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ईरान पर नए सैन्य हमले का खतरा बढ़ा, अमेरिका-इजरायल की तैयारियों को लेकर बड़ा दावा, जल्द करेंगे अटैक

नई दिल्ली । मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव बढ़ने की आशंका गहरा गई है। एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिका और इजरायल ईरान के खिलाफ बड़े सैन्य अभियान दोबारा शुरू करने की तैयारी कर. . .

नई दिल्ली । मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव बढ़ने की आशंका गहरा गई है। एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिका और इजरायल ईरान के खिलाफ बड़े सैन्य अभियान दोबारा शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, संभावित कार्रवाई 27 अक्टूबर को होने वाले इजरायली चुनावों से पहले भी शुरू हो सकती है। हालांकि, अमेरिकी व्हाइट हाउस ने मध्यावधि चुनावों से पहले ईरान पर हमले की योजना होने के दावे को सिरे से खारिज किया है। ऐसे में क्षेत्र में नए युद्ध की आशंकाओं के बीच कूटनीतिक प्रयासों पर भी सवाल उठ रहे हैं।

सैन्य अभियान दोबारा शुरू करने की तैयारी का दावा

‘ड्रॉप साइट’ की रिपोर्ट में एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि अमेरिकी सैन्य कमान बड़े स्तर पर युद्ध अभियान फिर से शुरू करने के लिए जरूरी तैयारियां कर रही है। रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से इन अभियानों को दोबारा शुरू करने की मंजूरी मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। अधिकारी ने बताया कि पिछली बार ‘एपिक फ्यूरी’ अभियान शुरू करते समय अमेरिका के सभी सैन्य संसाधन पूरी तरह तैयार नहीं थे। इस बार अभियान से पहले सैन्य तैयारियों को अधिक व्यापक बनाने पर जोर दिया जा रहा है। हालांकि, अधिकारी ने यह भी संदेह जताया कि इजरायली चुनाव से पहले हमला शुरू हो पाएगा या नहीं।

खाड़ी क्षेत्र में बढ़ सकती है अमेरिकी सैन्य मौजूदगी

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिकी युद्धपोत और मरीन बलों की अतिरिक्त तैनाती की जा रही है। इसमें यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट एयरक्राफ्ट कैरियर और 13वीं मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट के क्षेत्र की ओर बढ़ने का जिक्र है। इनके साथ करीब 10,000 अतिरिक्त नाविकों और मरीन कर्मियों की तैनाती की बात भी कही गई है। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के दो अन्य एयरक्राफ्ट कैरियर पहले से ही अरब सागर में मौजूद हैं। यदि क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां और बढ़ती हैं, तो इससे अमेरिका और ईरान के बीच टकराव का खतरा गंभीर हो सकता है। हालांकि, इन तैनातियों और किसी संभावित हमले के बीच संबंध की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।

व्हाइट हाउस ने हमले की योजना से किया इनकार

हमले की तैयारियों से जुड़ी खबरों के बीच व्हाइट हाउस ने अलग रुख अपनाया है। व्हाइट हाउस की प्रिंसिपल डिप्टी प्रेस सेक्रेटरी अन्ना केली ने ‘ड्रॉप साइट’ से बातचीत में कहा कि अमेरिका मध्यावधि चुनावों से पहले ईरान पर हमला नहीं करेगा। इस बयान से सैन्य कार्रवाई को लेकर सामने आ रहे दावों और अमेरिकी प्रशासन के आधिकारिक रुख के बीच अंतर दिखाई देता है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिका और इजरायल वास्तव में किसी नए संयुक्त अभियान की दिशा में बढ़ रहे हैं या सैन्य तैनाती का उद्देश्य दबाव बढ़ाना है।

ईरान ने दी जवाबी हमलों की चेतावनी

ईरान के वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी जनरल मोहसेन रेजाई ने चेतावनी दी है कि यदि संघर्ष दोबारा शुरू होता है, तो तेहरान क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और संसाधनों को निशाना बनाने की क्षमता रखता है। उनके मुताबिक, ईरान के पास मिसाइलों और ड्रोन के जरिए जवाब देने की व्यापक योजना है। रेजाई ने कहा कि ईरान की प्राथमिकता कूटनीतिक समाधान है, लेकिन यदि उसके खिलाफ सैन्य कार्रवाई की जाती है, तो वह जवाब देने से पीछे नहीं हटेगा। उनके बयान से संकेत मिलता है कि संभावित टकराव केवल ईरान और इजरायल तक सीमित न रहकर क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी प्रभावित कर सकता है।

बातचीत ठप होने से बढ़ी युद्ध की आशंका

रिपोर्ट में एक अन्य वरिष्ठ ईरानी अधिकारी के हवाले से दावा किया गया है कि इजरायल में मतदान से पहले बड़े पैमाने पर बमबारी की आशंका को तेहरान गंभीरता से देख रहा है। अधिकारी ने आरोप लगाया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने युद्ध समाप्त करने के लिए ईरान की ओर से पेश किए गए प्रस्ताव पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया, जिसके कारण बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी। ईरानी अधिकारी ने यह भी चेतावनी दी कि यदि नया युद्ध शुरू होता है, तो क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैनिकों को पहले के मुकाबले कहीं अधिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने संभावित अमेरिकी नुकसान दस गुना तक बढ़ने की आशंका जताई। यह ईरानी अधिकारी का दावा है, कोई स्वतंत्र रूप से पुष्ट सैन्य आकलन नहीं।

क्या फिर भड़केगा मध्य पूर्व में युद्ध?

फिलहाल अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर नए हमले की कोई पुष्ट आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है। एक तरफ मीडिया रिपोर्ट सैन्य तैयारियों और अतिरिक्त तैनाती का दावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ व्हाइट हाउस ने निकट भविष्य में हमले की योजना से इनकार किया है। कूटनीतिक बातचीत में गतिरोध और दोनों पक्षों की सख्त बयानबाजी के कारण हालात संवेदनशील बने हुए हैं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि तनाव कम करने के लिए बातचीत फिर शुरू होती है या क्षेत्र एक बार फिर बड़े सैन्य संघर्ष की ओर बढ़ता है।

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