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मकर संक्रांति पर गंगा स्नान के लिए उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब, लगा रहे आस्था की डुबकी

डेस्क। मकर संक्रांति के अवसर पर कोलकाता और हावड़ा सहित गंगा तटवर्ती इलाकों में बुधवार सुबह से ही श्रद्धालुओं का भारी जमावड़ा देखने को मिला। गंगा स्नान के लिए लोगों का उत्साह सुबह से दोपहर तक बना रहा। बड़ी संख्या. . .

डेस्क। मकर संक्रांति के अवसर पर कोलकाता और हावड़ा सहित गंगा तटवर्ती इलाकों में बुधवार सुबह से ही श्रद्धालुओं का भारी जमावड़ा देखने को मिला। गंगा स्नान के लिए लोगों का उत्साह सुबह से दोपहर तक बना रहा। बड़ी संख्या में श्रद्धालु पुण्य स्नान और पूजा-अर्चना के लिए घाटों पर पहुंचे। मकर संक्रांति स्नान पर्व को आज मानते हुए भारी जनसमूह ने आस्था की डुबकी।

शुभ मुहूर्त

हालांकि इस वर्ष मकर संक्रांति का शुभ मुहूर्त रात आठ बजे के बाद प्रारंभ होकर अगले दिन मंगलवार दोपहर 12 बजे तक रहेगा, लेकिन परंपरा के अनुसार 14 जनवरी को ही पर्व मनाए जाने के कारण श्रद्धालुओं ने सोमवार को गंगा स्नान किया। हावड़ा, हुगली, कोलकाता और उत्तर 24 परगना के अलावा नदिया समेत अन्य जिलों से भी लोग गंगा के दोनों तटों पर पहुंचे।

घाटों पर बड़ी संख्या में लोग मौजूद

घाटों पर महिलाओं, पुरुषों, युवाओं और बुजुर्गों की बड़ी संख्या मौजूद रही। श्रद्धालुओं ने गंगा में डुबकी लगाकर पूजा-अर्चना की। इस दौरान घाटों पर बड़ी संख्या में पुरोहित भी मौजूद थे, जिन्होंने वैदिक रीति-रिवाज के अनुसार पूजा और क्रियाकर्म संपन्न कराया।

मकर संक्रांति के दिन पुण्य स्नान

पुरोहित भीम बनर्जी ने बताया कि परंपरा के अनुसार 15 दिसंबर से 14 जनवरी तक का समय ‘खरमास’ माना जाता है, जिसे पितृपक्ष का ही एक हिस्सा माना जाता है। इस अवधि में शुभ कार्य नहीं किए जाते। मकर संक्रांति के दिन पुण्य स्नान के साथ यह अवधि समाप्त हो जाती है और इसके बाद शुभ कार्यों की शुरुआत की जाती है। इसी कारण इस दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व है।

गंगासागर में स्नान का अपना अलग धार्मिक महत्व

उन्होंने बताया कि गंगासागर में स्नान का अपना अलग धार्मिक महत्व है, लेकिन मान्यता है कि राजा सगर के 60 हजार पुत्रों को जिस गंगा से मुक्ति मिली, उस गंगा में कहीं भी स्नान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। इसी आस्था के चलते सोमवार को गंगा तटवर्ती शहरों और गांवों से हजारों श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए पहुंचे।

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