नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बसंत पंचमी के दिन धार में विवादित भोजशाला में सूर्योदय से सूर्यास्त तक हिंदुओं को प्रार्थना करने की अनुमति दी है। सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को भी शुक्रवार के दिन दोपहर 1 बजे से लेकर 3 बजे तक नमाज पढ़ने की इजाजत दी है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा, हम दोनों पक्षों से अपील करते हैं कि वे आपसी सम्मान और सहयोग बरकरार रखें। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य और जिला प्रशासन को कानून व्यवस्था बनाए रखने की हिदायत दी।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा और सुनवाई में क्या-क्या हुआ?
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ ने कहा कि कल दोपहर 1 से 3 बजे के बीच नमाज के लिए आने वाले मुस्लिम समुदाय के लोगों की संख्या जिला प्रशासन को बता दी जाए, पीठ ने कहा कि ये संख्या जिला प्रशासन को आज ही बता दी जाए। प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए भोजशाला आने वालों के लिए पास जारी कर सकता है या कोई और सही तरीका अपना सकता है ताकि कोई अप्रिय घटना न हो।
पीठ ने आदेश में कहा, 'दोपहर में 1 से 3 बजे के बीच नमाज़ के लिए उसी परिसर के अंदर एक खास और अलग जगह उपलब्ध कराई जाए, जिसमें आने-जाने के लिए अलग रास्ता हो, ताकि नमाज पढ़ी जा सके। उसी तरह से हिंदू पक्ष को परिसर के भीतर ही अलग जगह मुहैया कराई जाए, ताकि वे बसंत पंचमी पर अपने पारंपरिक अनुष्ठान कर सकें।
पीठ ने कहा, अपील में उठने वाला मुद्दा यह है कि क्या मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने 11 मार्च 2024 के आदेश में ASI को ऐतिहासिक स्मारक वाली जगह पर लेटेस्ट तरीकों को अपनाकर जांच और सर्वे करने का निर्देश देकर सही किया या नहीं
ASI को दिए गए निर्देश जगह की असली और सही पहचान करने के लिए हैं। एएसआई के कम से कम 5 सबसे वरिष्ठ प्रोफेसरों की विशेषज्ञ समिति को रिपोर्ट देने, पूरे सर्वे वाली जगह की फोटोग्राफी के बारे में निर्देश दिए गए हैं और बंद और सील किए गए कमरों को खोलने का निर्देश दिया गया था ताकि सील किए गए कमरों में मिली कलाकृतियों वगैरह या ढांचे की भी एक्सपर्ट टीम द्वारा वैज्ञानिक जांच की जा सके।
इस कोर्ट ने 1 अप्रैल 2024 को निर्देश दिया था कि सर्वे के नतीजों पर कोई कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए और कोई भी खुदाई नहीं की जानी चाहिए जिससे जगह का स्वरूप बदल जाए।
शुरुआत में यह बताया गया है कि हाई कोर्ट के निर्देशानुसार वैज्ञानिक सर्वे पूरा हो गया है और रिपोर्ट फिलहाल हाई कोर्ट के सामने एक सीलबंद लिफाफे में रखी है।
याचिकाकर्ता के सीनियर वकील ने कहा कि सर्वे रिपोर्ट की कॉपी पार्टियों को दी जाए और उसके बाद याचिकाकर्ता को, अगर कोई आपत्ति हो, तो उसे सबमिट करने की इजाज़त दी जाए।
दूसरी पार्टी को भी यह छूट दी जा सकती है। इन आपत्तियों पर बाद में हाई कोर्ट फाइनल सुनवाई के समय विचार कर सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, हाई कोर्ट में लंबित रिट याचिका पर कोर्ट के सबसे वरिष्ठ जजों में से एक की डिवीजन बेंच द्वारा, हो सके तो दो हफ्ते के अंदर सुनवाई की जाए।
खंडपीठ से अनुरोध है कि वह रिपोर्ट को खुली अदालत में खोले और दोनों पक्षों को उसकी कॉपी दें। अगर रिपोर्ट का कोई ऐसा हिस्सा है जिसे खोला नहीं जा सकता, तो पार्टियों को अपने वकीलों की मौजूदगी में रिपोर्ट के उस हिस्से का निरीक्षण करने की इजाजत दी जा सकती है।
इसके बाद पक्षों को अपनी-अपनी आपत्ति, सुझाव, राय या सिफारिशें दाखिल करने के लिए दो हफ्ते का समय दिया जाएगा।
इसके बाद हाई कोर्ट मामले की फाइनल सुनवाई कर सकता है और फाइनल सुनवाई के समय सभी आपत्तियां, सुझाव, राय या सिफारिशों पर ठीक से विचार किया जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट क्यों पहुंचा विवाद ?
हिंदू पक्ष ने 20 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमें मांग की गई है कि बसंत पंचमी के पूरे दिन धार भोजशाला में अखंड सरस्वती पूजा की अनुमति दी जाए। बसंत पंचमी इस साल शुक्रवार के दिन पड़ रही है और शुक्रवार को मुस्लिम समाज के लोग धार भोजशाला में जुमे की नमाज पढ़ते हैं। यही वजह है कि ये मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया था। हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ सुनवाई की। हिंदू फॉर जस्टिस की तरफ से वरिष्ठ वकील विष्णु शंकर जैन और हरिशंकर जैन दलील पेश की। साथ ही वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने बाबा कमाल मौलाना वेलफेयर सोसाइटी की ओर से पक्ष रखा।
क्या है विवाद?
मध्य प्रदेश के धार में एक एएसआई संरक्षित स्मारक है। हिंदू पक्ष के लोग इसे देवी सरस्वती का मंदिर मानते हैं।
साथ ही यहां मौलाना कमालुद्दीन की मस्जिद है, जिसके चलते मुस्लिम पक्ष भी इस स्मारक पर अपना दावा करता है।
18वीं सदी में यहां अंग्रेज सरकार ने खुदाई कराई थी, जिसमें देवी सरस्वती की प्रतिमा भी निकली थी। इस प्रतिमा को अंग्रेज लंदन ले गए थे, जो आज भी लंदन संग्रहालय में मौजूद है।
देवी सरस्वती की उस प्रतिमा को भी वापस लाने की कोशिश चल रही है। दोनों पक्ष इस स्मारक पर दावा करते हैं।
ऐसे में एएसआई द्वारा जारी आदेश के अनुसार, हिंदू पक्ष के लोगों को हर मंगलवार को भोजशाला परिसर में पूजा करने और मुसलमानों को हर शुक्रवार को भोजशाला परिसर में नमाज पढ़ने की अनुमति मिली हुई है।
इस साल शुक्रवार के दिन बसंत पंचमी पड़ रही है। ऐसे में हिंदू पक्ष ने पूरे दिन सरस्वती पूजा करने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
सुप्रीम कोर्ट में धार भोजशाला विवाद पर सुनवाई के चलते धार में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। धार में आठ हजार से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। सीसीटीवी कैमरों से लगातार निगरानी रखी जा रही है। पुलिस द्वारा लगातार विभिन्न इलाकों में पेट्रोलिंग की जा रही है। धार भोजशाला में भी सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। वॉच टावर के साथ ही पुलिस चौकी भी बनाई गई है और पुलिस द्वारा संवेदनशील इलाकों में गश्त की जा रही है।