Home » दिल्ली » पीस बॉन्ड पर साइन नहीं करूंगी’, हाईकोर्ट से झटका लगने के बाद नेहा बोरा का ऐलान; SIR और ज्ञानेश कुमार को लेकर भी साधा निशाना

पीस बॉन्ड पर साइन नहीं करूंगी’, हाईकोर्ट से झटका लगने के बाद नेहा बोरा का ऐलान; SIR और ज्ञानेश कुमार को लेकर भी साधा निशाना

ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने पीस बॉन्ड को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद शनिवार, 24 अक्टूबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े. . .

AISA अध्यक्ष ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार पर उठाए सवाल, बोलीं- देशभर में चल रहे आंदोलन को देख रहे हैं आप

नई दिल्ली: ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने पीस बॉन्ड को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद शनिवार, 24 अक्टूबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी। नेहा बोरा ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से देश में जो घटनाक्रम चल रहा है, उसे सभी लोग देख रहे हैं। उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ जारी विरोध और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग का भी जिक्र किया। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब नेहा बोरा ने पुलिस की ओर से जारी पीस बॉन्ड नोटिस को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। अदालत ने 23 अक्टूबर को उनकी याचिका खारिज कर दी। हालांकि, कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को आगे की कार्यवाही में उन्हें आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराने और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन सुनिश्चित करने का निर्देश भी दिया।

क्या है पीस बॉन्ड का पूरा मामला?

नेहा बोरा को दिल्ली पुलिस की ओर से एक नोटिस जारी किया गया था। इसके तहत उन्हें विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) के सामने पेश होकर यह बताने को कहा गया था कि जांच के दौरान शांति बनाए रखने के लिए उनसे 10,000 रुपये का व्यक्तिगत बॉन्ड और एक जमानतदार क्यों न लिया जाए। यह नोटिस भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की संबंधित धाराओं के तहत जारी किया गया था। पुलिस की ओर से आशंका जताई गई थी कि उनके कुछ गतिविधियों से सार्वजनिक शांति भंग होने की स्थिति पैदा हो सकती है। नेहा बोरा ने इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए दलील दी थी कि नोटिस में लगाए गए आरोप अस्पष्ट और तथ्यात्मक रूप से गलत हैं। उनका पक्ष था कि शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन को रोकने के लिए निवारक कानूनी प्रावधानों का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।

हाईकोर्ट ने क्यों खारिज की नेहा बोरा की याचिका?

दिल्ली हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सुब्रमणियम प्रसाद की पीठ ने की। अदालत ने माना कि विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के पास नोटिस जारी करने के लिए पर्याप्त सामग्री मौजूद थी। कोर्ट के अनुसार, मामला केवल सुनी-सुनाई बातों पर आधारित नहीं था।अदालत ने पुलिस रिकॉर्ड, जनरल डायरी में दर्ज तीन प्रविष्टियों और संबंधित रिपोर्ट का उल्लेख किया। साथ ही, कोर्ट ने कहा कि इस स्तर पर मजिस्ट्रेट से पूरी तरह विस्तृत जांच करने की अपेक्षा नहीं की जाती, क्योंकि ऐसी कार्यवाही का उद्देश्य संभावित रूप से शांति भंग होने की स्थिति को रोकना है, न कि किसी व्यक्ति को दंडित करना। हालांकि, अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि नेहा बोरा को वह सामग्री उपलब्ध कराई जाए, जिसके आधार पर नोटिस जारी किया गया था। आगे की कार्यवाही में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करना भी जरूरी बताया गया।

‘ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांगते हुए SIR पर रोक’ की मांग का किया जिक्र

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान नेहा बोरा ने SIR के खिलाफ चल रहे आंदोलन और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों से जो आंदोलन चल रहा है, उसे लोग देख रहे हैं। SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन मतदाता सूची की विशेष गहन समीक्षा की प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया को लेकर विरोध कर रहे कुछ समूहों ने मताधिकार और मतदाता सूची से जुड़े सवाल उठाए हैं। नेहा बोरा ने इससे पहले भी SIR की प्रक्रिया पर रोक लगाने और मताधिकार से जुड़े मुद्दों को उठाया है। उनके पक्ष का कहना है कि मतदाता सूची की समीक्षा के दौरान लोगों के मतदान के अधिकार प्रभावित नहीं होने चाहिए। ये उनके और आंदोलन से जुड़े समूहों के दावे हैं; इन पर संबंधित अधिकारियों का पक्ष और आधिकारिक आंकड़े अलग से देखना जरूरी है।

‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च के दौरान हिरासत में ली गई थीं नेहा बोरा

पीस बॉन्ड विवाद की शुरुआत 16 अक्टूबर को दिल्ली में हुए ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च से जुड़ी है। नेहा बोरा इस मार्च में शामिल होने जा रही थीं, तभी उन्हें दिल्ली के मंडी हाउस इलाके में हिरासत में लिया गया था। अगले दिन उन्हें रिहा कर दिया गया। पुलिस के नोटिस में कथित नारेबाजी, प्रतिबंधात्मक आदेशों के बावजूद प्रदर्शन और कनॉट प्लेस में प्रदर्शन के लिए लोगों को उकसाने जैसे आरोपों का उल्लेख किया गया था। नेहा बोरा ने इन आरोपों को चुनौती देते हुए कहा था कि उनका कार्यक्रम शांतिपूर्ण सभा से संबंधित था और उसे दूसरे प्रदर्शन से जोड़ना सही नहीं है।

अब आगे क्या होगा?

हाईकोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद भी पीस बॉन्ड से जुड़ी कार्यवाही पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष आगे की प्रक्रिया में नेहा बोरा को नोटिस के आधार में इस्तेमाल की गई सामग्री उपलब्ध कराई जानी है और उनके पक्ष को सुनने के बाद नियमानुसार निर्णय लिया जाना है। दूसरी ओर, नेहा बोरा ने शनिवार की प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार, SIR और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग से जुड़े आंदोलन पर अपनी बात रखी। फिलहाल, इस मामले में दो पहलू अहम हैं: एक ओर पीस बॉन्ड नोटिस को लेकर चल रही कानूनी प्रक्रिया है, तो दूसरी ओर SIR और चुनावी प्रक्रिया पर उठाए जा रहे राजनीतिक तथा नागरिक अधिकारों से जुड़े सवाल। आगे की स्थिति मजिस्ट्रेट की कार्यवाही और संबंधित पक्षों के बयानों से स्पष्ट होगी।

Web Stories
 
इन लोगों को नहीं खाना चाहिए मोरिंगा शरीर में प्रोटीन की कमी को पूरा करने के लिए खाएं ये वेजेटेरियन फूड्स हल्दी का पानी पीने से दूर रहती हैं ये परेशानियां सकट चौथ व्रत पर भूल से भी न करें ये गलतियां बुध के गोचर से इन राशियों का शुरू होगा गोल्डन टाइम