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भूटान में ग्लेशियर झील फटने से बंगाल और असम में बढ़ा बाढ़ का खतरा, हाई अलर्ट जारी; गूंजे सायरन

पड़ोसी देश भूटान से एक बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आ रही है। भूटान के गासा जिले स्थित लेमथांग क्षेत्र में अति-संवेदनशील शिंताफू ग्लेशियर झील अचानक फट गई है।. . .

नई दिल्ली/कोलकाता: पड़ोसी देश भूटान से एक बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आ रही है। भूटान के गासा जिले स्थित लेमथांग क्षेत्र में अति-संवेदनशील शिंताफू ग्लेशियर झील (Shintaphu Glacial Lake) अचानक फट गई है। झील के फटने से भारी मात्रा में पानी और मलबा तेज बहाव के साथ मोफू नदी के रास्ते नीचे भारतीय सीमा की ओर बढ़ रहा है। इस transboundary (सीमा पार) आपदा के कारण पश्चिम बंगाल और असम के कई जिलों में भारी हड़कंप मच गया है, प्रशासन ने त्वरित कदम उठाते हुए हाई अलर्ट जारी कर दिया है।

74 लाख क्यूबिक मीटर पानी का बहाव और खतरे की जद में इलाके

भूटान की वाकिला पहाड़ी के नीचे स्थित शिंताफू झील को देश की सबसे खतरनाक और संवेदनशील झीलों में गिना जाता है। शुरुआती हाइड्रोलॉजिकल आकलन के अनुसार, इस झील के फटने से लगभग 7.4 मिलियन (74 लाख) क्यूबिक मीटर पानी निचले इलाकों की तरफ छोड़ा गया है। यह पानी मोफू नदी से होता हुआ भारत में प्रवेश करने वाली संकोश नदी (Sankosh River) के जलस्तर को तेजी से बढ़ा रहा है। चूंकि पहाड़ों की संकीर्ण घाटियों से पानी का बहाव बेहद तेज है, इसलिए भारत-भूटान सीमा तक पानी पहुंचने में केवल 6 से 8 घंटे का समय लगा, जिससे निचले इलाकों में तुरंत बचाव कार्य शुरू करने पड़े।

बंगाल और असम के इन जिलों में सबसे ज्यादा खतरा

प्रशासन द्वारा जारी की गई विशेष एडवाइजरी के अनुसार, बाढ़ और जलस्तर में अचानक वृद्धि का खतरा निम्नलिखित क्षेत्रों पर मंडरा रहा है:

  • पश्चिम बंगाल: अलीपुरद्वार, जलपाईगुड़ी, कूचबिहार (विशेषकर तुफानगंज और बक्सीरहाट इलाके), और दार्जिलिंग के पहाड़ी व तराई/डुआर्स क्षेत्र।
  • असम: धुबरी जिला और संकोश नदी के कैचमेंट एरिया से सटे अन्य सीमावर्ती गांव।

गांवों में गूंजे सायरन, सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील

भूटान से पानी छोड़े जाने की सूचना मिलते ही भारत-भूटान सीमा से सटे गांवों में सुरक्षा के मद्देनजर सायरन बजाए गए। नदी किनारे रहने वाले लोगों को मुनादी कराकर तुरंत सुरक्षित ठिकानों पर जाने की हिदायत दी गई।

पश्चिम बंगाल सरकार के मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों ने मोर्चा संभाल लिया है:

  • राज्य के मंत्री निशिथ प्रमाणिक और वन मंत्री व विधायक मनोज कुमार उरांव ने संकोश नदी के तटवर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों से अपील की है कि वे बिना देर किए सुरक्षित स्थानों की ओर प्रस्थान करें।
  • दार्जिलिंग से लोकसभा सांसद राजू बिष्ट ने भी एक वीडियो संदेश जारी कर डुआर्स, तराई और पहाड़ी इलाकों के नागरिकों से पूरी तरह सतर्क और सावधान रहने का आग्रह किया है।

एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमें तैनात

संभावित आपदा से निपटने के लिए आपदा प्रबंधन तंत्र को पूरी तरह मुस्तैद कर दिया गया है। पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार और कूचबिहार के संवेदनशील हिस्सों जैसे तुफानगंज और बक्सीरहाट में NDRF और SDRF की टीमों को तैनात कर दिया गया है। स्थानीय प्रशासन लगातार स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है ताकि किसी भी तरह के जान-माल के नुकसान को रोका जा सके।

हिमालयी क्षेत्रों में बढ़ रहा क्लाइमेट चेंज का खतरा

विशेषज्ञों का मानना है कि ग्लोबल वार्मिंग और तेजी से बदलते तापमान के कारण हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियर झीलों के फटने (GLOF – Glacial Lake Outburst Flood) की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। इससे पहले भी इस तरह की आपदाएं बड़े पैमाने पर तबाही मचा चुकी हैं, जिसे देखते हुए प्रशासन अब पहले से अधिक संवेदनशील और सतर्क नजर आ रहा है।

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