नई दिल्ली। पश्चिम एशिया की जमीन इन दिनों बारूद की गंध से भरी है। इस्राइल और अमेरिका की ओर से ईरान पर जारी सैन्य हमलों और ईरान की जवाबी कार्रवाई का आज चौथा दिन है। दोनों देशों की संयुक्त बमबारी तेज हो गई है और अमेरिकी राष्ट्रपति ने संकेत दिया है कि यह अभियान चार-पांच हफ्ते तक चल सकता है। पूरा क्षेत्र युद्ध जैसे हालात से गुजर रहा है। पश्चिम एशिया में तनाव से जुड़े सभी अपडेट्स इस लाइव ब्लॉग में पढ़ें…
ट्रंप अमेरिका को ‘कई वर्षों तक चलने वाले संघर्ष’ में नहीं पड़ने देंगे: वेंस
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने उन आलोचकों को जबाव दिया है, जो कहते हैं कि ट्रंप ने ‘अंतहीन’ विदेशी युद्धों से बचने के अपने चुनावी वादे को तोड़ दिया है। फॉक्स न्यूज पर बोलते हुए वेंस ने तर्क दिया कि ईरान पर हमला करने का ट्रंप का फैसला इराक और अफगानिस्तान पर अमेरिका के युद्धों से अलग है। उन्होंने कहा, ‘डोनाल्ड ट्रंप किसी भी हालत में देश को बिना किसी स्पष्ट अंत और बिना किसी स्पष्ट उद्देश्य के कई वर्षों तक चलने वाले संघर्ष में नहीं पड़ने देंगे। वेंस ने कहा कि उस उद्देश्य का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान को परमाणु हथियार न मिल पाए।
सऊदी सेना ने रियाद और अल-खारज के पास 8 ड्रोन गिराए
सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय के अनुसार सऊदी अरब ने रियाद और पास के शहर अल-खारज की ओर जा रहे कम से कम 8 ड्रोन को रोककर नष्ट कर दिया है। इसके अलावा कोई अतिरिक्त जानकारी नहीं दी गई। मंगलवार की सुबह मंत्रालय ने पुष्टि की है कि रियाद में अमेरिकी दूतावास पर कम से कम दो ड्रोन हमले हुए, जिसके परिणामस्वरूप दूतावास परिसर के अंदर एक इमारत में सीमित आग और मामूली क्षति हुई।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने जारी किया वीडियो
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने एक वीडियो साझा किया, जिसमें उन्होंने बताया कि ईरान ऑपरेशन एपिक फ्यूरी का पूरा ध्यान ईरानी आक्रामक मिसाइलों को नष्ट करने पर केंद्रित है। अमेरिकी सेना ईरान पर सटीक, व्यापक और निर्भीक ढंग से हमला कर रही है।
यूएन ने शुरू की कूटनीतिक समाधान की कोशिशें
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने खाड़ी क्षेत्र के कई नेताओं से बातचीत की है। यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब ईरान के साथ चल रहे युद्ध के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर को लेकर संयुक्त राष्ट्र ने चिंता जताई है। संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने सोमवार को कहा कि क्षेत्र में हो रही सैन्य गतिविधियों का पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे हालात का सबसे ज्यादा असर हमेशा कमजोर और गरीब देशों पर पड़ता है। खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता का सीधा असर तेल की कीमतों पर पड़ता है। सोमवार को तेल की कीमतों में 5.63 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। अगर होर्मुज की खाड़ी में जहाजों की आवाजाही बंद होती है, तो ऊर्जा की कीमतें और ज्यादा बढ़ सकती हैं।