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अरुणाचल प्रदेश में भारत-चीन सीमा पर बढ़ा तनाव, कई जगह आमने-सामने सैनिक; ITBP ने तेज की कमांडो और ड्रोन यूनिट की तैयारी

भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर एक बार फिर तनाव की स्थिति सामने आई है। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर ने बताया कि अरुणाचल प्रदेश में कई स्थानों पर चीनी सेना के. . .

अरुणाचल सीमा पर चीन की गतिविधियों से बढ़ी सतर्कता

नई दिल्ली । भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर एक बार फिर तनाव की स्थिति सामने आई है। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर ने बताया कि अरुणाचल प्रदेश में कई स्थानों पर चीनी सेना के जवानों के साथ आमने-सामने की स्थिति बनी हुई है। इनमें से कुछ स्थानों पर स्थिति अभी भी जारी है। 22 अक्टूबर को ITBP के 65वें स्थापना दिवस से पहले आयोजित एक सम्मान समारोह में जवानों को संबोधित करते हुए कपूर ने यह जानकारी दी। उन्होंने चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के सैनिकों के साथ ऐसी परिस्थितियों में प्रभावी ढंग से मुकाबला करने के लिए ITBP की नई कॉम्बैट टीम ‘शौर्य कमांडो’ के जवानों की सराहना की।

हर बटालियन में कमांडो टीम बनाने की तैयारी

ITBP प्रमुख ने बताया कि बल अपनी विशेष अभियान क्षमता को मजबूत करने के लिए लगातार काम कर रहा है। वर्तमान में ITBP की प्रत्येक बटालियन में एक कमांडो टीम तैयार की जा चुकी है, जबकि दो और टीमें गठित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि ITBP का लक्ष्य हर बटालियन में एक पूर्ण कमांडो कंपनी तैयार करना है। इसके साथ ही, केवल कमांडो ऑपरेशंस के लिए एक अलग बटालियन बनाने की योजना पर भी काम चल रहा है। इसके लिए बल का ऑपरेशंस विंग रूपरेखा तैयार कर रहा है।कपूर के मुताबिक, ये विशेष कमांडो यूनिट्स भविष्य में ITBP की प्रमुख ताकत बनेंगी और सीमा पर चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों से निपटने में अहम भूमिका निभाएंगी।

ड्रोन और एंटी-ड्रोन तकनीक पर ITBP का विशेष जोर

बदलते युद्ध के तरीकों का जिक्र करते हुए ITBP महानिदेशक ने कहा कि ड्रोन तकनीक ने पारंपरिक युद्ध की रणनीतियों को काफी हद तक बदल दिया है। इसके चलते सुरक्षा बलों के काम करने के तरीके और उनकी परिचालन जरूरतों में भी बदलाव आ रहा है। ITBP अब हर प्लाटून में ड्रोन यूनिट स्थापित करने की योजना बना रही है। इसके अलावा, बल अपने स्तर पर ड्रोन का उत्पादन बढ़ाने और ड्रोन पायलटों को प्रशिक्षित करने पर भी ध्यान दे रहा है। कपूर ने यह भी संकेत दिया कि जल्द ही एक अलग ‘स्ट्राइक कॉर्प्स’ तैयार करने की दिशा में काम आगे बढ़ सकता है। आधुनिक युद्ध में ड्रोन और अन्य तकनीकों की बढ़ती भूमिका को देखते हुए इन क्षमताओं को मजबूत करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

चीन की सैन्य ताकत के मुकाबले ड्रोन बन सकते हैं ‘गेम चेंजर’

