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ताजमहल का गुप्त खजाना समंदर में गोते लगाते समय मिला, यूं हुई औरंगजेब के 6.5 करोड़ के चांदी के सिक्कों की खोज

नई दिल्ली। आप समंदर में तैराकी कर रहे हों और खूब गोते लगा रहे हों, ऐसे में आपको पानी के भीतर कोई खजाना मिल जाए तो आप क्या कहेंगे…हमारे लिए ये महज कल्पना हो सकती है, मगर एक व्यक्ति और. . .

नई दिल्ली। आप समंदर में तैराकी कर रहे हों और खूब गोते लगा रहे हों, ऐसे में आपको पानी के भीतर कोई खजाना मिल जाए तो आप क्या कहेंगे…हमारे लिए ये महज कल्पना हो सकती है, मगर एक व्यक्ति और उसके साथी को समंदर में गोते लगाने के दौरान बड़ा खजाना हाथ लगा। 300 साल पहले समुद्र में गायब हो चुका यह खजाना चर्चित मुगलकालीन स्मारक ताजमहल का है। इसे मशहूर लेखक ऑर्थर सी क्लार्क ने 1963 में खोजा था। यह दुर्लभ खजाना रॉबर्ट नाम के एक व्यक्ति ने इस पर एक डॉक्यूमेंट्री बनाई है, जिसमें ताजमहल के गुप्त खजाने के बारे में बताया है।

श्रीलंका के समुद्र तट के पास मिला यह खजाना

द सन की एक रिपोर्ट के अनुसार, क्लार्क को यह मुगलकालीन चांदी के सिक्कों का यह खजाना तब मिला था, जब वह 1963 में श्रीलंका के तट से दूर समुद्र में गोते लगा रहे थे।
उन्होंने समुद्र के भीतर एक जहाज के मलबे मिले, जिसमें ये सिक्के मिले। ये सिक्के 1700 दशक की शुरुआत में ढाले गए थे। इसे मुगल बादशाह औरंगजेब ने ढलवाया था। ये सिक्के 1701 और 1702 में ढलवाए गए थे, उस वक्त औरंगजेब का शासन था।

7 लाख डॉलर के चांदी के सिक्के मिले

@ क्लार्क ने एक किताब लिखी थी-2001: ए स्पेस ओडिसी। माना जाता है कि क्लार्क को गोताखोरी के दौरान 1,000-1,000 चांदी के सिक्के मिले, जिनकी कीमत करीब 7 लाख डॉलर(करीब 6.5 करोड़ रुपये) बताई जाती है।
@माना जाता है कि कोई जहाज मसालों के रूट पर था, जब वह डूब गया। रॉबर्ट ने कहा-यह वाकई में ताजमहल का डूबा हुआ खजाना था। वह इसे नीलामी के जरिये बेचना चाहते थे।

किस बंदरगाह से कहां जा रहा था यह जहाज

@ कैनन बीच ट्रेजर की एक रिपोर्ट के अनुसार, 300 साल पहले एक भारतीय व्यापारी सूरत से अपने जहाज से मसालों के आवाजाही वाले रास्ते से पूर्व की ओर जा रहा था।
@उसने अपने साथ कई बैग लाद रखे थे, जिसमें हर एक में 1,000 चांदी के सिक्के रखे हुए थे। ये चांदी का रुपया था, जो उस वक्त मुगल काल में चलता था। ये रुपया मुगल बादशाह औरंगजेब के आदेश पर ढलवाया गया था।

इसलिए डूब गया था जहाज, कभी नहीं लौटा

रिपोर्टों के अनुसार, यह जहाज सीलोन (श्रीलंका का पुराना नाम) के एक छोटे से द्वीप पर रुका था। मगर, एक प्राकृतिक आपदा ने जहाज को डुबो दिया। यह जहाज कभी सूरत नहीं लौट पाया। औरंगजेब को कभी ये पैसे वापस नहीं मिल पाए।

ताजमहल बनाने में लग गए थे 20 साल

ताजमहल को मुगल शासक शाहजहां ने अपनी बीवी मुमताज महल की याद में बनवाया था। इसे बनाने में करीब 20 साल लगे थे। यह 1632 में बन पाया था। शाहजहां का बेटा था औरंगजेब, जिसने अपने पिता को नजरबंद कर दिया था।

मुगल काल में चलता था चांदी का रुपया

भारत में चांदी के रुपये का चलन वैसे तो अफगान शासक शेरशाह सूरी ने शुरू किया था। शेरशाह ने भारत में मुद्रा प्रणाली की स्थापना की, जिसे मुगलों के बाद अंग्रेजों ने भी अपनाया। आज भी यह भारतीय मुद्रा प्रणाली का आधार है।

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