सिलीगुड़ी। विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर बंगाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को सिलीगुड़ी के माटीगाड़ा इलाके में विश्व के सबसे भव्य शिव धामों में गिने जा रहे महाकाल मंदिर का शिलान्यास किया। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, उत्तर बंगाल को भाजपा का मजबूत गढ़ मानने की धारणा को तोड़ने और गेरुआ खेमे की ‘हिंदुत्व राजनीति’ को जवाब देने के लिए तृणमूल सुप्रीमो ने सरकारी पहल के जरिए धार्मिक भावनाओं को साधने की कोशिश की है।
हालांकि, इस पहल को सिलीगुड़ी के भाजपा विधायक शंकर घोष ने ‘छलना’ और ‘पाप-प्रायश्चित का प्रयास’ करार देते हुए तीखा हमला बोला है। माटीगाड़ा की धरती पर जहां महाकाल मंदिर का भूमि-पूजन हुआ, वहीं उत्तर बंगाल की चुनावी राजनीति भी इसी मुद्दे पर गरमा गई है।
बंगाल के मुकुट में एक और अंतरराष्ट्रीय रत्न जुड़ा
मुख्यमंत्री ने बताया कि लक्ष्मी टाउनशिप क्षेत्र में लगभग 17.41 एकड़ जमीन पर इस मेगा प्रोजेक्ट की शुरुआत की गई है। उनका दावा है कि यह परियोजना पूरी होने पर बंगाल के मुकुट में एक नया अंतरराष्ट्रीय रत्न जुड़ेगा और उत्तर बंगाल एक बड़े धार्मिक पर्यटन हब के रूप में उभरेगा—दिघा के जगन्नाथ धाम की तर्ज पर।
ममता बनर्जी ने कहा, “आज बंगाल के मुकुट में एक और अंतरराष्ट्रीय रत्न जुड़ा है। यह आने वाले दिनों में इंटरनेशनल टूरिज़्म डेस्टिनेशन बनेगा। यह विश्व के सबसे बड़े शिव मंदिरों में शामिल होगा।”
216 फुट ऊंची महाकाल प्रतिमा
परियोजना की रूपरेखा बेहद भव्य है। यहां 216 फुट ऊंची महाकाल की प्रतिमा स्थापित होगी-108 फुट के पेडेस्टल पर 108 फुट ऊंची ब्रॉन्ज प्रतिमा। मुख्यमंत्री के अनुसार, “भगवान शिव का एक स्वरूप महाकाल है-जो कालजयी हैं, समय से परे।”
सिर्फ मंदिर ही नहीं, पूरे परिसर को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। 108 फुट के पेडेस्टल ब्लॉक में दो मंज़िला महाकाल म्यूज़ियम और कल्चर हॉल होगा। परिसर में 12 अभिषेक लिंग मंदिर बनाए जाएंगे-जो भारत के द्वादश ज्योतिर्लिंगों की प्रतिकृति होंगे। वास्तु और धार्मिक परंपराओं के अनुसार चार दिशाओं में गणेश, कार्तिक, शक्ति और विष्णु के मंदिर होंगे। साथ ही श्रद्धालुओं के लिए रुद्राक्ष कुंड और अमृत कुंड भी बनाए जाएंगे।
मंदिर के संचालन और रखरखाव के लिए एक ट्रस्ट का गठन किया गया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जमीन और आधारभूत संरचना सरकार देगी, जबकि रखरखाव की जिम्मेदारी ट्रस्ट निभाएगा।
भाजपा का तीखा पलटवार
भाजपा विधायक शंकर घोष ने आरोप लगाया कि सरकारी खजाने के पैसे से मंदिर बनाना नियमों के खिलाफ है और ‘कल्चरल सेंटर’ के नाम पर घुमावदार रास्ते से यह काम किया जा रहा है। दिघा के जगन्नाथ धाम का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि सरकारी मंच पर भगवान के नाम का इस्तेमाल भी राजनीतिक उद्देश्य से हो रहा है।
एक वीडियो संदेश में उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “लोगों को ठगने के बाद अब देवताओं को ठगने की कोशिश हो रही है। महाकाल से प्रार्थना है कि 2026 में सरकार विसर्जित हो।”
राजनीतिक समीकरण
विश्लेषकों का मानना है कि लोकसभा चुनाव में उत्तर बंगाल में अपेक्षित सफलता न मिलने के बाद तृणमूल कोई जोखिम नहीं लेना चाहती। पहाड़ और समतल के संगम पर यह विशाल परियोजना—एक तरफ स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन को गति देने का दांव है, तो दूसरी तरफ भाजपा के ‘हिंदू-विरोधी’ प्रचार की धार कुंद करने की कोशिश।
हालांकि, मुख्यमंत्री ने भी स्वीकार किया है कि 2026 से पहले परियोजना का पूरा होना संभव नहीं, इसे पूरा होने में करीब ढाई साल लगेंगे। इसी पर भाजपा सवाल उठा रही है-क्या उद्घाटन का अवसर भी ममता बनर्जी को मिलेगा?
कुल मिलाकर, चुनाव से पहले उत्तर बंगाल में विकास की राजनीति से ज्यादा अब धार्मिक ध्रुवीकरण का मुद्दा केंद्र में आ गया है।