नई दिल्ली। ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध में रोजाना शह-मात खेल चल रहा है। इसी कड़ी में अमेरिका ने ईरान की सरजमीं पर गिरे अपने फाइटर जेट F-15E के दूसरे पायलट को ढूंढ निकाला है। अमेरिकी स्पेशन फोर्सेज के जवानों ने इस ऑपरेशन को पूरा किया। कई दिनों से अमेरिका को उसके पायलट की तलाश थी। अमेरिका ने एक बेहद जोखिम भरा और साहसिक रेस्क्यू ऑपरेशन अंजाम देते हुए ईरान के भीतर फंसे अपने एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। यह मिशन इतना जटिल था कि खुद अमेरिकी राष्ट्रपति ने इसे देश के इतिहास के सबसे “दुर्लभ और खतरनाक” बचाव अभियानों में से एक बताया। जानकारी के मुताबिक, यह अधिकारी एक एफ-15 लड़ाकू विमान के क्रैश होने के बाद ईरान के दुर्गम पहाड़ी इलाके में फंस गया था।
कैसे शुरू हुआ ऑपरेशन?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मिशन की जानकारी दी। इस मिशन की शुरुआत लगातार निगरानी से हुई। अमेरिकी सेना के शीर्ष अधिकारी उस पायलट की लोकेशन पर 24 घंटे नजर बनाए हुए थे। सैटेलाइट, ड्रोन और अन्य टेक्नोलॉजी की मदद से हर छोटी-बड़ी गतिविधि को ट्रैक किया जा रहा था।जैसे-जैसे खतरा बढ़ता गया, सेना ने एक बेहद सटीक और समयबद्ध योजना तैयार की। सही मौके का इंतजार किया गया।
आसमान से लेकर जमीन तक ऑपरेशन
इस रेस्क्यू के लिए अमेरिका ने दर्जनों लड़ाकू विमान तैनात किए। इन विमानों का काम था पूरे इलाके में सुरक्षा घेरा बनाना, ताकि बचाव टीम बिना रुकावट के अंदर जा सके। इसके बाद विशेष बचाव दल को हेलीकॉप्टर और अन्य साधनों के जरिए उस पहाड़ी इलाके में उतारा गया। वहां पहुंचकर उन्होंने घायल अधिकारी को प्राथमिक उपचार दिया और तेजी से उसे बाहर निकाला। सबसे खास बात ये रही कि इतने खतरनाक मिशन के बावजूद कोई भी अमेरिकी सैनिक हताहत नहीं हुआ।
एक दिन पहले भी हुआ था रेस्क्यू
राष्ट्रपति ने यह भी बताया कि इससे एक दिन पहले एक और पायलट को सुरक्षित निकाला गया था। हालांकि उस समय इसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई थी, ताकि दूसरे ऑपरेशन पर कोई असर न पड़े।