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प्रलय के सबसे करीब पहुंची दुनिया : इस समय मात्र 85 सेकंड में तबाह हो जाएगी दुनिया, शुरू हुई उल्टी गिनती

डेस्क । दुनिया में चल रहे संघर्षों और बढ़ते तनाव के बीच वैज्ञानिकों ने प्रलय की घड़ी (Doomsday Clock) के समय में बदलाव किया है। उन्होंने घड़ी के समय को आधी रात के और भी करीब कर दिया। परमाणु वैज्ञानिकों. . .

डेस्क । दुनिया में चल रहे संघर्षों और बढ़ते तनाव के बीच वैज्ञानिकों ने प्रलय की घड़ी (Doomsday Clock) के समय में बदलाव किया है। उन्होंने घड़ी के समय को आधी रात के और भी करीब कर दिया। परमाणु वैज्ञानिकों की टीम ने प्रसिद्ध प्रलय की घड़ी को मिडनाइट (आधी रात) से 85 सेकेंड पहले सेट कर दिया है। मानवता पर मंडरा रहे खतरों को भांपने वाली दुनिया की सबसे चर्चित घड़ी ‘डूम्सडे क्लॉक’ ने इस साल एक डरावना संकेत दिया है।
वैज्ञानिकों ने इसे आधी रात के 90 सेकंड से घटाकर 85 सेकंड पर कर दिया है, जिसका मतलब है कि हम वैश्विक तबाही के इतिहास में अब तक के सबसे करीब हैं। वैज्ञानिकों ने इस साल हुई कई बड़ी घटनाओं को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है।

क्या है ‘डूम्सडे क्लॉक’?

इसकी स्थापना 1945 में अल्बर्ट आइंस्टीन और रॉबर्ट ओपेनहाइमर जैसे महान वैज्ञानिकों ने की थी। यह घड़ी परमाणु हथियारों और जलवायु परिवर्तन जैसे मानव-निर्मित खतरों से दुनिया को आगाह करने का एक प्रतीकात्मक तरीका है। इसमें ‘आधी रात’ का मतलब दुनिया का अंत है। सुइयां जितनी करीब होंगी, खतरा उतना ही बड़ा होगा।

क्या है वैज्ञानिकों को डर?

@ अब तक का सबसे यह करीबी समय है। यह एक संकेत है कि दुनिया विनाश के करीब पहुंच रही है। साल 2025 में यह समय 89 सेकेंड पहले था, जो अब 4 सेकेंड और पास आ गया है। बुलेटिन ऑफ एटॉमिक साइंटिस्ट ने मंगलवार को इसकी घोषणा की है।

@ वैज्ञानिकों ने कहा कि परमाणु युद्ध का खतरा और तेजी से बढ़ती आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का डर खतरनाक बिंदु पर पहुंच गया है। आइए जानते हैं कि प्रलय की घड़ी में क्यों समय बदला गया है?

क्यों बदला गया प्रलय की घड़ी का समय?

@ प्रलय की घड़ी में चार सेकेंड आगे किए जाने के बाद बुलेटिन ऑफ एटॉमिक साइंटिस्ट की अध्यक्ष एलेक्जेंड्रा बेल ने बताया कि प्रलय की घड़ी का संदेश इससे अधिक साफ नहीं हो सकता है। उन्होंने बताया कि दुनिया में तबाही का खतरा बढ़ रहा है और सहयोग कम होता जा रहा है। दुनिया के पास समय कम होता जा रहा है।

कौन-कौन सी चीज का बढ़ रहा है खतरा?

@ एलेक्जेंड्रा बेल ने कहा कि बदलाव भी जरूरी है और मुमकिन भी। उन्होंने आगे कहा कि वैश्विक समुदाय को अपने नेताओं से तत्काल कार्रवाई की मांग करनी चाहिए।
@ बेन ने अपने बयान में कहा कि बुलेटिन के साइंस और सिक्योरिटी बोर्ड का मानना है कि इंसानियत ने उन बड़े खतरों पर तरक्की नहीं की है जो हम सभी को खतरे में डालते हैं। इसलिए घड़ी के समय को आगे बढ़ाते हैं।
@ उनका कहना है कि परमाणु हथियारों, जलवायु परिवर्तन और नुकसान पहुंचाने वाली तकनीक से दुनिया को जो खतरे हैं, वो सभी बढ़ रहे हैं। हर सेकंड कीमती है और दुनिया के पास समय कम होता जा रहा है।

क्यों दुनिया के अस्तित्व के लिए बढ़ रहा है खतरा?

@ साइंस एंड सिक्योरिटी बोर्ड के चेयरमैन डेनियल होल्ज ने चेतावनी देते हुए कहा कि बंटी हुई दुनिया पूरी इंसानियत को और भी कमजोर कर सकती है।

@ बोर्ड की तरफ से कहा गया है कि दुनिया की बड़ी ताकतें अधिक आक्रामक और विरोधी होती जा रही हैं। इससे मुश्किल से हुए ग्लोबल समझौतों को तोड़ा जा रहा है। इससे अस्तित्व के लिए खतरा बढ़ता जा रहा है।
@ उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर हालात में सुधार नहीं हुआ, तो तबाही की संभावना और बढ़ जाएगी।

कब और क्यों बनाई गई थी घड़ी?

@ शिकागो की नॉन-प्रॉफिट संस्था बुलेटिन ऑफ द एटॉमिक साइंटिस्ट्स ने मैनहट्टन परियोजना के तहत 1947 में कोल्ड वॉर के दौरान डूम्सडे क्लॉक बनाई थी। हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु हमले के बाद महाविनाश की घड़ी (डूम्सडे क्लॉक) बनाई गई थी।

@ परमाणु वैज्ञानिकों के बुलेटिन की तरफ से हर साल इस घड़ी का समय बदला जाता है। इसलिए घड़ी बनाई गई थी ताकि लोगों को चेतावनी दी जा सके कि मानव जाति दुनिया को नष्ट करने के कितनी करीब है। 

27 बार बदली जा चुकी है घड़ी की सेटिंग

@ प्रलय की घड़ी की शुरुआत जब से हुई है, तब से अब तक इसकी सेटिंग 27 बार बदली जा चुकी है. खास बात यह है कि यह कभी मिडनाइट तक नहीं पहुंची है, लेकिन कई बार बहुत करीब आई है।

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