रेल कनेक्टिविटी, आधुनिकीकरण और यात्री सुविधाओं को नई गति देने की उम्मीद
मालीगांव/गुवाहाटी: पूर्वोत्तर भारत और उत्तर बंगाल में रेलवे विकास को नई दिशा देने की जिम्मेदारी अब वरिष्ठ रेल अधिकारी विवेक खरे को सौंपी गई है। भारतीय रेलवे यांत्रिक इंजीनियरिंग सेवा (IRSME) के 1989 बैच के अधिकारी विवेक खरे ने 1 नवंबर 2026 को पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (NFR) के नए महाप्रबंधक के रूप में पदभार ग्रहण कर लिया है। उन्होंने चेतन कुमार श्रीवास्तव का स्थान लिया है। विवेक खरे के पास रेलवे प्रशासन और तकनीकी प्रबंधन का तीन दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने अपने लंबे सेवाकाल के दौरान रेलवे के विभिन्न जोनों, उत्पादन इकाइयों और महत्वपूर्ण संस्थानों में कई जिम्मेदार पदों पर काम किया है। उनके अनुभव को देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि पूर्वोत्तर क्षेत्र में रेल नेटवर्क के विस्तार, परिचालन व्यवस्था में सुधार और यात्री सुविधाओं के आधुनिकीकरण को नई गति मिलेगी।
रेलवे में रहा है तीन दशक से ज्यादा का अनुभव
विवेक खरे भारतीय रेलवे के अनुभवी अधिकारियों में शामिल हैं। उन्होंने अपने रेल सेवा करियर की शुरुआत 3 मार्च 1991 को दक्षिण मध्य रेलवे से की थी। इसके बाद उन्होंने रेलवे के अलग-अलग विभागों और संस्थानों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। अपने सेवाकाल के दौरान उन्होंने सिकंदराबाद, विजयवाड़ा, लालागुड़ा वर्कशॉप और उत्तर रेलवे के तुगलकाबाद डीजल शेड में काम किया। इन स्थानों पर उन्हें रेलवे परिचालन, तकनीकी प्रबंधन और रखरखाव से जुड़े कार्यों का व्यापक अनुभव मिला। रेलवे के विभिन्न विभागों में काम करने के कारण उन्हें परिचालन संबंधी चुनौतियों और तकनीकी जरूरतों की गहरी समझ हासिल हुई है। यही अनुभव अब पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के प्रशासनिक नेतृत्व में उपयोगी साबित हो सकता है।
मॉडर्न कोच फैक्ट्री रायबरेली में भी निभा चुके हैं अहम जिम्मेदारी
पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे का महाप्रबंधक बनने से पहले विवेक खरे उत्तर प्रदेश के रायबरेली स्थित मॉडर्न कोच फैक्ट्री में प्रधान मुख्य यांत्रिक इंजीनियर के पद पर कार्यरत थे। मार्च 2026 में उन्होंने इस फैक्ट्री के महाप्रबंधक का अतिरिक्त प्रभार भी संभाला था। मॉडर्न कोच फैक्ट्री भारतीय रेलवे की महत्वपूर्ण उत्पादन इकाइयों में से एक है, जहां आधुनिक रेल कोचों के निर्माण से जुड़े कार्य किए जाते हैं। इससे पहले भी खरे ने रेलवे के तकनीकी और उत्पादन संबंधी कार्यों में अपनी विशेषज्ञता का उपयोग किया है। ऐसे में उनके अनुभव से पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे में तकनीकी सुधार और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
भारत और बांग्लादेश की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में भी किया काम
विवेक खरे के करियर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रेलवे से जुड़ी अंतरराष्ट्रीय बुनियादी ढांचा परियोजनाओं से भी संबंधित रहा है। वर्ष 2000 से 2005 के बीच वह RITES में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत रहे। इस दौरान उन्होंने उप महाप्रबंधक और अपर महाप्रबंधक जैसे पदों पर जिम्मेदारियां संभालीं। इस अवधि में उन्होंने भारत और बांग्लादेश में संचालित कई महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में योगदान दिया। इसके अलावा लखनऊ स्थित अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (RDSO) में निदेशक के रूप में भी सेवाएं दीं। RDSO रेलवे के तकनीकी मानकों, डिजाइन और अनुसंधान से संबंधित महत्वपूर्ण संस्थान है। यहां काम करने का उनका अनुभव रेलवे की सुरक्षा, तकनीकी गुणवत्ता और आधुनिकीकरण से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण माना जा सकता है।
10 राज्यों और 36 लोकसभा क्षेत्रों तक फैला है NFR का नेटवर्क
पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे भारतीय रेलवे के महत्वपूर्ण जोनों में से एक है। इसका परिचालन क्षेत्र भौगोलिक और सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके अंतर्गत असम, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय और सिक्किम के अलावा पश्चिम बंगाल तथा बिहार के कुछ हिस्से शामिल हैं। इसका नेटवर्क कुल 10 राज्यों और 36 लोकसभा क्षेत्रों तक फैला हुआ है। ऐसे व्यापक क्षेत्र में रेलवे का संचालन करना प्रशासनिक और परिचालन दोनों दृष्टियों से बड़ी जिम्मेदारी है। पूर्वोत्तर भारत के कई इलाके पहाड़ी और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों वाले हैं। ऐसे क्षेत्रों में रेल नेटवर्क का विस्तार करना, मौजूदा लाइनों का आधुनिकीकरण और यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना रेलवे के लिए महत्वपूर्ण कार्य हैं।
नए महाप्रबंधक के सामने होंगी ये पांच बड़ी चुनौतियां
विवेक खरे के सामने पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे की जिम्मेदारी संभालने के साथ कई महत्वपूर्ण प्राथमिकताएं होंगी।
1. रेल नेटवर्क का विस्तार: पूर्वोत्तर के दूरदराज और सीमावर्ती क्षेत्रों को बेहतर रेल कनेक्टिविटी से जोड़ना बड़ी प्राथमिकता होगी। इससे स्थानीय लोगों के साथ व्यापार और पर्यटन को भी लाभ मिल सकता है।
2. ट्रेनों का सुरक्षित परिचालन: यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और रेल दुर्घटनाओं की आशंका कम करने के लिए तकनीकी एवं परिचालन व्यवस्था को मजबूत करना महत्वपूर्ण रहेगा।
3. समयबद्ध ट्रेन संचालन: पूर्वोत्तर और उत्तर बंगाल में लंबी दूरी की ट्रेनों के समय पर परिचालन को बेहतर बनाना यात्रियों की प्रमुख अपेक्षाओं में शामिल है।
4. स्टेशनों का आधुनिकीकरण: रेलवे स्टेशनों पर बेहतर प्रतीक्षालय, स्वच्छता, पेयजल, दिव्यांगजनों के लिए सुविधाएं और आधुनिक यात्री सेवाओं का विकास जरूरी होगा।
5. तकनीकी सुधार और रखरखाव: रेलवे की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए कोच रखरखाव, तकनीकी संसाधनों और परिचालन प्रणालियों को आधुनिक बनाना भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होगी।
उत्तर बंगाल और पूर्वोत्तर की कनेक्टिविटी पर रहेंगी खास निगाहें
पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे का महत्व केवल यात्रियों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने तक सीमित नहीं है। यह क्षेत्र के आर्थिक, सामाजिक और सामरिक विकास में भी अहम भूमिका निभाता है। खासतौर पर सिलीगुड़ी और न्यू जलपाईगुड़ी जैसे महत्वपूर्ण रेल केंद्र पूर्वोत्तर भारत को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। बेहतर रेल कनेक्टिविटी से पर्यटन को बढ़ावा मिल सकता है। इसके अलावा स्थानीय व्यापार, माल ढुलाई, उद्योगों और रोजगार के अवसरों को भी फायदा पहुंच सकता है। सीमावर्ती क्षेत्रों में रेलवे नेटवर्क की मजबूती राष्ट्रीय सुरक्षा और आवश्यक वस्तुओं की आवाजाही के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। ऐसे में नए महाप्रबंधक के सामने पूरे क्षेत्र की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विकास योजनाओं को आगे बढ़ाने की चुनौती होगी।
विवेक खरे के नेतृत्व से रेलवे विकास को नई उम्मीद
विवेक खरे का पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के महाप्रबंधक के रूप में कार्यभार संभालना इस महत्वपूर्ण रेल जोन के लिए नया प्रशासनिक अध्याय है। रेलवे के तकनीकी, परिचालन और बुनियादी ढांचा संबंधी कार्यों में उनका लंबा अनुभव इस जिम्मेदारी में उपयोगी हो सकता है। अब रेल यात्रियों, व्यापारियों और पूर्वोत्तर के लोगों की निगाहें उनके कार्यकाल पर रहेंगी। खासकर उत्तर बंगाल और पूर्वोत्तर के दूरदराज इलाकों में रेल सुविधाओं के विस्तार, बेहतर ट्रेन परिचालन और आधुनिक स्टेशन सुविधाओं को लेकर उनसे काफी उम्मीदें होंगी। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विवेक खरे के नेतृत्व में पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे की विकास योजनाओं को किस तरह आगे बढ़ाया जाता है और क्षेत्र की रेल कनेक्टिविटी में कितने प्रभावी बदलाव देखने को मिलते हैं।