नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को पश्चिम बंगाल में एक बड़ा राजनीतिक संदेश दिया। उन्होंने राज्य में आने वाले विधानसभा चुनाव के लिए नया नारा दिया – ‘पलटानो दरकार, चाहिए बीजेपी सरकार’। इसका मतलब है कि अब बदलाव की जरूरत है और लोग बीजेपी की सरकार चाहते हैं।
साफ है कि बंगाल में ममता (टीएमसी) का किला भेदने में भाजपा अभी से जुट गई है। भाजपा की कवायद देखकर दिल्ली से पश्चिम बंगाल तक सियासी हलचल बढ़ गई है। भाजपा का यह निर्णय यह भी दर्शाता है कि पार्टी बंगाल को लेकर पूरी तरह गंभीर है। पिछले लोकसभा और विधानसभा चुनावों में भाजपा ने राज्य में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है, लेकिन नेतृत्व का आकलन है कि निरंतर संगठनात्मक हस्तक्षेप से ही स्थायी राजनीतिक बढ़त हासिल की जा सकती है। दरअसल, भाजपा ने बंगाल विधानसभा चुनाव में बिहार मॉडल अपनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। बिहार में संगठन से जुड़े सात प्रदेश पदाधिकारियों को बंगाल भेजा गया है। इसमें पांच को लोकसभा का प्रभारी बनाया गया है। राष्ट्रीय नेतृत्व की ओर से बंगाल के प्रभारी और बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय के नेतृत्व में अनुभवी नेताओं को संगठनात्मक रूप से पार्टी जनाधार विस्तार के लिए लगाया गया था। इसमें मुख्य रूप से संगठन निर्माण, बूथ प्रबंधन, सामाजिक संतुलन एवं चुनावी तालमेल जैसे दायित्व भी शामिल है।
गाल में 200 से अधिक विधानसभा सीटें जीतने का लक्ष्य
भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने बंगाल में 200 से अधिक विधानसभा सीटें जीतने का लक्ष्य निर्धारित किया है, जबकि सत्ता के सिंहासन पर पहुंचने के लिए जादुई आंकड़ा 148 का ही है। केंद्रीय गृहमंत्री व भाजपा के वरिष्ठ नेता अमित शाह ने जब यह लक्ष्य निर्धारित किया था तो तृणमूल के नेताओं ने इसे दिवास्वप्न करार दिया था। भाजपा निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है। बंगाल का चुनावी महासमर हर दिन दिलचस्प मोड़ लेता जा रहा है। भगवा ब्रिगेड की रणनीति सिर्फ मुख्यमंत्री व तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी के वोट बैंक में सेंधमारी की ही नहीं है, बल्कि उनके संगठन को कमजोर करने की भी है।
बिहार अनुभव को बंगाल में झोंका
बंगाल फतह के लिए बिहार संगठन से जुड़े पांच पार्टी पदाधिकारियों को पश्चिम बंगाल में लोकसभा प्रभारी बनाकर भेजा है। इस कदम को पार्टी की उस रणनीति के रूप में देखा जा रहा है, जिसके तहत संगठनात्मक रूप से मजबूत राज्यों के अनुभवी नेताओं को उन क्षेत्रों में जिम्मेदारी दी जा रही है, जहां पार्टी विस्तार एवं सशक्तीकरण की संभावनाएं देख रही है।
पांडेय से ‘मंगल’ की उम्मीद
भाजपा नेतृत्व का मानना है कि बिहार में संगठन निर्माण, बूथ प्रबंधन, सामाजिक संतुलन और चुनावी तालमेल का जो मॉडल विकसित हुआ है, उसका प्रभावी उपयोग बंगाल में किया जा सकता है। बंगाल में भाजपा के प्रदेश प्रभारी और बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय द्वारा बिहार से भेजे गए पांचों पदाधिकारी लंबे समय से पार्टी संगठन से जुड़े रहे हैं।
बूथ स्तर तक प्रबंधन का जिम्मा
बंगाल में इन प्रभारी पदाधिकारियों की भूमिका केवल चुनाव प्रबंधन तक सीमित नहीं होगी। वे स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ नियमित संवाद, सामाजिक संगठनों से संपर्क, मतदाता समूहों की पहचान और मुद्दा आधारित अभियान को भी मजबूती देंगे। खासकर उन क्षेत्रों में, जहां भाजपा का जनाधार बढ़ा है, लेकिन संगठनात्मक ढांचे को और मजबूत करने की जरूरत है, वहां बिहार से गए प्रभारी अहम भूमिका निभाएंगे।
सिंगूर में 830 करोड़ रुपये की विकास परियोजना
बीजेपी सिंगूर के मुद्दे को राजनीतिक हथियार के रूप में उपयोग करने की तैयारी में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिंगूर में रैली में लगभग 830 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और आधारशिला किया। प्रधानमंत्री के इस कार्यक्रम के जरिये बीजेपी इसे ‘औद्योगिक पुनरुत्थान’ का प्रतीक बता रही है और वादा कर रही है कि सत्ता में आई तो टाटा वापस लाएगी।
सिंगूर के सियासी चक्रव्यूह में घेरकर मात देने की तैयारी
बीजेपी यहां सिंगूर के सियासी चक्रव्यूह में घेरकर ममता बनर्जी की टीएमसी को मात देने की तैयारी में है. इस लड़ाई में बीजेपी के ‘पांडव’ सुवेंदुअधिकारी, शमिक भट्टाचार्य, सुकांत मजुमदार, दिलीप घोष और फाल्गुनी पात्रा सीएम ममता बनर्जी के चक्रव्यूह को भेदने के लिए तैयार हैं. ये पांचों नेता सिंगूर को बीजेपी की चुनावी रणनीति का केंद्र बनाने और ममता की ‘परिवर्तन’ वाली कहानी को उलटने की कोशिश में जुटे हैं।
आसान नहीं है सत्ता हासिल करना
अपनी स्थिति परखने को भाजपा कई स्तरों पर आंतरिक सर्वे भी करा कर जनता की नब्ज टटोल रही है। अभी हाल में हुए सर्वे में भाजपा को बहुमत के करीब बताया गया है, लेकिन जो लक्ष्य है, उससे अभी दूर है। दूसरी तरफ ममता अभी पूरी तरह से मैदान में नहीं उतरी हैं, क्योंकि उनकी अपनी लोकप्रियता है और बंगाल में उनके स्तर का नेता भाजपा के पास नहीं है। इसके अलावा, चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर तृणमूल की जीत सुनिश्चित करने के लिए दुआरे सरकार, बंग ध्वनि जैसे अभियान चलवा रहे हैं।