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भारत-अजरबैजान की बढ़ती नजदीकी से भड़के पाकिस्तानी, जयशंकर की मुलाकात पर तीखी प्रतिक्रिया; JF-17 को लेकर दी चेतावनी

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अजरबैजान ने पाकिस्तान का समर्थन किया था। हालांकि, अब करीब डेढ़ साल बाद भारत और अजरबैजान अपने रिश्तों को नए सिरे से बेहतर बनाने की कोशिश कर रहे हैं।. . .

भारत और अजरबैजान के रिश्तों में सुधार की कोशिश

बाकू: ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अजरबैजान ने पाकिस्तान का समर्थन किया था। हालांकि, अब करीब डेढ़ साल बाद भारत और अजरबैजान अपने रिश्तों को नए सिरे से बेहतर बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इसी दिशा में पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव की शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान दुशांबे में मुलाकात हुई थी। इसके बाद भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अजरबैजान की राजधानी बाकू का दौरा किया। इस दौरान राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव ने जयशंकर से मुलाकात की। दोनों पक्षों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और शीर्ष नेताओं के संभावित दौरों को लेकर चर्चा हुई। शुक्रवार को एक दिवसीय दौरे पर बाकू पहुंचे जयशंकर ने अजरबैजान के विदेश मंत्री जेहुन बायरामोव के साथ अपनी बातचीत को ‘बहुत सार्थक’ बताया। उन्होंने कहा कि इस चर्चा से दोनों देशों के संबंधों को बेहतर बनाने के लिए आगे की दिशा तय करने में मदद मिली है। हालांकि, भारत और अजरबैजान के बीच बढ़ती बातचीत से पाकिस्तान में कुछ विशेषज्ञ नाराज नजर आए। सोशल मीडिया पर इस मुलाकात को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं।

भारत से नजदीकी पर पाकिस्तानी विशेषज्ञ ने उठाए सवाल

पाकिस्तानी विशेषज्ञ अहमत खान ने भारत और अजरबैजान के बीच बढ़ते संपर्क पर नाराजगी जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि अजरबैजान ने अपनी विदेश नीति में बड़ा बदलाव किया है और अब वह ऐसे देशों को आमंत्रित कर रहा है, जिन्हें पाकिस्तान और उसके सहयोगी अपना विरोधी मानते हैं। उन्होंने तुर्की का जिक्र करते हुए कहा कि उसने हिजाब प्रतिबंध के मुद्दे पर अजरबैजान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं किया, फिर भी अजरबैजान का रुख सवाल खड़े करता है। उन्होंने अजरबैजान से पूछा कि वह अपनी विदेश नीति को किस दिशा में ले जा रहा है, ताकि पाकिस्तान भी उसी के अनुसार अपने कदम तय कर सके। अहमत खान ने अजरबैजान के इजरायल के साथ संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि मुश्किल समय में अजरबैजान के साथ तुर्की और पाकिस्तान के अलावा कोई अन्य देश खड़ा नहीं हुआ था। साथ ही उन्होंने अजरबैजान को अपने अंतरराष्ट्रीय साझेदारों पर जरूरत से ज्यादा भरोसा न करने की सलाह दी।

JF-17 लड़ाकू विमान को लेकर पाकिस्तान को चेतावनी

अहमत खान ने अपनी प्रतिक्रिया में पाकिस्तान के JF-17 लड़ाकू विमान का भी जिक्र किया। उन्होंने आशंका जताई कि अजरबैजान के साथ बढ़ते संपर्क के कारण इस विमान से जुड़ी संवेदनशील जानकारी इजरायल तक पहुंच सकती है। उनकी इस टिप्पणी से साफ है कि भारत और अजरबैजान के बीच कूटनीतिक बातचीत को पाकिस्तान के कुछ विश्लेषक अपने सामरिक हितों के नजरिए से देख रहे हैं। हालांकि, विमान से संबंधित जानकारी साझा किए जाने का उनका दावा एक आशंका है, न कि लेख में प्रस्तुत कोई पुष्ट घटना।

