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अविमुक्तेश्वरानंद को चेतावनी- माघ मेले से बैन कर देंगे : प्रशासन ने दूसरा नोटिस भेजा

प्रयागराज। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर के पीछे चिपकाया गया है, जिसमें लिखा है कि मौनी अमावस्या वाले दिन इमरजेंसी के लिए रिजर्व रखे गए पांटून पुल पर लगाए गए बैरियर को उन्होंने तोड़ दिया और बिना अनुमति बग्घी के साथ. . .

प्रयागराज। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर के पीछे चिपकाया गया है, जिसमें लिखा है कि मौनी अमावस्या वाले दिन इमरजेंसी के लिए रिजर्व रखे गए पांटून पुल पर लगाए गए बैरियर को उन्होंने तोड़ दिया और बिना अनुमति बग्घी के साथ संगम की तरफ बढ़ने की कोशिश की। उस दौरान संगम क्षेत्र में भारी भीड़ थी, जिससे भगदड़ की आशंका पैदा हो गई और व्यवस्था बिगड़ गई।

जवाब के लिए 24 घंटे का दिया समय

नोटिस में प्रशासन ने पूछा है कि उनके इस आचरण के चलते उन्हें हमेशा के लिए मेले में प्रवेश से प्रतिबंधित क्यों न कर दिया जाए। साथ ही चेतावनी दी गई है कि अगर 24 घंटे में संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया, तो शंकराचार्य संस्था को दी गई जमीन व सुविधाएं रद्द की जा सकती हैं और भविष्य में मेला क्षेत्र में आने से रोका जा सकता है।

मेल से भिजवाया था 8 पन्नों का जवाब

इससे पहले मंगलवार सुबह 8 बजे कानूनगो अनिल कुमार के जरिए प्रशासन ने पहला नोटिस शिविर के गेट पर चस्पा कराया था। उसमें सुप्रीम कोर्ट के 14 अक्टूबर 2022 के आदेश का हवाला देते हुए पूछा गया था कि उन्होंने खुद को शंकराचार्य घोषित कैसे कर लिया। उसी रात करीब 10 बजे अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से 8 पन्नों का जवाब भेजा गया, जिसमें उन्होंने चेतावनी दी थी कि यदि नोटिस वापस नहीं लिया गया तो मानहानि का मामला दायर करेंगे।

सपा ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में मोर्चा खोला

इसी बीच सपा ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में खुलकर मोर्चा खोल दिया है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पहले उन्हें फोन किया, जिसके बाद नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय को शिविर में भेजा गया। पांडेय ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से मुलाकात की। मुलाकात के बाद माता प्रसाद पांडेय ने कहा कि सरकार एक तरफ तो सनातन धर्म की बातें करती है, लेकिन एक संत के अपमान पर चुप्पी साधे हुए है। उन्होंने इसे किसी बड़ी साजिश का हिस्सा बताते हुए कहा कि यह मुद्दा विधानसभा में उठाया जाएगा।
बता दें कि 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के मौके पर अविमुक्तेश्वरानंद पालकी में स्नान करने जा रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोककर पैदल जाने का निर्देश दिया। विरोध के दौरान उनके शिष्यों से धक्का-मुक्की होने लगी। इसके बाद नाराज़ होकर वे शिविर के बाहर धरने पर बैठ गए थे।

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