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भारत-रूस रक्षा साझेदारी फिर सुर्खियों में, रूस से 288 S-400 मिसाइल खरीदेगा भारत, 40 से 400 km की रेंज,पाकिस्तान के लिए तबाही

नई दिल्ली। भारत और रूस के रक्षा संबंधों के लिए दो दिनों में दो अच्छी और सकारात्मक खबर मिली है। गुरुवार 12 फरवरी, 2026 को रूस से S-400 एयर डिफेंस सिस्टम के दो बाकी स्क्वाड्रन इसी साल मिलने की जानकारी. . .

नई दिल्ली। भारत और रूस के रक्षा संबंधों के लिए दो दिनों में दो अच्छी और सकारात्मक खबर मिली है। गुरुवार 12 फरवरी, 2026 को रूस से S-400 एयर डिफेंस सिस्टम के दो बाकी स्क्वाड्रन इसी साल मिलने की जानकारी आई और 13 फरवरी, 2026 को इसमें इस्तेमाल होने वाली 288 सरफेस टू एयर मिसाइल खरीदने की डील को हरी झंडी मिलने की खबर मिली। इन मिसाइलों की रेंज 40 किलो मीटर से लेकर 400 किलो मीटर तक है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इसने जिस तरह से पाकिस्तानी फौज की कमर तोड़ी थी, वह उस झटके से अभी तक पूरी तरह से उबर नहीं पाया है।

रूस से S-400 की कितनी मिसाइल आएगी

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अगुवाई वाले ‘रक्षा अधिग्रहण परिषद’ (DAC) ने रूस से S-400 में उपयोग होने वाले 288 मिसाइल खरीदने के लिए ‘आवश्यकता की स्वीकृति’ (AoN) को मंजूर कर लिया है। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार इस मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने बताया है कि यह सौदा 10,000 करोड़ रुपये का होगा।

S-400 मिसाइलों की रेंज कितनी होती है

S-400 में 400 किमी, 200 किमी, 150 किमी और 40 किमी की रेंज तक के सरफेस टू एयर मिसाइल इस्तेमाल होते हैं। अभी जो ‘आवश्यकता की स्वीकृति’ वाली मंजूरी मिली है, रिपोर्ट के अनुसार उसकी खरीदारी फास्ट ट्रैक प्रक्रिया (FTP) के तहत होनी है, जिसमें 120 कम रेंज वाली और 168 लंबी रेंज वाली मिसाइलें आनी हैं। इससे पहले रूस ने भारत को S-400 के पांच स्क्वाड्रन में से बाकी बचे दो में से चौथा जून तक और आखिरी या पांचवां नवंबर तक देने का भरोसा दिया है।

S-400 मिसाइलों की स्पीड कितनी होती है

रूस में बनी S-400 ट्रायंफ मिसाइल सिस्टम में ऐसी मिसाइलें शामिल हैं, जिनकी अधिकतम स्पीड 4.8 किलो मीटर प्रति सेकंड या मैक 14 (Mach 14) है। इसकी अत्यधिक गति इसे आसमान में 30 किलो मीटर तक की ऊंचाई तक दुश्मन के फाइटर जेट, ड्रोन, बैलिस्टिक मिसाइलों के अलावा अन्य सभी तरह के टारगेट को इंटरसेप्ट करने, ट्रैक करने और तबाह करने में सक्षम बनाते हैं।

S-400 मिसाइलों का ऑपरेशन सिंदूर में इस्तेमाल

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ इन मिसाइलों का बेहतरीन इस्तेमाल किया था। तभी से इस बात की आवश्यकता महसूस की जा रही थी कि सशस्त्र सेनाओं के भंडार में इन मिसाइलों का स्टॉक भरा रहे। भारतीय सशस्त्र सेनाओं ने इसी से पाकिस्तानी फाइटर जेट, अर्ली वॉर्निंग एंड इंटेलीजेंस गैदरिंग एयरक्राफ्ट और अनगिनित कॉम्बैट ड्रोन नाकाम किए थे।

पाकिस्तान के 314 किलो मीटर अंदर टारगेट ध्वस्त

जब भारत ने पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में उसकी फौज के विशाल टोही और निगरानी विमान को S-400 की एक लंबी दूरी वाली मिसाइल से 314 किलो मीटर दूर मारकर गिरा दिया था, तो जनरल असीम मुनीर अपने सैन्य विमानों को अफगानिस्तान और ईरान की सीमा पर मौजूद एयरबेस पर शिफ्ट करने को मजबूर हो गया था

पाकिस्तान सेना का रडार सिस्टम हुआ था चौपट

आदमपुर और भुज सेक्टर में तैनात S-400 एयर डिफेंस सिस्टम ने पाकिस्तान के लाहौर, रावलपिंडी, सियालकोट और पसरूर में लगे उसकी फौज के रडार सिस्टम को इस तरह से नाकाम कर दिया था कि 9-10 मई, 2025 को पाकिस्तानी एयर फोर्स कुछ भी करने की हिम्मत नहीं जुटा पाई।

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