डेस्क। क्या आपको भी अपने रसोई गैस सिलेंडर की डिलीवरी के लिए सामान्य से ज्यादा इंतजार करना पड़ रहा है? या फिर जब आपने इस बार रेट चेक किया, तो बढ़ी हुई कीमतों ने आपके पसीने छुड़ा दिए? अगर हां, तो इसकी वजह आपके शहर की गैस एजेंसी नहीं, बल्कि सात समंदर पार मिडिल ईस्ट के समंदर में छिड़ी जंग है. ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी इस तनाव ने दुनिया की एनर्जी लाइफलाइन को हिला कर रख दिया है, जिसका सीधा असर अब आपकी जेब और आपकी रसोई के बजट पर पड़ रहा है। एक तरफ कीमतों में 144 रुपये तक की भारी बढ़ोतरी हुई है, तो दूसरी तरफ डिलीवरी के लिए नए नियम लागू हो गए है। लेकिन घबराइए नहीं! इस संकट के बीच भारत सरकार ने एक बड़ा मास्टर प्लान भी तैयार किया है।
आइए, हम डिकोड करते हैं कि आखिर देश में गैस की ये किल्लत क्यों हुई है, आपके शहर में सिलेंडर का लेटेस्ट रेट क्या है और सरकार आपको इस महंगाई से बचाने के लिए क्या कदम उठा रही है।
जेब पर बढ़ा बोझ: कितने बढ़े दाम?
अभी कुछ दिनों पहले ही सरकार ने घरेलू और कमर्शियल, दोनों सिलेंडरों के दाम बढ़ा दिए हैं। घरेलू सिलेंडर यानी 14.2 kg वाले गैस सिलेंडर के दाम में 60 रुपये और कमर्शियल सिलेंडर यानी 19 kg वाले सिलेंडर के दाम में 144 रुपये की भारी बढ़ोतरी की गई है। घरेलू सिलेंडर अब दिल्ली में 913 रुपये का, मुंबई में 912.50 रुपये, कोलकाता में 939 रुपये और चेन्नई में 928.50 रुपये का मिल रहा है। पटना में रसोई गैस 1000 रुपये से ज्यादा कीमत पर मिल रही है। सरकार की ओर से जतन किए जाने के बावजूद मार्केट में बिना बुकिंंग वाले रसोई गैस सिलेंडर 1200 से 1500 रुपये के बीच मिल रहे हैं।
बढ़ती कीमतों ने बढ़ाई चिंता
हाल ही में घरेलू और कमर्शियल दोनों तरह के एलपीजी सिलेंडरों के दाम बढ़ाए गए हैं। 14.2 किलो वाले घरेलू सिलेंडर की कीमत में करीब 60 रुपये की बढ़ोतरी हुई है, जबकि 19 किलो के कमर्शियल सिलेंडर की कीमत लगभग 144 रुपये बढ़ गई है। इस बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में घरेलू गैस सिलेंडर लगभग 913 रुपये का हो गया है। मुंबई में इसकी कीमत करीब 912.50 रुपये, कोलकाता में करीब 939 रुपये और चेन्नई में करीब 928.50 रुपये तक पहुंच गई है। वहीं कुछ शहरों, खासकर पटना जैसे इलाकों में इसकी कीमत 1000 रुपये से भी ज्यादा बताई जा रही है। सप्लाई में देरी और मांग ज्यादा होने की वजह से कई जगह बिना बुकिंग वाले सिलेंडर ब्लैक मार्केट में 1200 से 1500 रुपये तक में बिकते नजर आ रहे हैं।

आखिर क्यों आई गैस की कमी
भारत अपनी जरूरत की बड़ी मात्रा में गैस विदेशों से मंगाता है। अनुमान है कि देश की लगभग 60 प्रतिशत एलपीजी सप्लाई आयात पर निर्भर करती है। मिडिल ईस्ट में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़े सैन्य तनाव ने समुद्री व्यापार को प्रभावित किया है। खासतौर पर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों पर असर पड़ा है। यह वही मार्ग है जहां से खाड़ी देशों से बड़ी मात्रा में ऊर्जा संसाधन दुनिया भर में भेजे जाते हैं। जब इस रास्ते पर खतरा बढ़ता है या जहाजों की आवाजाही धीमी होती है, तो सप्लाई प्रभावित होने लगती है। कई जहाजों को लंबा रास्ता लेकर आना पड़ रहा है, जिससे डिलीवरी में देरी हो रही है। इसी दौरान घरेलू खपत भी बढ़ गई है, जिससे बाजार में दबाव और बढ़ गया है।