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ईरान के नए सुप्रीम लीडर का ऐलान, अली खामेनेई के बेटे मोजतबा ने संभाली कमान, जाने कौन है हैं मोजतबा खामेनेई? पि

तेहरान। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद देश में नए नेतृत्व की औपचारिक घोषणा कर दी गई है। उनके बड़े बेटे मोजतबा खामेनेई को ईरान का नया सुप्रीम लीडर चुना गया है। यह फैसला ऐसे. . .

तेहरान। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद देश में नए नेतृत्व की औपचारिक घोषणा कर दी गई है। उनके बड़े बेटे मोजतबा खामेनेई को ईरान का नया सुप्रीम लीडर चुना गया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब देश गहरे शोक और राजनीतिक अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है। ईरान के सरकारी मीडिया ने पुष्टि की है कि 86 वर्षीय अली खामेनेई की अमेरिका और इजरायल के संयुक्त सैन्य हमलों में मौत हो गई। 1 मार्च 2026 की सुबह यह जानकारी सामने आई कि 28 फरवरी, शनिवार को तेहरान में हुए हवाई हमलों के दौरान उनके दफ्तर को निशाना बनाया गया। इस लक्षित कार्रवाई में खामेनेई की जान चली गई।
सरकार के अनुसार, यह हमला विशेष रूप से सरकारी ठिकानों पर केंद्रित था। खामेनेई के निधन के बाद ईरान में 40 दिन के राष्ट्रीय शोक और सात दिन की सार्वजनिक छुट्टी की घोषणा की गई है। नए सुप्रीम लीडर के रूप में मोजतबा खामेनेई के सामने देश की स्थिरता बनाए रखने और अंतरराष्ट्रीय दबावों का सामना करने की बड़ी चुनौती होगी।

कौन हैं मोजतबा खामेनेई?

मोजतबा खामेनेई, सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के दूसरे बेटे हैं। उनका जन्म 8 सितंबर 1969 को ईरान के मशहद शहर में हुआ था। उन्होंने धार्मिक शिक्षा प्राप्त की और इस्लामिक धर्मशास्त्र में गहरी पकड़ बनाई। 1999 में उन्होंने औपचारिक रूप से मौलवी बनने की पढ़ाई पूरी की। मोजतबा को एक ऐसे व्यक्ति के रूप में जाना जाता है, जो धार्मिक सोच के साथ-साथ राजनीतिक रणनीति में भी माहिर हैं।

सुप्रीम लीडर के बेहद करीबी और ताकतवर चेहरा

मोजतबा खामेनेई लंबे समय से सुप्रीम लीडर के कार्यालय में एक प्रभावशाली भूमिका निभाते रहे हैं। वह वहां एक तरह से कमांडिंग ऑफिसर की जिम्मेदारी संभालते हैं और सत्ता के केंद्र में उनकी मौजूदगी लगातार मजबूत होती गई है। ईरानी राष्ट्रपति इब्राहिम रायसी की मौत के बाद जानकारों का मानना है कि मोजतबा खामेनेई उत्तराधिकारी की दौड़ में सबसे आगे हैं।

IRGC से जुड़े रिश्तों ने बढ़ाई ताकत

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मोजतबा ने 1987 में माध्यमिक शिक्षा पूरी करने के बाद इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) में शामिल होकर सेवा दी थी। उन्होंने ईरान-इराक युद्ध के अंतिम दौर में भाग लिया। उस समय युद्ध ईरान की अर्थव्यवस्था और समाज को गहराई से प्रभावित कर चुका था और अंततः 1988 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से संघर्षविराम हुआ।

कट्टरपंथी छवि और 2009 के प्रदर्शन

21वीं सदी की शुरुआत तक मोजतबा खामेनेई ने न सिर्फ IRGC बल्कि ईरान के शीर्ष मौलवियों के साथ भी मजबूत संबंध बना लिए थे। 2009 में हुए सरकार विरोधी प्रदर्शनों को दबाने में उनकी कथित भूमिका ने उन्हें एक ‘कट्टरपंथी’ नेता की छवि दिलाई। इसी घटना के बाद वह पहली बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आए।

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