नई दिल्ली: मिसाइलें और ड्रोन से हमले, रोते-बिलखते लोग, हर तरफ मातम… ये मंजर है ईरान का, जहां इजरायल और अमेरिका मिलकर आसमान से तबाही बरसा रहे हैं। हर गुजरते दिन के साथ हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं, ऐसा नहीं है कि ईरान इन हमलों का जवाब नहीं दे रहा। लेकिन उसका जो नुकसान हो रहा है, उसी भरपाई सिर्फ जवाबी हमले नहीं कर सकते। इजरायल-अमेरिका के हमलों में ईरान के मिनाब के एक प्राइमरी स्कूल की 165 छात्राएं मारी जा चुकी हैं। इन मासूमों को दफनाने के लिए कब्रे खोली गईं, ये तस्वीर बहुत ही दर्दनाक है.
ईरान में छात्राओं को दफनाने के लिए खोदी कब्र

हमलों में मारी गई बच्चियों के लिए खोदी गई कब्रों की तस्वीर ईरान के विदेश मंत्री ने शेयर की है। ये तस्वीर आसमान से ली गई है। इस तस्वीर में बच्चियों को दफनाने के लिए खोदी गईं कब्रों को देखा जा सकता है।ये कब्रें एक ही जगह पर बराबर में खोदी जा रही हैं। कब्रों की संख्या इतनी ज्यादा है कि जगह- जगह लगाए गए निशानों के आधार पर इनको हाथ के बजाय JCB से खोदना पड़ा। ऊंचाई से ली गई इस तस्वीर को देखकर ऐसा लग रहा है जैसे छोटे-छोटे छेद बनाए गए हैं।लेकिन ये तो बच्चियों को दफनाने के लिए खोदी गई कब्रें हैं। इस तस्वीर को देखकर किसी का भी कलेजा फट उठेगा।
बता दें कि स्कूल पर हुए हमले में पहले 30 के करीब बच्चियों के मारे जाने की जानकारी सामने आई थी। बाद में ये आंकड़ा बढ़ता गया. अंतरराष्ट्रीय मीडिया द्वारा सत्यापित वीडियो में बचावकर्मियों को मलबे में तलाश करते, स्कूल बैग निकालते और दीवारों पर जलने के निशान देखा गया था।
अमेरिका-इजरायल के हमले में 165 बच्चियों की मौत
हालांकि दुनियार में चर्चा इस बात पर भी हो रही है कि आखिर अमेरिका ने किसको टारगेट किया था। अमेरिकी अखबार ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ का कहना है कि उसने ऐसे वीडियो सत्यापित किए हैं जिनमें स्कूलके पास इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) का एक नौसैनिक अड्डा और उस अड्डे पर हमले के दृश्य दिखाई देते हैं।
अमेरिका और इज़रायल ने सार्वजनिक रूप से विद्यालय को निशाना बनाने की पुष्टि नहीं की। अमेरिकी सैन्य कमान ‘सेंटकॉम’ ने कहा कि नागरिकों को हुए संभावित नुकसान की रिपोर्टों को गंभीरता से लिया जा रहा है और जांच की जा रही है।उसने कहा कि नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और अनपेक्षित क्षति को न्यूनतम करने के लिए सभी एहतियाती कदम उठाए जाते हैं।