अलीगढ़। भारतीय क्रिकेट टीम के सदस्य रिंकू सिंह के पिता खानचंद टी-20 वर्ल्ड कप की ट्रॉफी अपने बेटे को उठाते हुए देखना चाहते थे। अपने इस सपने के पूरा होने के बारे में उन्होंने 30 जनवरी को डीपीएस अलीगढ़ में दमदारी से दावा किया था। मौका था डीपीएस में वर्ल्ड कप ट्रॉफी के प्रदर्शन कार्यक्रम का, क्योंकि रिंकू इस विद्यालय के छात्र रहे हैं। इसलिए यहां ट्रॉफी प्रदर्शित की गई थी। तब पिता ने बेटे को वीडियो कॉल कर ट्रॉफी दिखाते हुए कहा था, इसे देख लो, ये तुमको ही लेकर आनी है।
आज टीम में होंगे शामिल
न कंधों पर शुक्रवार को पिता की अर्थी का बोझ था, आज शनिवार को उन्हीं पर करोड़ों भारतीयों की उम्मीदें और तिरंगे की आन होगी। अलीगढ़ के लाल रिंकू सिंह ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि उनके लिए राष्ट्र प्रथम है। वे शनिवार दोपहर 12 बजे अपनी व्यक्तिगत पीड़ा को पीछे छोड़ टीम इंडिया से जुड़ने के लिए रवाना हो जाएंगे।
टी-20 वर्ल्ड कप के इस रोमांचक मोड़ पर रिंकू की मौजूदगी टीम इंडिया के लिए संजीवनी से कम नहीं है। भारत और पाकिस्तान के हाई-वोल्टेज मुकाबले में रिंकू ने जब विजयी चौका लगाया था, तब बीमारी के चलते बिस्तर पर लेटे पिता खानचंद की आंखें खुशी से चमक उठीं थीं।
पिता का सपना पूरा करने की रिंकू सिंह पर बढ़ी जिम्मेदारी
रिंकू सिंह पर अब अपने पिता के सपने को पूरा करने की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है। अगर वर्ल्ड कप में आगे के मैचों में वे बेहतर प्रदर्शन कर टीम को ट्रॉफी जिताने में योगदान दे सके तो ये उनके पिता को सबसे बड़ी श्रद्धांजलि होगी। हालांकि ये ट्रॉफी जिताऊ प्रदर्शन उनको पिता की फटकार व सुझाव के बिना ही करना होगा। क्योंकि प्रदर्शन में कोई खामी रहने पर रिंकू पिता से सलाह-मशविरा करते थे।
अब पिता के सुझावों के बिना ही करना होगा बेहतर प्रदर्शन
खानचंद बेटे को सुझाव भी देते थे और फटकारते भी थे। ऐसा जिक्र उन्होंने डीपीएस में ट्रॉफी प्रदर्शन के दौरान किया था। उन्होंने बताया था कि न्यूजीलैंड से पांच टी-20 मैचों की सीरीज के चौथे मैच में रिंकू ने तेजी से रन बनाते हुए 30 गेंदों पर 39 रन बनाए। तीन चौके व दो छक्कों के साथ 130 के स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी कर रहे थे। तभी नीची रही गेंद पर रिंकू एलबीडब्ल्यू से आउट हो गए। इस पर उनको फोन करके डांट भी लगाई। कहा कि स्वीप शाट खेलकर इस गेंद को बाउंड्री के बाहर भी भेज सकते थे। रिंकू ने जवाब दिया हां, उस समय टाइमिंग मिस हो गई थी।
धोनी और सचिन जैसी कर्तव्यनिष्ठा
रिंकू सिंह का यह फैसला देश के महान क्रिकेटरों की याद दिलाता है। क्रिकेट जगत ने पहले भी देखा है कि कैसे सचिन तेंदुलकर और विराट कोहली ने पिता के निधन के तुरंत बाद मैदान पर उतरकर देश के प्रति अपना फर्ज निभाया था। अब उसी गौरवशाली और अनुशासित परंपरा में रिंकू सिंह का नाम भी सुनहरे अक्षरों में जुड़ गया है।