नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव चौथे हफ्ते में पहुंच गया है और इसका असर अब भारत के स्मार्टफोन मार्केट पर भी पड़ने लगा है। जी हां, इंडस्ट्री रिपोर्ट्स का कहना है कि इस ग्लोबल क्राइसिस की वजह से न सिर्फ डिमांड एफेक्ट हो रही है, बल्कि सप्लाई चेन पर भी दबाव बढ़ता जा रहा है। ऐसे में 2026 के लिए स्मार्टफोन शिपमेंट के अनुमान लगातार कम हो रहे हैं।
रिसर्च फर्म कॉउंटरपॉइंट रिसर्च ने 2026 के लिए भारत में स्मार्टफोन शिपमेंट का अनुमान घटाकर 139 मिलियन यूनिट कर दिया है, जो पहले 142 मिलियन बताया जा रहा था। जबकि Omdia ने भी अपने अनुमान को 148 मिलियन से घटाकर 142 से 145 मिलियन यूनिट तक कर दिया है। इतना ही नहीं IDC का कहना है कि 2026 में शिपमेंट घटकर 132 मिलियन यूनिट तक आ सकते हैं, जो 2025 के 152 मिलियन यूनिट से काफी कम होगा।
डिमांड और सप्लाई दोनों पर दबाव
एक्सपर्ट्स का मानना है कि ये गिरावट सिर्फ ग्लोबल क्राइसिस की वजह से नहीं, बल्कि मेमोरी और स्टोरेज जैसे जरूरी कंपोनेंट्स की कमी की वजह से भी हो रही है। इन पार्ट्स की कीमतें पहले ही 40 से 50% तक बढ़ गई हैं, जिससे स्मार्टफोन की लागत काफी बढ़ गई है।
ऐसे में मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने इस कंडीशन को और भी मुश्किल बना दिया है। बढ़ती डिमांड और जरूरी वस्तुओं की कीमतों में उछाल की वजह से उपभोक्ता अब गैर-जरूरी खर्चों, जैसे स्मार्टफोन खरीदने से भी बच रहे हैं।
एक्सपर्ट्स ने जारी की चेतावनी
वहीं, इस मामले पर IDC इंडिया की रिसर्च मैनेजर Upasana Joshi का कहना है कि मौजूदा मार्केट कंडीशन काफी चैलेंजिंग है और साल की दूसरी छमाही में हालात और खराब होने की उम्मीद है। जबकि Tarun Pathak का कहना है कि ईरान-इजरायल वॉर के चलते अस्थिरता बढ़ी है और ऐसे माहौल में लोग स्मार्टफोन जैसे खर्चों को कम कर रहे हैं।