नई दिल्ली। फर्जी नौकरी के वादों के जरिये म्यांमार भेजे गए 27 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित भारत वापस लाया गया है। यह राहत कार्रवाई नागरिक उड्डयन मंत्री और श्रीकाकुलम सांसद राम मोहन नायडू के आग्रह के बाद तेज हुई, जिन्होंने विदेश मंत्री एस जयशंकर को पत्र लिखकर त्वरित कूटनीतिक हस्तक्षेप की मांग की थी। इनमें आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और अन्य राज्यों के नागरिक शामिल हैं।
आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के कई परिवारों के पास छोटी फोन कॉल के जरिए मिली जानकारी के अलावा और कुछ नहीं था, उन्हें बस ये पता था कि उनके बच्चे म्यांमार में कहीं बुरी तरह फंसे हुए हैं। शनिवार को ये इंतजार खत्म हुआ और उन परिवारों के बच्चे भारत वापस आ गए। म्यांमार में साइबर गुलामी का शिकार बने 27 भारतीय आखिरकार वापस घर लौट आए हैं। ये लोग म्यांमार में नरक जैसी जिंदगी जी रहे थे, इनसे जबरदस्ती उल्टे सीधे काम करवाए जाते थे।
राम मोहन नायडू ने MEA से मांगी मदद
केंद्रीय मंत्री राम मोहन नायडू को जब इस बारे में पता चला तो वो तुरंत एक्शन मोड में आ गए। उन्होंने विदेश मंत्री एय जयशंकर से मदद की अपील की। इसके बाद विदेश मंत्रालय और यांगून में मौजूद इंडियन एंबेसी ने मिलकर रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम दिया. शनिवार को 27 भारतीयों को सही सलामत भारत वापस लाया गया। घर लौटे इन लोगों की आंखें नम थीं. म्यांमार में इन्हें साइबर गुलामी के लिए मजबूर किया जाता था। दरअसल कुछ एजेंटों ने इन भारतीयों को अच्छी नौकरी और बड़ी सैलरी का झांसा देकर म्यांमार भेज दिया था, लेकिन वहां पहुंचकर उन्हें एहसास हुआ कि उनके साथ क्या हुआ है. म्यांमार में इन भारतीयों के साथ गुलामों जैसा बर्ताव किया जाता था, उनके साथ मारपीट भी होती थी।
‘भारतीयों की सुरक्षा से समझौता नहीं’
इस बारे में जैसे ही केंद्रीय मंत्री राम मोहन नायडू को पता चला तो उन्होंने रिहाई करवाने की ठान ली। कड़ी मशक्कत और सरकारी दखल के बाद 27 भारतीयों को वहां से रेस्क्यू किया गया। भारत सरकार ने ये साफ कर दिया है कि विदेशों में फंसे भारतीयों की सुरक्षा उनके लिए सर्वोपरि है। राम मोहन नायडू ने कहा कि विदेशों में रह रहे भारतीय नागरिक की सुरक्षा, गरिमा और भलाई के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता है। उन्होंने कहा कि वो दुनिया के किसी भी कोने में फंसे हो भारतीय सरकार उन्हें सुरक्षित बाहर निकाल लेगी।