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भारत का रूख करेगी पूरी दुनिया ? विदेश मंत्री जयशंकर ने लक्जमबर्ग में इंडिया को बताया सक्षम और विश्वसनीय, वेनेज़ुएला मामले पर जताई चिंता

नई दिल्ली। दुनिया में इन दिनों करीब सभी महाशक्तिों में युद्ध या यु्द्ध से हालात हैं। अमेरिका, ईरान, चीन, ताइवान, अफगानिस्तान जैसे तमाम देश आंतरिक और बाहरी संघर्ष से जूझ रहे हैं। इसी बीच विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने. . .

नई दिल्ली। दुनिया में इन दिनों करीब सभी महाशक्तिों में युद्ध या यु्द्ध से हालात हैं। अमेरिका, ईरान, चीन, ताइवान, अफगानिस्तान जैसे तमाम देश आंतरिक और बाहरी संघर्ष से जूझ रहे हैं। इसी बीच विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने बड़ा बयान दिया है। कहा कि जब देशों में बड़ी समस्याएं आती हैं और उनसे निपटने की क्षमता उनमें नहीं होती, तो वे स्वाभाविक रूप से उन देशों की ओर रुख करते हैं जो सक्षम होते हैं। हमारे क्षेत्र में यह विश्वास बढ़ता जा रहा है कि इस मामले में जिस देश पर भरोसा किया जा सकता है, वह भारत है।
दरअसल, भारत के विदेश मंत्री जयशंकर इन दिनों लक्जमबर्ग देश के दौरे पर हैं। भारत पर बात करते हुए कहा कि दुनिया का विश्वास कई वर्षों के अनुभव से उपजा है। यह स्वतः उत्पन्न नहीं हुआ। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि जब कोविड महामारी आई, तो हमारे लगभग सभी पड़ोसी देशों को हमसे ही पहला टीका मिला।

वेनेज़ुएला मामले पर भारत ने जताई चिंता

इसके अलावा जयशंकर ने वेजेनुएला पर भी बात की। विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि वेनेजुएला की स्थिति पर हम चिंतित हैं। कहा कि हम सभी पक्षों से बैठकर बातचीत के माध्यम से समस्या का समाधान निकालने की अपील करते हैं। इसके अलावा जयशंकर ने अन्य देशों को सलाह भी दी।
लक्जमबर्ग में विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर कहते हैं कि आज के दौर में देश तभी कोई काम करते हैं जब उससे उन्हें सीधा लाभ हो। वे मुफ्त सलाह देंगे। अगर कुछ होता है, तो वे कहेंगे, कृपया ऐसा न करें। अगर तनाव है तो हमें चिंता होती है। कभी-कभी आप लोगों को यह कहते हुए सुनते हैं, जैसा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हुआ था।
कहा कि अब, अगर आप उनसे पूछें, अरे सच में, आपको चिंता है, तो आप अपने क्षेत्र को क्यों नहीं देखते और खुद से पूछते हैं, वहां हिंसा का स्तर क्या है, कितना जोखिम उठाया गया है, आपके कार्यों को लेकर हम बाकी लोगों को कितनी चिंता है? लेकिन यही दुनिया का स्वभाव है। लोग जो कहते हैं, वह करते नहीं हैं। हमें इसे इसी भावना से स्वीकार करना होगा।

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