पाकिस्तानी मूल के पत्रकार ने भी जताई नाराजगी

अमेरिका में रहने वाले पाकिस्तानी मूल के पत्रकार डॉ. अहमद शाहिदोव ने भी जयशंकर और अजरबैजान के विदेश मंत्री जेहुन बायरामोव की मुलाकात पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि अजरबैजान के विदेश मंत्री ने बाकू में भारत के विदेश मंत्री डॉ. सुब्रह्मण्यम जयशंकर से मुलाकात की। इसके साथ ही उन्होंने पाकिस्तान के समर्थन में लिखा, “पाकिस्तान हमारा भाई है! कश्मीर पाकिस्तान है!” इस प्रतिक्रिया से पता चलता है कि भारत और अजरबैजान के बीच संबंधों को लेकर पाकिस्तान समर्थक कुछ आवाजें असहज हैं।

तुर्की और अजरबैजान के रिश्तों में भी तनाव की चर्चा

भारत-अजरबैजान संबंधों में संभावित सुधार के बीच तुर्की और अजरबैजान के बीच भी कुछ मुद्दों पर मतभेद की चर्चा हो रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, स्कूली छात्राओं के हिजाब पर प्रतिबंध को लेकर तुर्की की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं। इसी घटनाक्रम को अजरबैजान की विदेश नीति और उसके क्षेत्रीय संबंधों के संदर्भ में देखा जा रहा है। हालांकि, इन मुद्दों के कारण दोनों देशों के संबंधों में कितना बदलाव आया है, यह स्पष्ट नहीं है।

नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर पर भारत-अजरबैजान की चर्चा

जयशंकर की यात्रा के दौरान केवल राजनीतिक संबंध ही नहीं, बल्कि क्षेत्रीय संपर्क और व्यापार के मुद्दे भी चर्चा में रहे। दोनों देशों ने इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) के महत्व पर जोर दिया। यह बहु-माध्यम परिवहन परियोजना भारत को ईरान, रूस और मध्य एशिया सहित अन्य क्षेत्रों से जोड़ने के उद्देश्य से विकसित की जा रही है। इसके जरिए माल की ढुलाई को अधिक सुविधाजनक बनाने और व्यापारिक संपर्क बढ़ाने की संभावना है। जयशंकर ने कहा कि भारत और अजरबैजान दोनों इस कॉरिडोर से जुड़े हुए हैं और यह उनके लिए काफी महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि दोनों पक्षों ने इस परियोजना के संबंध में अधिक करीबी तालमेल स्थापित करने पर सहमति जताई है। वहीं, अजरबैजान के विदेश मंत्री जेहुन बायरामोव ने कहा कि उन्हें भारत के विदेश मंत्री का स्वागत करके खुशी हुई। उन्होंने दोनों देशों के संबंधों की मौजूदा स्थिति और भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा किए जाने का भी उल्लेख किया।

क्या भारत-अजरबैजान के रिश्तों में आएगा नया मोड़?

जयशंकर की बाकू यात्रा भारत और अजरबैजान के बीच संवाद को दोबारा मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है। दोनों देशों के बीच परिवहन, व्यापार और उच्चस्तरीय संपर्क जैसे मुद्दों पर सहयोग की संभावनाएं मौजूद हैं।दूसरी ओर, पाकिस्तान के कुछ विशेषज्ञ इस नजदीकी को लेकर चिंतित दिखाई दे रहे हैं। खासकर JF-17 लड़ाकू विमान से जुड़ी जानकारी को लेकर जताई गई आशंकाएं बताती हैं कि इस कूटनीतिक घटनाक्रम को क्षेत्रीय सुरक्षा के नजरिए से भी देखा जा रहा है। फिलहाल, भारत और अजरबैजान के बीच बातचीत आगे किस दिशा में बढ़ती है और क्या इससे दोनों देशों के संबंधों में ठोस सुधार आता है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।

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