। नई और पुरानी दोनों कर व्यवस्थाओं में कर दरें, सरचार्ज और सेस यथावत रखे गए हैं, जिससे मध्यम वर्ग को न तो अतिरिक्त राहत मिली और न ही कोई नया बोझ डाला गया।

न्यूनतम वैकल्पिक कर में राहत

कॉरपोरेट सेक्टर के लिए न्यूनतम वैकल्पिक कर (MAT) में राहत दी गई है। धारा 115JB के तहत MAT की दर को 15% से घटाकर 14% कर दिया गया है, जिससे कंपनियों को कुछ हद तक कर राहत मिलेगी।

आईटीआर दाखिल करने की समय-सीमा व्यावहारिक बनाया गया

आईटीआर दाखिल करने की समय-सीमा को अधिक व्यावहारिक बनाया गया है। वेतनभोगी करदाताओं (ITR-1 और ITR-2) के लिए अंतिम तिथि 31 जुलाई ही रहेगी, जबकि बिना ऑडिट वाले व्यवसाय, प्रोफेशनल्स, पार्टनर्स, ट्रस्ट और अन्य जटिल रिटर्न के लिए तिथि बढ़ाकर 31 अगस्त कर दी गई है। इसके अलावा, संशोधित और विलंबित रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि को 31 मार्च तक बढ़ा दिया गया है, हालांकि इसके लिए नाममात्र का शुल्क देना होगा।

टीसीएस में किए गए बदलाव स्वागत योग्य

टीसीएस (Tax Collected at Source) में किए गए बदलावों का स्वागत किया जा रहा है। शिक्षा और चिकित्सा के लिए 10 लाख रुपये से अधिक की विदेशी रेमिटेंस पर टीसीएस दर 5% से घटाकर 2% कर दी गई है। विदेशी टूर पैकेज पर भी अब समान रूप से 2% टीसीएस लगेगा, जिससे विदेश यात्रा महंगी होने से कुछ हद तक बचेगी। हालांकि, डेरिवेटिव्स पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) में बढ़ोतरी बाजार के लिए नकारात्मक मानी जा रही है। फ्यूचर्स पर STT को 0.02% से बढ़ाकर 0.05% और ऑप्शंस पर 0.01% से बढ़ाकर 0.15% कर दिया गया है। इसका उद्देश्य सट्टेबाजी पर अंकुश लगाना है, लेकिन इससे शेयर बाजार और व्यक्तिगत निवेशकों पर असर पड़ सकता है।

बजट दीर्घकालिक विकास पर केंद्रित

कई मामलों में अब दंड (Penalty) की जगह लेट फीस का प्रावधान किया गया है। ऑडिट में देरी पर लगने वाली फीस को भी स्पष्ट कर दिया गया है, जो देरी की अवधि के अनुसार 75,000 रुपये या 1,50,000 रुपये तक हो सकती है। इसके अलावा, कस्टम ड्यूटी में बड़ी कटौती की गई है, जिससे आयातित वस्तुएं सस्ती होंगी। विशेष रूप से दवाइयों, चमड़े के उत्पादों और मोबाइल फोन की कीमतों में कमी आने की संभावना है। कुल मिलाकर, यह बजट तात्कालिक राजनीतिक लाभ के बजाय आर्थिक स्थिरता, कर सुधार और दीर्घकालिक विकास पर केंद्रित है।

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