Home » देश » भारत-चीन सीमा पर फिर बढ़ा तनाव! अरुणाचल में कई जगह सैनिक आमने-सामने, कांग्रेस ने मोदी सरकार से पूछे तीखे सवाल

भारत-चीन सीमा पर फिर बढ़ा तनाव! अरुणाचल में कई जगह सैनिक आमने-सामने, कांग्रेस ने मोदी सरकार से पूछे तीखे सवाल

भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव एक बार फिर चर्चा में है। अरुणाचल प्रदेश में भारतीय और चीनी सैनिकों के कई स्थानों पर आमने-सामने आने की खबरों के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं।. . .

एलएसी पर जारी टकराव को लेकर सियासी घमासान तेज; खड़गे ने पूछा—क्या मई 2020 से पहले वाले पेट्रोलिंग अधिकार बहाल हुए? विदेश मंत्रालय ने भी दी स्थिति पर सफाई

नई दिल्ली: भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव एक बार फिर चर्चा में है। अरुणाचल प्रदेश में भारतीय और चीनी सैनिकों के कई स्थानों पर आमने-सामने आने की खबरों के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर के बयान के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीमा पर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने और चीन नीति पर जवाब देने की मांग की है। खड़गे ने इन घटनाओं को बेहद चिंताजनक बताते हुए सवाल किया कि क्या सीमा पर एक और गंभीर टकराव की आशंका है? वहीं, विदेश मंत्रालय ने कहा है कि सीमा पर कभी-कभी स्थिति तब बिगड़ती है, जब चीनी सैनिक निर्धारित गश्त प्रक्रियाओं से हटते हैं। दोनों देश मौजूदा राजनयिक और सैन्य तंत्रों के जरिए लंबित मुद्दों को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं।

अरुणाचल प्रदेश में फिर आमने-सामने भारतीय और चीनी सैनिक

राजस्थान के अलवर में ITBP कर्मियों के वार्षिक सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में अरुणाचल प्रदेश के कई स्थानों पर सैनिकों के बीच आमना-सामना हुआ है और ऐसी स्थिति अभी भी बनी हुई है। हालांकि, उनके बयान में चीन का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया गया। इस बयान के बाद सीमा पर हालात को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई। कांग्रेस ने केंद्र सरकार से पूछा कि यदि सीमा पर लगातार ऐसी घटनाएं हो रही हैं, तो देश को इसकी पूरी जानकारी क्यों नहीं दी जा रही है। पार्टी ने यह भी सवाल उठाया कि क्या भारतीय सैनिकों की गश्त करने की पहुंच पर कोई असर पड़ा है और क्या सीमा पर स्थिति सामान्य होने के दावों के बावजूद जमीनी हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं।

खड़गे का मोदी सरकार पर हमला: ‘देश को अंधेरे में क्यों रखा जा रहा है?’

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश में सैनिकों के बीच जारी टकराव की ITBP प्रमुख द्वारा पुष्टि किया जाना गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने डोकलाम और गलवान की घटनाओं का जिक्र करते हुए पूछा कि क्या भारत एक बार फिर किसी बड़े सीमा विवाद की ओर बढ़ रहा है। खड़गे के मुताबिक, अगस्त में तक्सिंग के पास चीनी घुसपैठ की खबरें सामने आई थीं। इसके बाद भी सीमा पर टकराव की स्थिति बने रहना कई सवाल खड़े करता है। खड़गे ने वाचा-दमाई बॉर्डर मीटिंग प्वाइंट पर 6 सितंबर को हुई कोर कमांडर स्तर की बातचीत का हवाला देते हुए कहा कि बैठक के 47 दिन बाद भी स्थिति को लेकर सवाल बने हुए हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से पूछा कि क्या मई 2020 से पहले भारतीय सेना को हासिल पेट्रोलिंग अधिकार पूरी तरह बहाल हो चुके हैं? उनका कहना है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न अंग है और सीमा पर वास्तविक स्थिति को लेकर पारदर्शिता जरूरी है।

