शिमला: भारत के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले युवाओं के बीच कारोबार शुरू करने का रुझान तेजी से बढ़ रहा है। IIT मंडी और बेंगलुरु की REVA यूनिवर्सिटी की ओर से जारी GUESSS इंडिया 2025 की रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। सर्वे के मुताबिक, देश के करीब 22 फीसदी छात्र पहले ही अपना बिजनेस शुरू कर चुके हैं, जबकि 43 फीसदी विद्यार्थी भविष्य में उद्यमी बनना चाहते हैं। इसके उलट, पढ़ाई पूरी करने के बाद सरकारी नौकरी या किसी बड़ी कंपनी में काम करने की इच्छा रखने वाले छात्रों के अनुपात में गिरावट दर्ज की गई है।
25 हजार से ज्यादा छात्रों पर हुआ सर्वे
GUESSS इंडिया 2025 की राष्ट्रीय रिपोर्ट 21 अक्टूबर को जारी की गई। इसके लिए देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 1,200 से अधिक उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले 25,783 विद्यार्थियों से जानकारी जुटाई गई। रिपोर्ट के अनुसार, सर्वे में शामिल लगभग 43 फीसदी छात्रों ने अपना कारोबार शुरू करने की इच्छा जताई। यह आंकड़ा वैश्विक औसत 23 फीसदी के मुकाबले काफी अधिक है। इससे संकेत मिलता है कि भारतीय युवाओं में नौकरी तलाशने के बजाय अपना व्यवसाय खड़ा करने की आकांक्षा मजबूत हो रही है।
पढ़ाई के बाद स्टार्टअप शुरू करने की चाहत बढ़ी
रिपोर्ट में 2023 और 2025 के आंकड़ों की तुलना करने पर छात्रों की करियर संबंधी प्राथमिकताओं में बदलाव दिखाई देता है।
- अपना बिजनेस: पढ़ाई पूरी करने के तुरंत बाद कारोबार शुरू करने की इच्छा रखने वाले छात्रों का अनुपात 2023 में 14 फीसदी था, जो 2025 में बढ़कर 16.2 फीसदी हो गया।
- सरकारी नौकरी: सरकारी नौकरी को प्राथमिकता देने वाले विद्यार्थियों का आंकड़ा 12.7 फीसदी से घटकर 10.1 फीसदी रह गया।
- बड़ी कंपनियों में नौकरी: किसी बड़ी कंपनी में काम करने की इच्छा रखने वाले छात्रों का अनुपात 31.3 फीसदी से कम होकर 27.4 फीसदी हो गया।
ये आंकड़े बताते हैं कि युवाओं के करियर विकल्पों में उद्यमिता की भूमिका बढ़ रही है। हालांकि, इससे यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि नौकरी की इच्छा पूरी तरह खत्म हो रही है।
केवल बिजनेस शुरू करने की इच्छा नहीं, वास्तव में कारोबार भी कर रहे छात्र
रिपोर्ट की खास बात यह है कि बड़ी संख्या में छात्र सिर्फ बिजनेस शुरू करने के बारे में सोच नहीं रहे, बल्कि इस दिशा में कदम भी उठा चुके हैं। सर्वे में लगभग 22 फीसदी विद्यार्थियों के पहले से कारोबार शुरू करने की जानकारी सामने आई है। इससे कॉलेजों में उद्यमिता, स्टार्टअप और स्वरोजगार को लेकर बढ़ती दिलचस्पी का पता चलता है। युवाओं के लिए बिजनेस अब केवल पढ़ाई पूरी करने के बाद का विकल्प नहीं रह गया है, बल्कि कुछ विद्यार्थी पढ़ाई के दौरान ही अपने कारोबारी विचारों को हकीकत में बदल रहे हैं।
कई युवा एक से ज्यादा बिजनेस संभाल रहे
GUESSS इंडिया 2025 की रिपोर्ट में कारोबार करने वाले विद्यार्थियों और युवा उद्यमियों से जुड़े कुछ अन्य रुझान भी सामने आए हैं।
- नियमित बिक्री करने वाले विद्यार्थियों के कारोबारों में से 31 फीसदी बिजनेस वर्ष 2025 में शुरू हुए थे।
- लगभग 41 फीसदी संस्थापकों ने पहले कोई कारोबार बंद करने के बाद दोबारा नया बिजनेस शुरू किया।
- करीब 42 फीसदी युवा उद्यमी दो या उससे अधिक कारोबार चला रहे हैं।
ये आंकड़े बताते हैं कि युवा उद्यमिता का अनुभव केवल नया कारोबार शुरू करने तक सीमित नहीं है। कुछ विद्यार्थी असफलता के बाद दोबारा प्रयास कर रहे हैं, जबकि कुछ एक से ज्यादा व्यवसायों को संभाल रहे हैं।
GUESSS क्या है और क्यों अहम है इसकी रिपोर्ट?
ग्लोबल यूनिवर्सिटी एंटरप्रेन्योरियल स्पिरिट स्टूडेंट्स सर्वे यानी GUESSS विद्यार्थियों के बीच उद्यमिता से जुड़े रुझानों का अध्ययन करने वाली प्रमुख अंतरराष्ट्रीय शोध परियोजनाओं में से एक है। IIT मंडी और REVA यूनिवर्सिटी के सहयोग से तैयार इस रिपोर्ट में भारतीय विद्यार्थियों की कारोबारी महत्वाकांक्षाओं और नौकरी संबंधी प्राथमिकताओं को समझने की कोशिश की गई है। इसके निष्कर्ष उच्च शिक्षण संस्थानों में उद्यमिता को बढ़ावा देने, स्टार्टअप सहायता उपलब्ध कराने और विद्यार्थियों को व्यावसायिक कौशल सिखाने की जरूरत को रेखांकित करते हैं।
युवाओं की बदलती सोच से स्टार्टअप क्षेत्र को मिल सकता है बढ़ावा
सर्वे के नतीजे संकेत देते हैं कि भारत में युवा अब पारंपरिक करियर विकल्पों के साथ-साथ स्वतंत्र रूप से कारोबार करने को भी महत्व दे रहे हैं। पढ़ाई के तुरंत बाद स्टार्टअप शुरू करने की इच्छा में बढ़ोतरी और पहले से बिजनेस चला रहे छात्रों की संख्या इस बदलाव को दर्शाती है। हालांकि, कारोबार शुरू करने की इच्छा और लंबे समय तक सफल व्यवसाय चलाने के बीच कई चुनौतियां होती हैं। पूंजी, बाजार तक पहुंच, सही मार्गदर्शन और व्यावसायिक अनुभव जैसे पहलू युवा उद्यमियों के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे। कुल मिलाकर, GUESSS इंडिया 2025 की रिपोर्ट भारतीय विद्यार्थियों के बीच बढ़ती उद्यमशीलता की सोच को सामने लाती है। सरकारी और कॉरपोरेट नौकरियों के प्रति प्राथमिकता में आई गिरावट के साथ यह रुझान बताता है कि युवाओं के लिए अपना कारोबार खड़ा करना करियर का एक महत्वपूर्ण विकल्प बनता जा रहा है।