कोलकाता। पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट के इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया में लगे 7 न्यायिक अधिकारियों के करीब 9 घंटे तक घेराव और बंधक बनाए जाने के मामले की जांच अब नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) करेगी. सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बाद गुरुवार देर शाम केंद्रीय चुनाव आयोग ने मामला एनआईए को सौंपने का फैसला किया। उधर मालदा पुलिस ने गुरुवार को घटना से संबंधित 10 एफआईआर दर्ज की और 19 लोगों की गिरफ्तारी का दावा किया।
19 लोग गिरफ्तार
पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में मतदाता सूची से नाम हटाने को लेकर सात न्यायिक अधिकारियों के घेराव के मामले में पुलिस ने चुनाव में उतरे एक उम्मीदवार सहित कुल 19 लोगों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने इंडियन सेकुलर फ्रंट (आईएसएफ) उम्मीदवार मौलाना शाहजहां अली और 17 अन्य लोगों को गिरफ्तार करके जिला अदालत में पेश किया गया। कोर्ट ने इन सभी आरोपियों को 10 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है।
पुलिस ने क्या बताया
मामले की जानकारी देते हुए एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि ये लोग कल रात मालदा में हुई घटना में शामिल थे। हमारे पास पुख्ता सबूत हैं। उनसे पूछताछ की जाएगी। बता दें कि बुधवार को मोथाबारी विधानसभा क्षेत्र के कलियाचक द्वितीय ब्लॉक कार्यालय में हुई घटना के बाद ये गिरफ्तारियां की गई हैं। इस घटना में मतदाता सूची संबंधी कार्य में लगे सात न्यायिक अधिकारियों का प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने बीडीओ कार्यालय में साढ़े सात घंटे से अधिक समय तक घेराव किया था। इन अधिकारियों में तीन महिलाएं थीं।
मुझे फंसाया जा रहा: मौलाना शाहजहां अली
गिरफ्तारी के बाद अली ने आरोपों से इनकार किया और दावा किया कि उन्हें उनकी राजनीतिक संबद्धता के कारण फंसाया जा रहा है। अदालत में पेशी के दौरान उन्होंने पत्रकारों से कहा कि मुझे झूठा फंसाया गया है क्योंकि मैं आईएसएफ का उम्मीदवार हूं। उन्होंने यह भी दावा किया कि घटना के समय वे घटनास्थल पर मौजूद नहीं थे। उन्होंने कहा कि मैं एक धार्मिक कार्यक्रम में गया था और घर लौट रहा था तभी मुझे गिरफ्तार कर लिया गया। मेरे खिलाफ साजिश है। वहीं पुलिस घटना की जांच कर रही है और आगे और गिरफ्तारयां होने की संभावना से इनकार नहीं किया है।