कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को नेताजी सुभाषचंद्र बोस की जयंती के अवसर पर रेड रोड पर आयोजित कार्यक्रम से केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर कड़ा हमला बोला। एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) प्रक्रिया को लेकर मुखर होते हुए ममता ने कहा कि अब लोगों की निजी ज़िंदगी में भी दखल देने की कोशिश की जा रही है।
“मैं बंगाली में अपना उपनाम ‘बंद्योपाध्याय’ लिखती हूं और अंग्रेज़ी में ‘बैनर्जी
मुख्यमंत्री ने नाम और उपनाम के विवाद का ज़िक्र करते हुए कहा, “मैं बंगाली में अपना उपनाम ‘बंद्योपाध्याय’ लिखती हूं और अंग्रेज़ी में ‘बैनर्जी’। इसमें समस्या क्या है? इतना सा फर्क जो नहीं समझते, उन्हें धिक्कार देने के अलावा और कुछ नहीं किया जा सकता।” उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासी और अनुसूचित समुदायों के लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाने की कोशिश हो रही है।
जन्म प्रमाणपत्र मांगने पर उठाया सवाल
बाबा-मां के जन्म प्रमाणपत्र मांगे जाने पर सवाल उठाते हुए ममता ने कहा, “मेरे घर में काम करने वाली एक आदिवासी लड़की ने बताया कि उसके पूरे परिवार को नोटिस भेजा गया है। अमर्त्य सेन जैसे प्रतिष्ठित व्यक्ति से भी माता-पिता की उम्र के अंतर को लेकर सवाल पूछे जा रहे हैं। अब क्या शादी करेगी या नहीं, यह भी पूछा जाएगा? प्रेम करेगी या नहीं, यह भी तय करेंगे? बच्चा पैदा होगा या नहीं, यह भी वही तय करेंगे? और अगर बच्चा पैदा हो भी जाए, तो क्या उनकी इजाज़त लेनी होगी?”
एक इंसान की ज़िंदगी की कीमत बहुत ज़्यादा है
ममता बनर्जी ने साफ कहा कि वह शुरू से ही एसआईआर प्रक्रिया का विरोध करती आ रही हैं और तृणमूल कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर चुनाव आयोग तक जा चुकी है। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा, “मैं राजनीति की बात नहीं कर रही हूं। एक इंसान की ज़िंदगी की कीमत बहुत ज़्यादा है। आज हमारी लड़ाई कौरवों और दानवों से है। आज आप सत्ता में हैं, लेकिन कल जब सत्ता नहीं रहेगी, तब भागना पड़ेगा।” नेताजी की जयंती के मंच से दिया गया ममता बनर्जी का यह बयान एसआईआर को लेकर जारी राजनीतिक और सामाजिक बहस को और तेज़ कर गया है।