नई दिल्ली। नोबेल पुरस्कार से सम्मानित अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने पश्चिम बंगाल में जारी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर गहरी चिंता जताई है। अमर्त्य सेन का कहना है कि यह कवायद ‘अनावश्यक जल्दबाजी’ में की जा रही है। उन्होंने कहा कि कुछ ही महीनों में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले यह लोकतांत्रिक भागीदारी को खतरे में डाल सकती है। एक इंटरव्यू में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित अर्थशास्त्री ने वोटर के पुनरीक्षण के लोकतांत्रिक महत्व पर विचार व्यक्त किए।
लोकतांत्रिक प्रक्रिया की दो शर्तें नदारद
अमर्त्य सेन ने कहा कि यह प्रक्रिया तभी मताधिकारों को मजबूत कर सकती है, जब इसे सावधानी के साथ और पर्याप्त समय लेकर अंजाम दिया जाए। उनके अनुसार, बंगाल के मामले में ये दोनों शर्तें ‘नदारद’ हैं। उन्होंने कहा कि मतदाता सूचियों का गहन पुनरीक्षण अगर सावधानी से और पर्याप्त समय लेकर किया जाए तो यह एक अच्छी लोकतांत्रिक प्रक्रिया हो सकती है, लेकिन इस समय पश्चिम बंगाल में ऐसा नहीं हो रहा है।
एसआईआर को लेकर शेयर किया अपना अनुभव
उन्होंने बंगाल में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान अपने अनुभव को साझा करते हुए सेन ने कहा कि समय का दबाव चुनाव अधिकारियों पर भी साफ दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि कभी-कभी निर्वाचन आयोग के अधिकारियों के पास ही पर्याप्त समय नहीं होता है। उन्होंने कहा कि जब शांतिनिकेतन से वह पहले भी मतदान कर चुके हैं और वहां उनके नाम-पते सहित अन्य विवरण आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज हैं, तो इसके बावजूद उनके मताधिकार पर सवाल उठाया गया।
नई वोटर लिस्ट में नाम… वर्गीय पक्षपात झलकता है
सेन ने कहा कि नई वोटर लिस्ट में नाम दर्ज कराने की पात्रता तय करने के लिए खास दस्तावेज जुटाने और दिखाने की अनिवार्यता में जो वर्गीय पक्षपात झलकता है, वह स्वाभाविक रूप से निर्धन वर्ग के खिलाफ काम करता है। उन्होंने कहा कि एक अन्य स्थिति जिस पर विचार किया जा सकता है, वह अल्पसंख्यक समुदायों को अपने अधिकारों, जिनमें मतदान का अधिकार भी शामिल है, को प्राप्त करने में आने वाली कठिनाइयों से संबंधित हो सकती है।
हाल ही में मजबूत हुए हिंदुत्ववादी चरमपंथियों की सक्रियता के कारण भारतीय मुसलमानों को अक्सर वंचित स्थिति में धकेल दिया जाता है। हिंदुओं की कुछ श्रेणियों को भी भेदभाव और निशाना बनाए जाने का सामना करना पड़ सकता है। सेन ने उच्चतम स्तर पर सतर्कता बरतने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट को यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी भी वयस्क भारतीय नागरिक को मतदान के लिए अर्हता प्राप्त करने में कठिनाई न हो।