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चुनाव आयोग पर सीएम ममता के गंभीर आरोप, कहा- 20 वर्षों के वैधानिक सुधार की अनदेखी कर रहा चुनाव आयोग, फिर लिखा आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर एक बार फिर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा, ‘आयोग अपने ही 20 वर्षों के वैधानिक सुधारों की अनदेखी कर रहा है, जिससे मतदाताओं को अपनी पहचान दोबारा स्थापित. . .

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर एक बार फिर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा, ‘आयोग अपने ही 20 वर्षों के वैधानिक सुधारों की अनदेखी कर रहा है, जिससे मतदाताओं को अपनी पहचान दोबारा स्थापित करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।’ बता दें कि मुख्यमंत्री ने इससे पहले भी एक अन्य पत्र में निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के समक्ष कई गंभीर मुद्दे उठाए थे।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक बार फिर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखा है। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की पृष्ठभूमि में यह उनका पांचवां पत्र है। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया है कि इस प्रक्रिया के नाम पर आम लोगों को बार-बार परेशान किया जा रहा है और मतदाताओं के साथ अन्याय हो रहा है।

ज्ञानेश कुमार को चौथा पत्र भेजा

बीते शनिवार को ममता बनर्जी ने ज्ञानेश कुमार को चौथा पत्र भेजा था, जिसमें उन्होंने तीन पन्नों में कई सवाल उठाए थे। उन्होंने पूछा था कि अमर्त्य सेन, जय गोस्वामी, मोहम्मद शमी और देव को सुनवाई का नोटिस क्यों भेजा गया। साथ ही 77 लोगों की मौत की जिम्मेदारी किसकी है, यह सवाल भी उठाया था।
इस बार मुख्यमंत्री का आरोप है कि मतदाता अपनी योग्यता साबित करने के लिए जरूरी दस्तावेज जमा कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद कई मामलों में उन दस्तावेजों को स्वीकार नहीं किया जा रहा। अपने पत्र में ममता बनर्जी ने लिखा है कि मतदाताओं द्वारा जमा किए गए दस्तावेजों के लिए न तो उचित पावती (रसीद) दी जा रही है और न ही बाद में उनका कोई रिकॉर्ड दिखाया जा रहा है। बाद में इन दस्तावेजों को “नॉट फाउंड” बताया जा रहा है या कहा जा रहा है कि वे रिकॉर्ड में मौजूद नहीं हैं, जिसके आधार पर मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए जा रहे हैं।

मतदाताओं को जानबूझकर वंचित किया जा रहा

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि इस तरह मतदाताओं को जानबूझकर वंचित किया जा रहा है और आम जनता को अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है। उन्होंने इस उत्पीड़न को तत्काल रोकने की मांग की है।
ममता बनर्जी ने यह सवाल भी उठाया कि अगर माता-पिता और बच्चे की उम्र में 18–19 साल का अंतर है, तो केवल इसी आधार पर सुनवाई के लिए बुलाकर लोगों को परेशान क्यों किया जा रहा है। अपने ताजा पत्र में उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त से कहा है कि जिन मतदाताओं को सुनवाई का नोटिस भेजा गया है, वे पहले ही 2002 की मतदाता सूची से मैप किए जा चुके हैं, ऐसे मामलों में सुनवाई का नोटिस जारी करने की कोई आवश्यकता नहीं है।

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