सिलीगुड़ी। आगामी विधानसभा चुनाव से पहले पहाड़ की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। पहाड़ के क्षेत्रीय दलों के प्रति भाजपा सरकार का रुख स्पष्ट करने के लिए गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (GJM) सुप्रीमो बिमल गुरूंग ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की। इस बैठक में दार्जिलिंग से भाजपा सांसद राजू बिस्ता, मोर्चा नेता बिमल गुरूंग और पार्टी के महासचिव रोशन गिरी भी मौजूद थे।
विधानसभा चुनाव को लेकर हुई चर्चा
सूत्रों के अनुसार, दिल्ली स्थित संसदीय कार्यालय में हुई इस लंबी बैठक में विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र पहाड़ में गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के समर्थन पर चर्चा हुई। साथ ही पहाड़ के स्थायी राजनीतिक समाधान और 11 जनजातियों को छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग पर भी विचार-विमर्श किया गया।
विपक्ष ने लगाए आरोप
हालांकि, पहाड़ की सत्तारूढ़ पार्टी भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा (BGPM) ने इस बैठक को चुनाव से पहले सीट समझौते की राजनीति करार दिया है। पार्टी के नेताओं का आरोप है कि अलग गोरखालैंड राज्य के नाम पर हुए आंदोलन के बाद मोर्चा का जनाधार कमजोर हुआ है और अब चुनाव से पहले राजनीतिक जमीन तलाशने की कोशिश की जा रही है।
पहाड़ की तीन सीटों के लिए बंटवारे की कवायद तेज
विधानसभा चुनाव को देखते हुए पहाड़ में सीट बंटवारे की कवायद तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, संभावित समझौते के तहत पहाड़ की तीन सीटों में से कालिम्पोंग सीट पर खुद बिमल गुरूंग चुनाव लड़ना चाहते हैं। वहीं दार्जिलिंग सीट पर अजय एडवर्ड की पार्टी इंडियन गोरखा जनशक्ति फ्रंट दावेदारी पेश कर रही है। दूसरी ओर, कर्सियांग सीट से गोरखा नेशनल लिबरेशन फ्रंट (GNLF) के नेता निरज जिम्बा की दावेदारी बताई जा रही है।
दार्जिलिंग और कर्सियांग सीटों को लेकर अजय एडवर्ड और निरज जिम्बा के बीच सहमति की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है और इसे लेकर अंदरखाने बातचीत जारी है। चुनाव से पहले पहाड़ की राजनीति में यह घटनाक्रम काफी अहम माना जा रहा है।