कोलकाता। पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में दो पास-पास की गोदामों में आग लगने से करीब आठ लोगों की मौत हो गई और कई अन्य लापता हो गए। पुलिस ने बताया कि कोलकाता के बाहरी इलाके में, नरेंद्रपुर पुलिस स्टेशन की सीमा के अंदर नजीराबाद इलाके में दो यूनिटों में लगी आग पर सात घंटे की मशक्कत के बाद काबू पा लिया गया।
32 घंटे बाद गोदाम पहुंचे
आनंदपुर के भीषण अग्निकांड के 32 घंटे बाद राज्य के दमकल मंत्री सुजीत बोस आखिरकार जले हुए गोदाम पहुंचे। घटनास्थल पर उन्होंने डीजी से बातचीत की, पूरे इलाके का मुआयना किया और पत्रकारों के सवालों के जवाब दिए। इस दौरान मंत्री ने स्वीकार किया कि, “कल गणतंत्र दिवस था, इसलिए कई जगह व्यस्त रहना पड़ा।”
एक ही सवाल गूंजता रहा की दमकल मंत्री कहां हैं?
रविवार देर रात करीब 1 बजे आनंदपुर स्थित गोदाम में भीषण आग लगती है। हादसे के बाद से दमकलकर्मी लगातार आग बुझाने और पॉकिट फायर पर काबू पाने में जुटे रहे। चारों ओर स्वजनहारों की चीख-पुकार, लापता लोगों की तलाश और जले-झुलसे मलबे के बीच एक ही सवाल गूंजता रहा की दमकल मंत्री कहां हैं?
आग लगने के करीब 15 घंटे बाद विद्युत मंत्री अरूप विश्वास मौके पर पहुंचे, लेकिन पूरे दिन विपक्ष लगातार दमकल मंत्री की गैरमौजूदगी पर सवाल उठाता रहा। सोमवार रात करीब साढ़े सात बजे एक अन्य कार्यक्रम से निकलते समय सुजीत बोस ने पत्रकारों से कहा था कि वे “तड़के तीन बजे से कंट्रोल रूम के संपर्क में थे।”
पूरा इलाका जतु गृह जैसा था : मंत्री
मीडिया से बातचीत में सुजीत बोस ने कहा,“यह आग बहुत देर रात लगी। लगभग 35 हजार स्क्वायर फीट क्षेत्र में फैला यह इलाका था। यहां मोमो बनाने की फैक्ट्री और एक डेकोरेटर का गोदाम था। चरणबद्ध तरीके से 12 दमकल इंजन भेजे गए। आग पर काबू पा लिया गया है, लेकिन अभी भी कई जगह पॉकिट फायर हैं, इसलिए गाड़ियां तैनात हैं। यह पूरा इलाका जतु गृह जैसा था, यहां भारी मात्रा में ज्वलनशील पदार्थ जमा था। रात तीन बजे मुझे पहली सूचना मिली।”
अपने देर से पहुंचने पर सफाई देते हुए मंत्री ने कहा, “कल गणतंत्र दिवस था, इसलिए कई कार्यक्रमों में व्यस्त था। फिर भी इस घटना को पूरी गंभीरता दी गई। कल रात भर यहां हमारे लोग मौजूद थे।”
गौरतलब है कि इस गोदाम को लेकर पहले ही आरोप लग चुके हैं कि यह जलाभूमि पाटकर बनाया गया था। सोमवार को दमकल अधिकारियों ने भी बताया था कि वहां अग्नि-निवारण की कोई व्यवस्था नहीं दिखी। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या यहां फायर ऑडिट हुआ था? और अगर नहीं, तो यह सब प्रशासन की नजर से कैसे बच गया?
अग्नि-निवारण जैसी कोई व्यवस्था नहीं थी
इस पर दमकल मंत्री ने कहा, “मैंने डीजी से बात की है। यहां अग्नि-निवारण जैसी कोई व्यवस्था नहीं थी। हमें मौके पर कुछ भी ऐसा नहीं मिला। फायर ऑडिट होता है, लेकिन यहां ऑडिट हुआ था या नहीं—इसकी जांच की जाएगी। हर मामले में जांच होती है। यहां भी फॉरेंसिक टीम आएगी, एफआईआर दर्ज होगी और पूरी जांच की जाएगी।” अब सवाल सिर्फ आग लगने का नहीं, बल्कि लापरवाही, अवैध निर्माण और प्रशासनिक चूक का भी है—जिसका जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा।