कोलकाता। पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची के शुद्धिकरण को लेकर चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया अब अपने अंतिम चरण में है। चुनाव आयोग ने शनिवार, 28 फरवरी को राज्य के विभिन्न जिलों में अपडेटेड मतदाता सूची प्रकाशित करना शुरू कर दिया है, जिसके शुरुआती आंकड़ों ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग (EC) ने राज्य की मतदाता सूची में एक बड़ा ‘सफाई अभियान’ चलाया है।
शनिवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया शुरू होने के बाद से केवल बांकुरा जिले में ही लगभग 1.18 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं। यह जिले की कुल मतदाता संख्या का लगभग 3% से अधिक है।
सत्ता और विपक्ष के बीच ‘नेट डिलीशन’ का खेल
बांकुरा जिला, जहां BJP और TMC दोनों का राजनीतिक प्रभाव बराबरी का माना जाता है, वहां के आंकड़े काफी महत्वपूर्ण हैं। 4 नवंबर 2025 को जब प्रक्रिया शुरू हुई, तब यहां 30,33,830 मतदाता थे। 16 दिसंबर को जारी ड्राफ्ट रोल के बाद यह संख्या घटकर 29,01,009 रह गई। सुनवाई और गहन जांच के बाद 4,000 और नाम हटाए गए। हालांकि, कुछ नए आवेदन (फॉर्म 6) स्वीकार भी किए गए। अब बांकुरा की अंतिम मतदाता सूची लगभग 29,15,000 पर आ टिकी है।
कैसे बदली बांकुरा की मतदाता संख्या? नाम क्यों हटाए गए?
बैंकुरा जिले से जारी आंकड़ों के अनुसार, SIR प्रक्रिया के बाद करीब 1.18 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं, जो जिले के कुल मतदाताओं का 3 प्रतिशत से अधिक है। बैंकुरा को ऐसा जिला माना जाता है जहां BJP और TMC दोनों की लगभग बराबर राजनीतिक पकड़ रही है, ऐसे में यह बदलाव चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। वहीं, Form-6 के तहत नए मतदाताओं के कुछ हजार आवेदन मंजूर किए गए। इन सभी प्रक्रियाओं के बाद बैंकुरा की अंतिम मतदाता संख्या लगभग 29.15 लाख पर आकर रुकी है। यानी कुल मिलाकर 1.18 लाख नाम नेट रूप से हटे।
Bengal SIR से पूरे राज्य में 7.66 करोड़ से घटकर 7.08 करोड़ हुए
मतदाता बैंकुरा तो महज एक उदाहरण है 16 दिसंबर को प्रकाशित ड्राफ्ट रोल में पूरे पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची 7.66 करोड़ से घटकर 7.08 करोड़ रह गई थी। आयोग के अनुसार, नाम हटाने के मुख्य कारण मतदाताओं की मृत्यु, पलायन (Migration), दोहरा पंजीकरण (Duplication) और पते पर अनुपलब्धता रहे हैं। अभी भी राज्य के लगभग 60 लाख मतदाताओं के नाम ‘पेंडिंग केस ‘ कैटेगरी में हैं। इनके भाग्य का फैसला आने वाले समय में सप्लीमेंट्री लिस्ट के जरिए होगा। PTI के मुताबिक, शनिवार दोपहर 12:30 बजे तक बैंकुरा और कूचबिहार जैसे जिलों में हार्ड कॉपी नोटिस बोर्ड पर चस्पा कर दी गई थी, लेकिन EC की वेबसाइट और मोबाइल ऐप पर लिस्ट पूरी तरह अपलोड नहीं हुई थी। इस वजह से मतदाताओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
SIR के दूसरे चरण में क्या हुआ?
16 दिसंबर को जारी ड्राफ्ट रोल में ही बड़ा झटका लग चुका था। अगस्त 2025 तक कुल 7.66 करोड़ मतदाता थे। ड्राफ्ट रोल के बाद 7.08 करोड़ नाम हटे यानी पहले चरण में ही 58 लाख से ज्यादा नाम हटे। दूसरे चरण में 1.67 करोड़ मतदाताओं की सुनवाई हुई 1.36 करोड़ नामों में उम्र/स्पेलिंग जैसी गलतियां मिली, 31 लाख मामलों में मैपिंग की समस्या आई। अब भी करीब 60 लाख मतदाता अंडर एडजुडिकेशन हैं, जिनका फैसला आने वाले सप्लीमेंट्री रोल में होगा।
सुप्रीम कोर्ट का दखल और ‘अपूर्ण’ अंतिम सूची
इस बार की पुनरीक्षण प्रक्रिया विवादों और कानूनी लड़ाइयों से घिरी रही। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने को ‘उत्पीड़न’ बताया था, जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 142 का प्रयोग करते हुए निर्देश दिया कि 28 फरवरी के बाद भी सप्लीमेंट्री लिस्ट जारी की जा सकती हैं, ताकि कोई भी वैध मतदाता छूट न जाए। कोर्ट ने जिला जजों और न्यायिक अधिकारियों को इन मामलों की सुनवाई में तैनात किया है ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
साइबर कैफे और कार्यालयों में भारी भीड़
जैसे ही जिलों में मतदाता सूची की हार्ड कॉपियां (Hard Copies) नोटिस बोर्ड पर लगाई गईं, वहां लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। चूंकि डेटा अभी पूरी तरह से पोर्टल और मोबाइल ऐप पर अपडेट नहीं हुआ था, इसलिए लोग जिला मजिस्ट्रेट और ब्लॉक कार्यालयों के बाहर लंबी कतारों में खड़े नजर आए। उत्तरी कोलकाता से आई रिपोर्टों के अनुसार, उत्तर कोलकाता के कुछ हिस्सों में लगभग 17,000 नाम गायब पाए गए हैं, जिससे राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह प्रकाशन चरणों (Phases) में किया जा रहा है। जिन लोगों के नाम फिलहाल ‘अंडर एडजुडिकेशन’ (विचाराधीन) हैं, उन्हें न्यायिक अधिकारियों की सुनवाई के बाद सप्लीमेंट्री लिस्ट में शामिल किया जा सकता है।