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सिंगुर में जमीन आज भी एक समस्या है : सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बावजूद खेती योग्य नहीं हुई ज़मीन, ममता की चुप्पी से निराश आंदोलनकारी

सिंगूर । सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ज़मीन लौटाए जाने के बावजूद राज्य सरकार की ओर से अब तक उसे खेती योग्य नहीं बनाए जाने का आरोप लगाते हुए सिंगूर के आंदोलनकारी किसानों ने गहरी नाराज़गी जताई है। ज़मीन हाथ. . .

सिंगूर । सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ज़मीन लौटाए जाने के बावजूद राज्य सरकार की ओर से अब तक उसे खेती योग्य नहीं बनाए जाने का आरोप लगाते हुए सिंगूर के आंदोलनकारी किसानों ने गहरी नाराज़गी जताई है। ज़मीन हाथ में होने के बावजूद उस पर खेती शुरू न हो पाने से किसान गंभीर संकट में हैं।
बुधवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सभा से ज़मीन को खेती योग्य बनाने को लेकर किसी ठोस घोषणा की उम्मीद में सिंगूर आंदोलन के प्रमुख चेहरे दूध कुमार धारा और महादेव दास सहित कई नेता सभा में पहुंचे थे। लेकिन मंच से इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री की ओर से एक भी शब्द न कहे जाने से आंदोलनकारी बेहद निराश हो गए।

ज़मीन को खेती योग्य बनाने की लड़ाई आगे जारी रहेगी

हालांकि किसानों ने साफ कर दिया है कि वे हार मानने वाले नहीं हैं। उनका कहना है कि जिस तरह ज़मीन वापस पाने के लिए संघर्ष किया गया, उसी तरह ज़मीन को खेती योग्य बनाने की लड़ाई भी आगे जारी रहेगी। ज़रूरत पड़ी तो मुख्यमंत्री से सीधे मुलाकात कर इस विषय को उठाया जाएगा। आंदोलनकारियों की स्पष्ट मांग है कि या तो ज़मीन पर खेती की व्यवस्था की जाए, नहीं तो सरकार कोई वैकल्पिक समाधान निकाले।

2016 में सुप्रीम कोर्ट ने ज़मीन खेती योग्य बनाकर लौटाने का निर्देश दिया था

गौरतलब है कि वर्ष 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने टाटा मोटर्स परियोजना के लिए अधिग्रहित ज़मीन किसानों को खेती योग्य बनाकर लौटाने का निर्देश दिया था। इसके बाद राज्य सरकार ने डायनामाइट से फैक्ट्री ढांचा तोड़कर ज़मीन किसानों को सौंप दी। लेकिन किसानों का आरोप है कि लौटाई गई लगभग 70 प्रतिशत ज़मीन आज भी खेती के लायक नहीं बन पाई है।

सरकारी धन का सही इस्तेमाल नहीं हुआ

आंदोलनकारी नेता दूध कुमार धारा ने कहा, “आंदोलन के दौरान ममता बनर्जी ने कहा था कि एक तरफ उद्योग होगा और दूसरी तरफ खेती। उसी भरोसे हम सड़कों पर उतरे थे। लेकिन आज भी हम ज़मीन को खेती योग्य नहीं बना पाए हैं। पिछले एक साल से हम मुख्यमंत्री तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। सिंगूर की बंजर ज़मीन को उपयोगी बनाने के लिए संघर्ष जारी रहेगा। हमारा मानना है कि ज़मीन को खेती योग्य बनाने के नाम पर खर्च किए गए सरकारी धन का सही इस्तेमाल नहीं हुआ है।”

मुख्यमंत्री से थी उम्मीद में

वहीं महादेव दास ने कहा, “हमने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को भी जानकारी दी है। आश्वासन तो मिला, लेकिन ज़मीनी स्तर पर कोई काम नहीं हुआ। मुख्यमंत्री इस मुद्दे पर कुछ कहेंगी, इसी उम्मीद में सभा में आए थे, लेकिन उन्होंने कुछ नहीं कहा। परियोजना की ज़मीन से सिर्फ जल निकासी का काम हो रहा है, इसके अलावा कुछ नहीं। राज्य सरकार खेती की व्यवस्था करे या फिर कोई वैकल्पिक रास्ता निकाले।”

15 साल में पश्चिम बंगाल में कितने उद्योग आए और कितनों को नौकरी मिली?

इस बीच सिंगूर में उद्योग के मुद्दे पर मुख्यमंत्री की चुप्पी को लेकर भाजपा नेता दिलीप घोष ने तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “15 साल में पश्चिम बंगाल में कितने उद्योग आए और कितनों को नौकरी मिली? क्या लोग दान का चावल खाकर ज़िंदगी गुज़ारेंगे? 15 साल सत्ता में रहने के बाद भी अगर सिर्फ उद्योग के वादे ही किए जाएं, तो राज्य कैसे चलेगा?”

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