चीन से बढ़ते आयात और व्यापार घाटे पर भी कांग्रेस ने घेरा

सीमा विवाद के साथ-साथ कांग्रेस ने चीन के साथ भारत के आर्थिक संबंधों को लेकर भी मोदी सरकार पर सवाल उठाए हैं। खड़गे ने दावा किया कि गलवान में भारतीय सेना के 20 जवानों की शहादत के बाद से चीन से होने वाले आयात में 102 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा बढ़कर 112.16 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि एक ओर सरकार चीन पर निर्भरता कम करने और ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर चीनी आयात और निवेश को लेकर नीतिगत सवाल बने हुए हैं। उन्होंने चीनी निवेश पर लगाए गए प्रतिबंधों में ढील देने और चीन से जुड़ी पात्र कंपनियों को उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना का लाभ देने पर विचार किए जाने को लेकर भी सवाल उठाए। खड़गे ने पूछा कि क्या सरकार की आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया की नीति का उद्देश्य पूरा हो रहा है, या देश की आर्थिक निर्भरता अब भी चीन पर बनी हुई है?

मोदी-शी जिनपिंग की मुलाकातों पर सवाल: बातचीत का नतीजा क्या निकला?

कांग्रेस ने भारत और चीन के बीच हुई उच्चस्तरीय बैठकों और राजनयिक वार्ताओं के परिणामों पर भी सवाल खड़े किए। खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई मुलाकातों, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से जुड़े विशेष प्रतिनिधि स्तर के संवाद, सैन्य बैठकों और BRICS तथा SCO जैसे मंचों पर हुई बातचीत का उल्लेख किया। उन्होंने सवाल किया कि इतने लंबे राजनयिक प्रयासों के बावजूद सीमा पर स्थायी शांति सुनिश्चित क्यों नहीं हो पाई है? कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि भारतीय सशस्त्र बलों पर उन्हें पूरा भरोसा है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में सरकार की जवाबदेही भी जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि केवल बैठकों और राजनयिक तस्वीरों से सीमा विवाद का समाधान नहीं निकलेगा।

विदेश मंत्रालय का जवाब: सीमा पर स्थिति कभी-कभी बिगड़ती है

सीमा पर तनाव को लेकर उठे सवालों के बीच विदेश मंत्रालय ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। मंत्रालय के अनुसार, भारत-चीन सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थिति समय-समय पर तब बिगड़ जाती है, जब चीनी सैनिक निर्धारित गश्त प्रक्रियाओं से हट जाते हैं। मंत्रालय ने कहा कि दोनों देश वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) से जुड़े लंबित मुद्दों को सुलझाने और गलतफहमी या गलत आकलन से बचने के लिए मौजूदा राजनयिक तथा सैन्य तंत्रों का इस्तेमाल कर रहे हैं। विदेश मंत्रालय ने यह भी बताया कि दोनों पक्ष कुछ संवेदनशील क्षेत्रों में LAC को लेकर आपसी समझ बेहतर बनाने और सीमा प्रबंधन को मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा करने के लिए सहमत हुए हैं। हालांकि, इन बयानों के बाद भी सीमा पर सैनिकों के आमने-सामने आने की घटनाओं और गश्त से जुड़े सवालों को लेकर राजनीतिक बहस जारी है।

ITBP का आधुनिकीकरण: ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम पर बड़ा जोर

