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अमेरिकी सीनेटर रोजर मार्शल ने दिया बड़ा बयान, कहा- भारत को रूसी तेल खरीदने की अनुमति देना अमेरिका के हित में

वॉशिंगटन/नई दिल्ली। भारत द्वारा रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर अमेरिका में एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। इसी बीच अमेरिकी सीनेटर रोजर मार्शल ने कहा है कि भारत को रूस से तेल खरीदने की अनुमति देना. . .

वॉशिंगटन/नई दिल्ली। भारत द्वारा रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर अमेरिका में एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। इसी बीच अमेरिकी सीनेटर रोजर मार्शल ने कहा है कि भारत को रूस से तेल खरीदने की अनुमति देना अमेरिका के लिए भी फायदेमंद साबित हो सकता है। उनका मानना है कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में यह कदम दुनिया के बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद करेगा।
रोजर मार्शल पहले रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने के समर्थक रहे हैं, लेकिन अब उनका कहना है कि अगर भारत पर रूसी तेल खरीदने को लेकर लगाए गए प्रतिबंधों में ढील दी जाती है तो इससे अमेरिका में भी पेट्रोल और ईंधन की कीमतों को काबू में रखा जा सकेगा।

ईरान संघर्ष और होर्मुज़ जलडमरूमध्य से बढ़ी चिंता

मध्य पूर्व की स्थिति इस समय विश्व ऊर्जा बाजार के लिए चिंता का विषय बन गई है। ईरान से जुड़ी युद्ध जैसी स्थिति के बीच Islamic Revolutionary Guard Corps ने रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण Strait of Hormuz को बंद कर दिया है।
यह जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में से एक है। इसके बंद होने से सैकड़ों तेल टैंकर समुद्र में ही फंस गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो विश्व बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है।
इसी पृष्ठभूमि में अमेरिका ने भारत को रूसी तेल खरीदने के मामले में कुछ राहत देने का संकेत दिया है, ताकि वैश्विक आपूर्ति बनी रहे और कीमतों में अचानक बढ़ोतरी न हो।

समुद्र में मौजूद तेल खरीदने की अनुमति

अमेरिकी प्रशासन ने एक दिशा-निर्देश जारी करते हुए कहा है कि समुद्र में पहले से मौजूद रूसी कच्चे तेल को भारतीय शोधन संयंत्र खरीद सकते हैं। इसका उद्देश्य वैश्विक तेल आपूर्ति को स्थिर बनाए रखना है।
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने फरवरी में एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर करते हुए भारत के सामानों पर लगाए गए 25 प्रतिशत दंडात्मक शुल्क को हटा दिया था। यह अतिरिक्त शुल्क रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पर लगाया गया था।

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का असर

हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi ने घोषणा की थी कि अमेरिका और भारत एक नए व्यापार समझौते पर सहमत हुए हैं। इस समझौते के तहत भारत के कुछ सामानों पर लगाए गए अतिरिक्त शुल्क को कम किया गया।
हालांकि उस समय ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि अगर भारत फिर से रूस से तेल खरीद बढ़ाता है तो भारत के सामानों पर दोबारा शुल्क लगाया जा सकता है।
बाद में व्हाइट हाउस द्वारा जारी विवरण में पहले कहा गया था कि भारत रूस से तेल खरीदना बंद करेगा, लेकिन बाद में उसमें संशोधन कर कहा गया कि भारत केवल रूसी तेल पर अपनी निर्भरता कम करने की कोशिश करेगा।

भारत का स्पष्ट रुख

भारत ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि रूस से तेल खरीदने का फैसला देश के राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखकर लिया गया है। भारत का कहना था कि विश्व बाजार में तेल की कीमतों को स्थिर रखने के लिए यह कदम

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