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विधानसभा चुनाव से पहले फिर I-Pac के ठिकानों पर ED की छापेमारी, दिल्ली, बेंगलुरु और हैदराबाद में रेड, बंगाल में ममता का चुनाव प्रबंधन देखती है कंपनी

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले एक बार फिर आईपैक के कई ठिकानों पर ईडी ने छापेमारी की है। यह छापेमारी दिल्ली, हैदराबाद और बेंगलुरु में चल रही है। आईपैक बंगाल में ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी. . .

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले एक बार फिर आईपैक के कई ठिकानों पर ईडी ने छापेमारी की है। यह छापेमारी दिल्ली, हैदराबाद और बेंगलुरु में चल रही है। आईपैक बंगाल में ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी का चुनाव प्रबंधन देखती है। दरअसल, यह छापेमारी कोयले की तस्करी को लेकर चल रही है। हालांकि छापेमारी के दौरान क्या कुछ मिला है, इसकी जानकारी अभी तक सामने नहीं आई है।

2020 में दर्ज कराई थी एफआईआर

बेंगलुरु में आईपैक के डायरेक्ट ऋषिकांत सिंह के आवास पर भी छापेमारी हुई। दरअसल, I-Pac और उसके डायरेक्टर पर करोड़ों रुपए के कोयला चोरी घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है। इस मामले में 27 नवंबर 2020 को सीबीआई ने एफआईआर दर्ज कराई थी।

कई शहरों में चल रही है छापेमारी

दरअसल, ईडी की यह छापेमारी कोयले की तस्करी को लेकर चल रही है। दिल्ली, बेंगलुरु और हैदराबाद में चल रही है। आईपैक पश्चिम बंगाल में टीएमसी के लिए चुनाव प्रबंधन का काम देख रही है। आईपैक से पहले प्रशांत किशोर भी जुड़े रहे हैं। हालांकि छापेमारी के दौरान क्या कुछ मिला है, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने ममता बनर्जी का चुनाव प्रचार संभाल रही आई पैक (I-PAC) नई दिल्ली, बेंगलुरु और हैदराबाद के ऑफिस में छापेमारी की। बेंगलुरु में आईपैक के डायरेक्ट ऋषिकांत सिंह के आवास पर भी छापेमारी हुई। ईडी सूत्रों के मुताबिक, कोयला तस्करी मामले की जांच के लिए I-PAC के ठिकानों को खंगाला गया है।

ममता बनर्जी पहुंच गईं थी ईडी ऑफिस

जनवरी 2026 में आईपैक के कोलकाता स्थित ऑफिस पर ईडी की छापेमारी हुई थी। छापेमारी की खबर सुनते ही पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी वहां पहुंच गई थीं। साथ ही ईडी अधिकारियों से एक फाइल छीन ली थीं। इस दौरान खूब बखेड़ा खड़ा हुआ था। आईपैक पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के लिए चुनावी प्रबंधन का काम देख रही है। इसके साथ ही अन्य राज्यों में भी यह सियासी पार्टियों के लिए काम करती है।

क्या करती है आईपैक

आईपैक सियासी दलों के लिए चुनावी प्रबंधन का काम करती है
अभी तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में कर रही है काम
कंपनी का मुख्यालय हैदराबाद में है

प्रशांत किशोर ने की थी इसकी स्थापना

गौरतलब है कि 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले जनसुराज पार्टी के अध्यक्ष प्रशांत किशोर ने आईपैक की स्थापना की थी। राजनीति में कदम रखने से पहले प्रशांत किशोर चुनावी रणनीतिकार थे। पहले इसका मुख्यालय हैदराबाद में था। आईपैक ने कई सियासी दलों के लिए काम किया है। 2021 में प्रशांत किशोर आईपैक से अलग हो गए। अब पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी का काम प्रतीक जैन देख रहे हैं। वह आईपैक के सह संस्थापक हैं। प्रतीक जैन आईआईटी बॉम्बे से पढ़े हैं। साथ वही पटना के रहने वाले हैं।

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