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सनातन मजाक का विषय नहीं, मिल बैठकर निकालें समाधान,शंकराचार्य-योगी विवाद पर धीरेंद्र शास्त्री ने दिया बड़ा बयान

कोटा। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर आचार्य धीरेंद्र शास्त्री ने शंकराचार्य अविमुक्तानंद सरस्वती और योगी सरकार के बीच चल रहे विवाद को लेकर बड़ा बयान दिया है। श्रीरामकथा को लेकर कोटा प्रवास के दौरान मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि. . .

कोटा। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर आचार्य धीरेंद्र शास्त्री ने शंकराचार्य अविमुक्तानंद सरस्वती और योगी सरकार के बीच चल रहे विवाद को लेकर बड़ा बयान दिया है। श्रीरामकथा को लेकर कोटा प्रवास के दौरान मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि इस विवाद में दोनों ही पक्ष अपने हैं और दोनों ही सनातनी हैं। ऐसे में किसी भी तरह से सनातन धर्म का हास-परिहास नहीं होना चाहिए।आचार्य धीरेंद्र शास्त्री ने साफ शब्दों में कहा कि सनातन कोई मजाक का विषय नहीं है।
सनातन का हंसी-मजाक बनाने से किसी का भला नहीं होगा। उन्होंने कहा कि मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन जब बात सनातन की हो तो संयम और समझदारी से काम लेना चाहिए। विवाद को बढ़ाने के बजाय बीच का रास्ता निकालना ही सबसे बेहतर विकल्प है। उन्होंने कहा कि आज के समय में सनातन विरोधी ताकतें पहले से ही सक्रिय हैं और ऐसे में आपसी मतभेद उन्हें मौका देने जैसा है।

आपसी सुलह-समझौते से समाधान निकालें

आचार्य शास्त्री ने दोनों पक्षों से अपील की कि वे मिल बैठकर बातचीत करें और आपसी सुलह-समझौते से समाधान निकालें। उन्होंने कहा कि जब दोनों ही पक्ष सनातन परंपरा से जुड़े हैं तो समाधान भी सनातन मूल्यों के अनुसार ही निकलना चाहिए। धीरेंद्र शास्त्री ने आगे कहा कि सनातन धर्म ने हमेशा संवाद और सहमति का मार्ग दिखाया है। मतभेदों को सार्वजनिक बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप के जरिए बढ़ाना उचित नहीं है। इससे समाज में भ्रम की स्थिति बनती है और सनातन की छवि को नुकसान पहुंचता है। उन्होंने कहा कि संतों और धर्माचार्यों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है, क्योंकि समाज उन्हें मार्गदर्शक के रूप में देखता है।

सनातन का हंसी-मजाक बनाने का कोई फायदा नहीं है

कोटा में प्रवास के दौरान उन्होंने यह भी कहा कि सनातन धर्म करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा हुआ है। ऐसे में किसी भी तरह का विवाद या बयान ऐसा नहीं होना चाहिए, जिससे आम सनातनी आहत महसूस करे। आचार्य शास्त्री ने जोर देकर कहा कि सनातन का हंसी-मजाक बनाने का कोई फायदा नहीं है, बल्कि इससे नुकसान ही होता है। इसलिए सभी को संयम, संवाद और सद्भाव के रास्ते पर चलना चाहिए। अंत में उन्होंने कहा कि देश और समाज की भलाई इसी में है कि सनातन से जुड़े लोग आपस में एकजुट रहें और मतभेदों को बातचीत के जरिए सुलझाएं, न कि सार्वजनिक विवाद बनाकर।

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