तिरुवनंतपुरम । केरल के तिरुवनंतपुरम जिले में अट्टुकल भगवती मंदिर के प्रसिद्ध पोंगाला महोत्सव के अवसर पर सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है. यह उत्सव दुनिया में महिलाओं के सबसे बड़े धार्मिक समागमों में से एक माना जाता है. अट्टुकल भगवती मंदिर में आयोजित होने वाला यह वार्षिक पर्व वर्ष 2009 में गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ था. उस वर्ष एक ही दिन में लगभग 25 लाख महिलाओं ने अनुष्ठानों में भाग लिया था, जिसके चलते इसे एक दिन में महिलाओं के सबसे बड़े वार्षिक जमावड़े के रूप में मान्यता मिली.
महोत्सव के तहत लाखों महिलाएं शहर में एकत्र होकर मंदिर की अधिष्ठात्री देवी को ‘पोंगाला’ अर्पित करेंगी. पोंगाला चावल, गुड़ और नारियल से तैयार की जाने वाली एक पारंपरिक मीठी भेंट है, जिसे महिलाएं खुले स्थानों पर विशेष मिट्टी के बर्तनों में पकाती हैं और श्रद्धापूर्वक देवी को समर्पित करती हैं. इस विशाल आयोजन को देखते हुए शहर में यातायात और पार्किंग को लेकर विशेष प्रतिबंध लागू किए गए हैं। प्रशासन ने सुरक्षा और सुचारु व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं. हर वर्ष आयोजित होने वाला यह महोत्सव न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि महिलाओं की सामूहिक शक्ति, समर्पण और सांस्कृतिक परंपरा का भी अद्भुत उदाहरण माना जाता है.
क्या है अट्टकुल पोंगाला?
तिरुवनंतपुरम में मौजूद अट्टुकल भगवती मंदिर हर वर्ष इस समारोह का गवाह बनता है. ‘अट्टुकल पोंगाला’ 10 दिन का उत्सव है. इसे मलयाली महीने कुंभम (फरवरी-मार्च) में मनाया जाता है. इसका नौवां दिन, जो पूर्णिमा तिथि को पड़ता है, ‘पोंगाला दिवस’ के रूप में मनाया जाता है. इसी दिन लाखों महिलाएं मंदिर परिसर और आसपास की सड़कों पर इकट्ठी होती हैं और मिट्टी के बर्तनों में चावल से बनी पवित्र खीर (पोंगाला) तैयार करती हैं और देवी को अर्पित करती हैं.
स्त्री आस्था का उत्सव अट्टुकल पोंगाला की सबसे खास बात है कि यह पूरी तरह महिलाओं का उत्सव है.विभिन्न समुदायों, शैक्षिक और पेशेवर पृष्ठभूमि से आई महिलाएं एक साथ बैठकर, कतारों में चूल्हे सजाकर, सामूहिक रूप से प्रसाद बनाती हैं.इस दिन वे पारिवारिक जिम्मेदारियों से अलग रहती हैं और केवल देवी की पूजा में शामिल होती हैं. मंदिर के समीप केवल पुजारी, मंदिर प्रशासन और सुरक्षा कर्मियों को ही पुरुषों के रूप में रहने की इजाजत होती है. मंदिर की आराध्या देवी ‘अट्टुकल अम्मा’ को भद्रकाली का स्वरूप माना जाता है. लोकविश्वास है कि इस दिन देवी खुद एक साधारण श्रद्धालु के रूप में इस अनुष्ठान में शामिल होती हैं. इस भाव से भरी आस्था ही इस आयोजन को खास बनाती है. अट्टुकल पोंगाला को विश्व की सबसे बड़ी वार्षिक महिला सभा के रूप में Guinness World Records में दर्ज किया गया है. 23 फरवरी 1997 को जब लगभग 15 लाख महिलाओं ने इसमें भाग लिया, तब यह पहली बार विश्व रिकॉर्ड में शामिल हुआ. बाद में 2009 में लगभग 25 लाख महिलाओं की भागीदारी के साथ नया रिकॉर्ड बना. अट्टुकल मंदिर को ‘महिलाओं का सबरीमला’ भी कहा जाता है. इसकी तुलना केरल के प्रसिद्ध सबरीमला मंदिर से की जाती है, जहां पारंपरिक रूप से पुरुष श्रद्धालुओं का वर्चस्व रहा है.
अट्टुकल पोंगाला केरल का सबसे प्राचीन पोंगाला उत्सव माना जाता
अट्टुकल पोंगाला केरल का सबसे प्राचीन पोंगाला उत्सव माना जाता है और इसकी शुरुआत ‘अडुप्पुवेट्टु’ नाम के अनुष्ठान से होती है, जिसमें मुख्य पुजारी मंदिर के भीतर पांडरयाडुप्पु (विशेष चूल्हा) जलाते हैं.पूर्णिमा और पूरम नक्षत्र के शुभ संयोग में यह अनुष्ठान पूरा होता है. मुख्य पुजारी के संकेत पर महिलाएं अपने-अपने चूल्हों में अग्नि जलाती करती हैं और मीठा चावल पकाना शुरू करती हैं. मंदिर परिसर और आसपास की सड़कों पर सजी हजारों-लाखों छोटी-छोटी अग्निशिखाएं एक अलौकिक दृश्य प्रस्तुत करती हैं. वातावरण में घुली खीर की सुगंध और देवी स्तुति का मधुर संगीत भक्तों के मन को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देता है. ‘कप्पुकेट्टु’ समारोह के दौरान देवी की कथा ‘कन्नाकी चरितम’ का गायन किया जाता है. संध्या समय पुजारीगण आकाश से पुष्पवर्षा और पवित्र जल का छिड़काव कर अनुष्ठान का समापन करते हैं.