ITBP महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने सीमा सुरक्षा की चुनौतियों से निपटने के लिए बल के आधुनिकीकरण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि बदलते युद्ध के तरीकों को देखते हुए केवल पारंपरिक सैन्य रणनीतियों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। कपूर के मुताबिक, ड्रोन और एंटी-ड्रोन तकनीक आधुनिक युद्ध का अहम हिस्सा बन चुकी हैं। रूस-यूक्रेन संघर्ष सहित हाल के युद्धों से यह स्पष्ट हुआ है कि कम लागत वाली आधुनिक तकनीक भी बड़ी सैन्य ताकतों के सामने चुनौती खड़ी कर सकती है। उन्होंने बताया कि ITBP ने ड्रोन प्लाटून तैयार करने की दिशा में कदम उठाए हैं। साथ ही, गलवान जैसी परिस्थितियों से बेहतर तरीके से निपटने के लिए नया स्ट्राइक कोर्स तैयार किया गया है। सीमा पर भूमिगत बुनियादी ढांचे को विकसित करने और हथियारों, वाहनों तथा सीमा चौकियों के आधुनिकीकरण पर भी काम किया जा रहा है।

400 करोड़ रुपये के बजट से बढ़ेगी ITBP की तकनीकी क्षमता

ITBP प्रमुख ने बताया कि लगभग 95,000 जवानों वाले इस बल को सरकार से 400 करोड़ रुपये मिले हैं। उनके अनुसार, इस राशि का 70 प्रतिशत हिस्सा ड्रोन युद्ध क्षमताओं को मजबूत करने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि चीन के साथ लगी सीमा भारत की सबसे कठिन सीमाओं में से एक है। ऐसे में जवानों को आधुनिक तकनीक, बेहतर उपकरणों और नई रणनीतियों से लैस करना बेहद जरूरी है। कपूर ने यह भी कहा कि ड्रोन जहां सुरक्षा बलों के लिए चुनौती हैं, वहीं निगरानी, रणनीतिक तैयारी और जवाबी कार्रवाई की क्षमता बढ़ाने का अवसर भी प्रदान करते हैं।

गलवान की घटना अब भी भारत-चीन संबंधों का बड़ा मुद्दा

जून 2020 में पूर्वी लद्दाख के गलवान घाटी क्षेत्र में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। इस घटना में भारत के 20 सैनिक शहीद हुए थे। चीन ने बाद में अपने चार सैनिकों की मौत स्वीकार की थी, हालांकि विभिन्न रिपोर्टों में चीनी पक्ष को हुए नुकसान के बारे में अलग-अलग दावे किए गए। गलवान की घटना के बाद दोनों देशों के बीच सीमा पर तनाव कम करने के लिए कई दौर की सैन्य और राजनयिक बातचीत हुई। इसके बावजूद LAC पर गश्त, सीमा प्रबंधन और सैनिकों की तैनाती जैसे मुद्दे दोनों देशों के संबंधों में महत्वपूर्ण बने हुए हैं।

अब सबसे बड़ा सवाल: सीमा पर वास्तविक स्थिति क्या है?

ITBP प्रमुख के बयान, कांग्रेस के आरोप और विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया के बाद भारत-चीन सीमा को लेकर कई अहम सवाल फिर सामने आए हैं। क्या अरुणाचल प्रदेश में सैनिकों के बीच आमने-सामने आने की घटनाएं किसी बड़े तनाव का संकेत हैं? क्या भारतीय सैनिकों के पेट्रोलिंग अधिकार पूरी तरह बहाल हो चुके हैं? और क्या दोनों देशों के बीच बातचीत सीमा पर स्थायी शांति स्थापित करने में सफल हो रही है? इन सवालों के स्पष्ट जवाब आने वाले दिनों में भारत की चीन नीति और सीमा सुरक्षा को लेकर होने वाली चर्चा के केंद्र में रह सकते हैं। फिलहाल, सीमा पर वास्तविक स्थिति को लेकर सरकार की ओर से विस्तृत स्पष्टीकरण और आगे की बातचीत के नतीजों पर नजर बनी हुई है।

Web Stories
 
इन लोगों को नहीं खाना चाहिए मोरिंगा शरीर में प्रोटीन की कमी को पूरा करने के लिए खाएं ये वेजेटेरियन फूड्स हल्दी का पानी पीने से दूर रहती हैं ये परेशानियां सकट चौथ व्रत पर भूल से भी न करें ये गलतियां बुध के गोचर से इन राशियों का शुरू होगा गोल्डन टाइम