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मिडिल ईस्ट संकट पर फैसला, सरकार ने रक्षा मंत्री राजनाथ की अध्यक्षता में बनाई समिति, जाने इंटर-मिनिस्ट्रियल ग्रुप में कौन कौन है शामिल

नई दिल्ली। सरकार ने मिडिल ईस्ट संकट के बीच पैदा होने वाले मामलों पर नजर रखने के लिए कमिटी का गठन किया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अगुवाई में ये इंटर-मिनिस्ट्रियल ग्रुप बनाया गया है। ये कमिटी मिडिल ईस्ट. . .

नई दिल्ली। सरकार ने मिडिल ईस्ट संकट के बीच पैदा होने वाले मामलों पर नजर रखने के लिए कमिटी का गठन किया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अगुवाई में ये इंटर-मिनिस्ट्रियल ग्रुप बनाया गया है। ये कमिटी मिडिल ईस्ट में जारी जंग जैसे हालात से देश पर पड़ने वाले असर पर नजर रखेगी। इस कमिटी की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे। गृह मंत्री अमित शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के साथ दूसरे मंत्री भी सदस्य हैं।

इसलिए बनाया गया इंटर मिनिस्ट्रियल ग्रुप

सरकार से जुड़े सूत्रों ने बताया कि जिस तरह से ईरान के साथ इजरायल और अमेरिका का युद्ध चल रहा है। उससे कई देशों में ऊर्जा संकट गहराने लगा है। भारत में भी एनर्जी क्राइसिस गंभीर न हो जाए। इसे लेकर कोई पैनिक नहीं फैले, ऐसे मामलों पर खास निगरानी के लिए इंटर मिनिस्ट्रियल ग्रुप एक्टिव रहेगी। इस कमिटी में राजनाथ सिंह को अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस ग्रुप में अमित शाह भी शामिल हैं।

पेट्रोल-डीजल में एक्साइज ड्यूटी घटाने के बाद सरकार का फैसला

सूत्रों के अनुसार, मध्य पूर्व संघर्ष से संबंधित चिंताओं को दूर करने के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में एक अंतर-मंत्रालयी समूह का गठन किया गया है। सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी कम कर दिया है। डीजल निर्यात पर लगने वाले अप्रत्याशित लाभ कर और विमानन टरबाइन ईंधन पर लगने वाले करों में भी संशोधन किया गया है। इन उपायों का उद्देश्य वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच ईंधन की कीमतों को स्थिर करना है।

अभी कितनी है पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी

सरकार ने पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में उछाल से उपभोक्ताओं को बचाने के लिए पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क घटाकर तीन रुपये प्रति लीटर कर दिया है और डीजल पर इसे शून्य कर दिया गया है। मंत्रालय ने कहा कि शुल्क में यह कटौती तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क 13 रुपये प्रति लीटर से घटाकर तीन रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। डीजल पर यह शुल्क पहले के 10 रुपये से घटाकर शून्य कर दिया गया है।

होर्मुज में घमासान, क्यों है टेंशन वाली बात

भारत कच्चे तेल की अपनी जरूरतों का 88 फीसदी और प्राकृतिक गैस की जरूरत का लगभग आधा हिस्सा आयात करता है। इनमें से अधिकांश आपूर्ति ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ के रास्ते होती है। ईरान पर अमेरिकी और इजराइली हमलों के बाद तेहरान ने इस जलडमरूमध्य को बाधित कर दिया है जिससे टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हुई है।

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