ITBP प्रमुख ने चीन द्वारा अपनी सेना और सैन्य मीडिया क्षमताओं को मजबूत करने के लिए किए गए निवेश का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि चीन ने पारंपरिक युद्ध के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। हालांकि, उनके अनुसार, ड्रोन जैसी आधुनिक तकनीक सैन्य क्षमता में अंतर को कम करने में मदद कर सकती है। ये तकनीकें छोटे देशों को भी अधिक शक्तिशाली विरोधियों के खिलाफ प्रभावी रणनीति अपनाने का अवसर देती हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध का उदाहरण देते हुए कपूर ने बताया कि पिछले चार वर्षों के संघर्ष ने युद्ध के बदलते स्वरूप को स्पष्ट किया है। यूक्रेन द्वारा रूस को पहुंचाए गए नुकसान से यह समझा जा सकता है कि आधुनिक युद्ध में ड्रोन और तकनीकी नवाचार कितने महत्वपूर्ण हो गए हैं। उन्होंने ईरान का भी बदलते युद्ध परिदृश्य के एक उदाहरण के रूप में उल्लेख किया।

2030 तक आधुनिकीकरण पर बढ़ेगा निवेश, ड्रोन के लिए 1,000 करोड़ रुपये की योजना

ITBP के आधुनिकीकरण की योजनाओं पर बात करते हुए कपूर ने कहा कि बल को वर्ष 2030 तक अधिक वित्तीय संसाधन मिलने की उम्मीद है। प्रस्तावित योजनाओं के तहत लगभग 1,000 करोड़ रुपये ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम के लिए निर्धारित करने की योजना है। आधुनिकीकरण के तहत केवल हवाई निगरानी और ड्रोन तकनीक ही नहीं, बल्कि जवानों की आवाजाही और परिचालन क्षमता को भी बेहतर बनाया जाएगा। इसमें निम्नलिखित उपकरणों पर ध्यान दिया जाएगा:

  • हर तरह के इलाके में चलने वाले वाहन।
  • ऑटोनॉमस ग्राउंड व्हीकल यानी स्वचालित जमीनी वाहन।
  • क्विक रिएक्शन व्हीकल यानी तेजी से प्रतिक्रिया देने वाले वाहन।
  • आधुनिक ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम।
  • बेहतर गोला-बारूद और अन्य आधुनिक सैन्य उपकरण।

इन कदमों का उद्देश्य दुर्गम सीमावर्ती क्षेत्रों में ITBP की निगरानी, त्वरित प्रतिक्रिया और परिचालन क्षमता को मजबूत करना है।

LAC पर भारत-चीन के बीच अलग-अलग दावों से पैदा होती है टकराव की स्थिति

भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) की स्थिति को लेकर दोनों देशों की समझ अलग-अलग है। इसी अंतर के कारण सीमावर्ती इलाकों में कई बार सैनिक आमने-सामने आ जाते हैं और विवाद की स्थिति पैदा होती है। रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय और चीनी सेनाओं के बीच सितंबर में पहली बार कोर कमांडर स्तर की बैठक हुई थी। सूत्रों के मुताबिक, हाल ही में जिन इलाकों में नए मुद्दे सामने आए हैं, वहां चीनी सैनिकों के व्यवहार को लेकर भारतीय सेना ने कड़ा रुख अपनाया है। अब तक LAC से जुड़े विवादों को सुलझाने के लिए भारत और चीन लद्दाख सेक्टर के चुशुल-मोल्डो बॉर्डर मीटिंग पॉइंट पर कोर कमांडर स्तर की बैठकें करते रहे हैं।

सीमा पर सतर्कता के साथ आधुनिक सैन्य क्षमता बढ़ाने पर जोर

अरुणाचल प्रदेश में आमने-सामने की स्थिति और ITBP की नई सैन्य तैयारियां यह दर्शाती हैं कि भारत सीमावर्ती क्षेत्रों में सतर्कता बनाए रखने के साथ-साथ अपनी परिचालन क्षमताओं को आधुनिक बनाने पर भी जोर दे रहा है। कमांडो यूनिट्स का विस्तार, ड्रोन नेटवर्क का विकास, एंटी-ड्रोन तकनीक में निवेश और आधुनिक वाहनों की तैनाती भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने की रणनीति का हिस्सा हैं। हालांकि, सीमा पर मौजूदा स्थिति के बारे में अंतिम निष्कर्ष निकालने के लिए संबंधित सुरक्षा एजेंसियों की आधिकारिक जानकारी महत्वपूर्ण होगी।

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